बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास AAP का उग्र प्रदर्शन, आचार संहिता उल्लंघन और अव्यवस्था के आरोप में अरविंद केजरीवाल पर FIR दर्ज
राजधानी दिल्ली के हृदय स्थल कनॉट प्लेस और बंगला साहिब गुरुद्वारे के आसपास उस वक्त भारी सियासी घमासान छिड़ गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं ने अचानक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन के चलते पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने त्वरित कानूनी कार्रवाई करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह प्रदर्शन बिना किसी पूर्व अनुमति के आयोजित किया गया था, जिससे आम नागरिकों और धार्मिक स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
बिना अनुमति के प्रदर्शन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप
दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में सार्वजनिक शांति भंग करने, सरकारी आदेशों की अवहेलना और धारा 144 के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल की गई हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार लुटियंस जोन और संवेदनशील धार्मिक स्थलों के आसपास किसी भी प्रकार के राजनीतिक जमावड़े या धरने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। आप कार्यकर्ताओं ने बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के बंगला साहिब गुरुद्वारे के निकट मुख्य मार्ग को अवरुद्ध करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कई स्तरों पर बैरिकेडिंग लगानी पड़ी। पुलिस का दावा है कि बार-बार लाउडस्पीकर पर चेतावनी दिए जाने के बावजूद भीड़ हटने को तैयार नहीं हुई, जिसके चलते सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानूनी कदम उठाना अनिवार्य हो गया।
धार्मिक स्थल के पास राजनीतिक टकराव पर गरमाई राजनीति
बंगला साहिब गुरुद्वारे जैसे अत्यंत प्रतिष्ठित और संवेदनशील धार्मिक केंद्र के समीप हुए इस प्रदर्शन ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी पर धार्मिक स्थलों की मर्यादा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ताक पर रखकर राजनीति करने का तीखा आरोप लगाया है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसे सरकार और पुलिस की दमनकारी नीति करार दिया है। पार्टी का तर्क है कि वे जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि पुलिस का यह कदम सिर्फ विपक्ष की आवाज दबाने और नेताओं को कानूनी मुकदमों में उलझाए रखने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
चुनावी माहौल और रणनीतिक टकराव के मायने
दिल्ली की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव पहले से ही चरम पर हैं। अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी लगातार जांच एजेंसियों और पुलिसिया कार्रवाई के निशाने पर होने का आरोप लगाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी के प्रमुख चौराहों पर इस तरह के शक्ति प्रदर्शन के जरिए आम आदमी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रहने की कोशिश कर रही है। हालांकि, गुरुद्वारे के पास हुए इस हंगामे और उसके बाद दर्ज हुई एफआईआर ने पार्टी की कानूनी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि अदालत में इस मामले पर पुलिस क्या रुख अपनाती है और आप का कानूनी प्रकोष्ठ इस नई एफआईआर को चुनौती देने के लिए क्या कदम उठाता है।