ऑनलाइन डिलीवरी पर नहीं लगेगा नया 5% GST; सरकार ने किया साफ, 18% से घटाकर 5% की गई टैक्स दर
सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर पिछले कुछ दिनों से यह खबर तेजी से वायरल हो रही है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और फूड डिलीवरी ऐप्स से सामान मंगाने पर ग्राहकों को अलग से 5 फीसदी का नया जीएसटी (GST) देना होगा। त्योहारी सीजन से ठीक पहले आई इस खबर ने ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों और नियमित रूप से खाना ऑर्डर करने वाले उपभोक्ताओं के बीच चिंता पैदा कर दी थी। हालांकि, केंद्र सरकार की प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) फैक्ट चेक टीम और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर सच्चाई सामने रख दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है, बल्कि मौजूदा टैक्स दरों में भारी कटौती की गई है।
वायरल दावे की असलियत: नया टैक्स नहीं, 18% से घटकर 5% हुआ टैक्स
सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को खारिज करते हुए सीबीआईसी ने साफ किया कि ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स द्वारा दी जाने वाली डिलीवरी सेवाओं पर पहले 18 फीसदी की दर से जीएसटी लागू होता था। 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में की गई सिफारिशों के आधार पर सरकार ने इन डिलीवरी सेवाओं पर लगने वाले टैक्स को तर्कसंगत बनाते हुए 18 फीसदी से घटाकर सीधे 5 फीसदी कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार ने ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला है, बल्कि टैक्स की दर में 13 फीसदी की बड़ी कटौती करके उपभोक्ताओं और सेवा प्रदाताओं दोनों को राहत दी है।
पीआईबी और सीबीआईसी का आधिकारिक बयान
पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 'ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर 5% नया जीएसटी लगाया गया है' का दावा पूरी तरह से भ्रामक और गलत है। सीबीआईसी के अनुसार, फूड डिलीवरी और रोजमर्रा के सामान की सप्लाई करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी शुल्क को लेकर पहले दरों में असमानता और जटिलताएं थीं। अब सभी संबंधित डिलीवरी सेवाओं पर एक समान 5 फीसदी जीएसटी का नियम लागू किया गया है। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं को ही सही मानें।
आम उपभोक्ताओं की जेब पर क्या पड़ेगा असर?
टैक्स दर 18 फीसदी से घटकर 5 फीसदी होने से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी चार्ज के बिलिंग कंपोनेंट में राहत देखने को मिल सकती है। पहले जब डिलीवरी फीस पर 18 फीसदी टैक्स जुड़ता था, तो अंतिम बिल राशि बढ़ जाती थी। अब 5 फीसदी की रियायती दर लागू होने के बाद डिलीवरी चार्ज पर टैक्स की लागत कम हो जाएगी। यह कदम डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देने और अंतिम उपभोक्ता तक सामान पहुंचाने की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसे भ्रामक तरीके से 'नया टैक्स' बताकर प्रचारित किया जा रहा था।