'शुभमन गिल किसी दूसरे देश में होते तो...' भारतीय कप्तान को लेकर पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर का बड़ा बयान
भारतीय क्रिकेट टीम के युवा स्टार और कप्तानी की बागडोर संभाल रहे शुभमन गिल आज के समय में विश्व क्रिकेट के सबसे चर्चित बल्लेबाजों में से एक हैं। तीनों प्रारूपों में शतक जड़ने का कारनामा कर चुके गिल ने बहुत कम समय में अपनी क्लास, टाइमिंग और नेतृत्व क्षमता से दिग्गजों को प्रभावित किया है। हालांकि, भारतीय टीम के भीतर मिलने वाली असीम प्रतिस्पर्धा और लगातार होने वाली तीखी आलोचनाओं के बीच पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने गिल का जोरदार समर्थन करते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है।
जाफर का मानना है कि भारतीय टीम में प्रतिभा का इतना गहरा जमावड़ा है कि गिल जैसे असाधारण खिलाड़ी की क्षमता को भी कभी-कभी हल्के में ले लिया जाता है या फिर कुछ पारियों में विफलता के बाद उन पर जरूरत से ज्यादा सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। अपने बेबाक बयानों और सटीक क्रिकेट विश्लेषण के लिए मशहूर जाफर ने गिल की तुलना अन्य देशों के माहौल से करते हुए एक कड़वा और खरा सच सामने रखा है।
'किसी दूसरे देश में होते तो आंखों का तारा बना लिया जाता': जाफर
वसीम जाफर ने एक चर्चा के दौरान बातचीत करते हुए कहा कि यदि शुभमन गिल भारत के बजाय किसी अन्य देश—जैसे इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका या न्यूजीलैंड—के लिए खेल रहे होते, तो वहां का क्रिकेट बोर्ड, मीडिया और फैंस उन्हें अब तक का सबसे बड़ा धरोहर और आंखों का तारा बना चुके होते।
जाफर के अनुसार, गिल के पास जो नैसर्गिक प्रतिभा, बैकफुट पंच, शॉर्ट-आर्म जैब और कवर ड्राइव की टाइमिंग है, वह आधुनिक क्रिकेट में विरले ही देखने को मिलती है। अन्य देशों में जहां लगातार मैच जिताऊ बल्लेबाजों का सूखा रहता है, वहां गिल की क्षमता वाले खिलाड़ी को बिना किसी संदेह के हर हाल में पूरा संरक्षण और निर्विवाद समर्थन मिलता। लेकिन भारत में हर मैच के बाद बनने वाले अत्यधिक दबाव और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के कारण कई बार ऐसे दुर्लभ बल्लेबाजों के आत्मविश्वास को बेवजह परखा जाने लगता है।
कप्तानी और दबाव के बीच गिल का प्रदर्शन
शुभमन गिल को जब से कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनके हर फैसले और हर शॉट पर विश्लेषकों की पैनी नजर रहती है। जाफर ने इस पहलू पर भी खुलकर बात की और कहा कि बहुत कम उम्र में नेतृत्व का भार संभालना आसान नहीं होता। जब कोई बल्लेबाज कप्तानी करता है, तो उसे केवल अपने 50 या 100 रन नहीं बनाने होते, बल्कि पूरी टीम की रणनीति, गेंदबाजी बदलाव और मैदान पर हर खिलाड़ी की मानसिकता को भी संभालना होता है।
जाफर ने जोर देकर कहा कि चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को गिल पर पूरा भरोसा बनाए रखना चाहिए। गिल ने विदेशी पिचों—चाहे वह गाबा की ऐतिहासिक पारी हो या उपमहाद्वीप की चुनौतीपूर्ण टर्निंग ट्रैक्स—पर खुद को साबित करके दिखाया है। ऐसे में उन्हें अपनी शैली में खुलकर खेलने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।
भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की अधिकता ही बन जाती है चुनौती
पूर्व सलामी बल्लेबाज ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय क्रिकेट का ढांचा इतना विशाल है कि घरेलू सर्किट, आईपीएल और इंडिया-ए से लगातार नए-नए युवा खिलाड़ी दरवाजे खटखटाते रहते हैं। इस भारी बेंच स्ट्रेंथ का सकारात्मक पहलू यह है कि टीम को कभी विकल्पों की कमी नहीं होती, लेकिन इसका नकारात्मक पहलू यह है कि स्थापित खिलाड़ियों पर भी हर दो-तीन विफल पारियों के बाद बाहर किए जाने या उनकी जगह पर सवाल उठने का साया मंडराने लगता है।
जाफर ने गिल का बचाव करते हुए साफ शब्दों में कहा कि शुभमन गिल भारतीय क्रिकेट का वर्तमान ही नहीं, बल्कि अगले एक दशक का सबसे मजबूत भविष्य हैं। उन्हें बेवजह की नकारात्मकता से दूर रखकर केवल अपनी स्वाभाविक लय में खेलने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, क्योंकि जब गिल अपने रंग में होते हैं, तो दुनिया का कोई भी गेंदबाजी आक्रमण उनके सामने लाचार नजर आता है।