'वैभव सूर्यवंशी को बाहर रखने के लिए संजू सैमसन ने ऐसा किया'; आर अश्विन ने राजस्थान रॉयल्स के फैसले पर तोड़ी चुप्पी
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और घरेलू क्रिकेट में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से तहलका मचाने वाले बिहार के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट जगत में नई बहस छिड़ गई है। महज 13-14 साल की उम्र में अपनी आक्रामक बैटिंग से दिग्गजों को हैरान करने वाले वैभव को टीम कॉम्बिनेशन और प्लेइंग-11 में मौका न मिलने पर फैंस लगातार सवाल उठा रहे थे। अब इस पूरे मामले पर भारतीय क्रिकेट टीम और राजस्थान रॉयल्स के पूर्व स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने खुलकर अपनी बात रखी है। अश्विन ने कप्तान संजू सैमसन के रणनीतिक दृष्टिकोण और मैनेजमेंट के फैसले की परतें खोलते हुए बताया है कि आखिर क्यों वैभव सूर्यवंशी को सीधे तौर पर मैदान में उतारने के बजाय बाहर बैठाकर तैयार करने की रणनीति अपनाई गई।
संजू सैमसन की रणनीति और अश्विन का बड़ा खुलासा
अपने यूट्यूब चैनल और क्रिकेट टॉक शो पर बात करते हुए रविचंद्रन अश्विन ने उन दावों को सिरे से खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि वैभव सूर्यवंशी के साथ कोई नाइंसाफी हो रही है। अश्विन ने स्पष्ट किया कि संजू सैमसन और टीम मैनेजमेंट का यह फैसला युवा खिलाड़ी को दरकिनार करने के लिए नहीं, बल्कि उसके करियर को सुरक्षित रखने और उसे बड़े मंच के भारी दबाव से बचाने के लिए लिया गया है। अश्विन ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी इतनी कम उम्र में अचानक लाइमलाइट में आता है, तो एक खराब मैच या खराब स्पेल उसके पूरे आत्मविश्वास को हिला सकता है। संजू सैमसन ने एक अनुभवी कप्तान की तरह वैभव को तुरंत आग में झोंकने के बजाय नेट्स पर मजबूत करने की रणनीति बनाई है।
'कच्ची उम्र में भारी उम्मीदों का बोझ खतरनाक': अश्विन की दो टूक
अश्विन ने आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों के मानसिक विकास पर जोर देते हुए कहा कि संजू सैमसन की सोच पूरी तरह से दूरगामी है। उन्होंने कहा, "लोग बाहर बैठकर सोचते हैं कि अगर कोई लड़का शानदार शॉट मार रहा है तो उसे तुरंत 140-150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार फेंकने वाले गेंदबाजों के सामने उतार देना चाहिए। लेकिन ड्रेसिंग रूम की हकीकत अलग होती है। संजू और कोचिंग स्टाफ जानते हैं कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का एक असाधारण हीरा हैं। अगर उन्हें बिना पूरी तकनीकी तैयारी के मैदान में उतारा जाता और वे दो-तीन पारियों में सस्ते में आउट हो जाते, तो वही लोग उनकी आलोचना करने लगते जो आज उन्हें खिलाने की मांग कर रहे हैं।" अश्विन के मुताबिक संजू का यह कदम वैभव के खेल को निखारने का एक सोचा-समझा तरीका है।
कौन हैं रिकॉर्ड बनाने वाले युवा वैभव सूर्यवंशी?
बिहार के समस्तीपुर से ताल्लुक रखने वाले वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में रणजी ट्रॉफी खेलकर और अंडर-19 स्तर पर रिकॉर्डतोड़ शतक जड़कर इतिहास रचा था। आईपीएल ऑक्शन में जब उन्हें करोड़ों की बोली लगाकर राजस्थान रॉयल्स ने अपनी टीम में शामिल किया, तो वे टूर्नामेंट के इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए थे। ऑक्शन के बाद से ही हर क्रिकेट प्रेमी इस युवा बल्लेबाज को चौके-छक्के लगाते देखने के लिए बेताब था। हालांकि, शुरुआती मैचों में जब उन्हें प्लेइंग-11 या इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर मौका नहीं मिला, तो सोशल मीडिया पर संजू सैमसन की कप्तानी और टीम चयन को लेकर सवाल खड़े होने लगे थे।
राजस्थान रॉयल्स का युवाओं को तराशने का पुराना इतिहास
राजस्थान रॉयल्स की फ्रेंचाइजी हमेशा से युवा प्रतिभाओं को तलाशने और संवारने के लिए जानी जाती रही है। चाहे संजू सैमसन खुद रहे हों, यशस्वी जायसवाल हों, रियान पराग हों या ध्रुव जुरेल—टीम ने हमेशा अपने युवा खिलाड़ियों को कई सीजन तक बैक किया है। अश्विन ने इसी बात की याद दिलाते हुए कहा कि रियान पराग और यशस्वी जायसवाल को भी शुरुआत में काफी संघर्ष करना पड़ा था, लेकिन मैनेजमेंट ने उन पर लगातार भरोसा बनाए रखा और आज वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैच विनर बन चुके हैं। अश्विन के अनुसार वैभव सूर्यवंशी के मामले में भी टीम वही धैर्य और योजना अपना रही है ताकि जब वे मैदान पर उतरें, तो पूरी तरह परिपक्व होकर उतरें।
सही वक्त पर मिलेगा मौका, जल्द दिखेगा बल्ला
अश्विन के इस बयान के बाद क्रिकेट प्रशंसकों को संजू सैमसन के फैसले के पीछे की असली मंशा समझ में आ रही है। क्रिकेट जानकारों का भी मानना है कि टी20 के सबसे कड़े मुकाबले में किसी टीनेजर को सीधे उतारने से ज्यादा जरूरी है कि उसे विश्व स्तरीय गेंदबाजों का सामना करने के लिए नेट्स पर पर्याप्त समय दिया जाए। संजू सैमसन की अगुवाई में मैनेजमेंट वैभव को ड्रेसिंग रूम के माहौल, दबाव झेलने की कला और तकनीकी बारीकियों से रूबरू करा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टूर्नामेंट के आगे के मुकाबलों में संजू सैमसन कब इस युवा धुरंधर को मैदान पर उतारते हैं और वैभव अपनी प्रतिभा का लोहा कैसे मनवाते हैं।