एकता कपूर के लिए सबसे बुरा दौर था साल 2008: बोलीं- 'टीआरपी गिरी, शोज बंद हुए और ऐश्वर्या राय की शादी ने बदल दिया था सब कुछ'
भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री की बेताज रानी मानी जाने वाली मशहूर प्रोड्यूसर एकता कपूर ने अपने करियर के सबसे दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण दौर को लेकर खुलकर बात की है। एकता कपूर, जिन्होंने 2000 के दशक में 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'कहानी घर घर की' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे ब्लॉकबस्टर धारावाहिकों से घर-घर में अपनी सल्तनत खड़ी की थी, उनके जीवन में एक ऐसा साल भी आया जब सब कुछ ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगा था। एकता ने खुलासा किया है कि साल 2008 उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन का सबसे काला और निराशाजनक साल साबित हुआ था। इस दौरान न केवल उनके कई ऐतिहासिक शोज एक झटके में बंद हो गए, बल्कि टीवी रेटिंग्स धड़ाम हो गईं और उनके साम्राज्य की नींव हिल गई थी।
एकता कपूर ने साझा किया कि 2000 से 2007 तक का दौर उनके लिए स्वर्णिम काल था, जहां वे जो भी बनाती थीं, वह टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ देता था। लेकिन 2007 के अंत और 2008 की शुरुआत में देश में मनोरंजन के पूरे परिदृश्य में अप्रत्याशित बदलाव आने लगे।
जब एक साथ बंद हुए आइकॉनिक शोज और टूट गया स्टार प्लस से बरसों का नाता
साल 2008 एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफिल्म्स के लिए लगातार झटकों का साल रहा। सबसे बड़ा धक्का तब लगा जब स्टार प्लस के साथ उनका वर्षों पुराना अटूट रिश्ता दरक गया। स्टार नेटवर्क और बालाजी के बीच तीखे मतभेद उभरे, जिसके चलते चैनल ने उनके फ्लैगशिप धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' को अचानक ऑफ-एयर करने का फैसला सुना दिया। यह वही शो था जिसने भारतीय टेलीविजन के इतिहास को नए सिरे से लिखा था।
इसके साथ ही एकता के अन्य प्राइम-टाइम शोज की टीआरपी भी तेजी से गिरने लगी। चैनलों ने उनके कंटेंट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और नए प्रतिद्वंद्वी चैनलों के आने से मार्केट का समीकरण पूरी तरह बदल गया। एकता ने बताया कि जिस प्रोडक्शन हाउस को कभी अपराजेय माना जाता था, उसके दफ्तर में अचानक सन्नाटा छाने लगा था और लोग कयास लगाने लगे थे कि क्या एकता कपूर का दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।
आईपीएल की शुरुआत और ऐश्वर्या राय से जुड़े बड़े बदलावों का दौर
एकता कपूर ने उस दौर की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए बताया कि 2008 में मनोरंजन जगत में कई बड़ी और ऐतिहासिक घटनाएं एक साथ घट रही थीं। एक तरफ इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल (IPL) का पहला सीजन लॉन्च हुआ, जिसने भारत में शाम 8 से 11 बजे के प्राइम-टाइम टीवी देखने के ढर्रे को पूरी तरह पलट दिया। जो महिलाएं और परिवार पहले डेली सोप्स से चिपके रहते थे, वे अब क्रिकेट के रोमांच में डूब गए, जिससे बालाजी के धारावाहिकों की व्यूअरशिप पर सीधा वार हुआ।
वहीं दूसरी ओर, बॉलीवुड और पॉप कल्चर में भी जबरदस्त बदलाव देखने को मिले। ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन के जीवन से जुड़े बड़े घटनाक्रमों, शादी और उनके वैश्विक दौरों ने मीडिया की पूरी सुर्खियां अपनी तरफ खींच रखी थीं। सिनेमा और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दर्शकों की दिलचस्पी टीवी के पारंपरिक सास-बहू ड्रामे से हटकर बड़े ग्लैमर, क्रिकेट और नई कहानियों की ओर मुड़ने लगी थी। एकता ने स्वीकार किया कि उस वक्त दर्शकों का ध्यान खींचना असंभव सा लगने लगा था और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस सुनामी से अपने कंटेंट को कैसे बचाएं।
डिप्रेशन, आत्ममंथन और फिर 'पवित्र रिश्ता' से ऐतिहासिक वापसी
लगातार असफलता और अपने सबसे पसंदीदा प्रोजेक्ट्स के बंद होने के बाद एकता कपूर गहरे तनाव और अवसाद में चली गई थीं। उन्होंने बताया कि उस दौर में उन्होंने अपने काम, अपनी सोच और दर्शकों की बदलती नब्ज का गहराई से आत्ममंथन किया। उन्हें समझ आया कि अगर उन्हें प्रासंगिक बने रहना है, तो पुरानी सफलता के फॉर्मूले को छोड़कर जमीन से जुड़ी नई कहानियों पर काम करना होगा।
कठिन दौर से सीखते हुए एकता ने 2009 में सुशांत सिंह राजपूत और अंकिता लोखंडे अभिनीत सीरियल 'पवित्र रिश्ता' के साथ एक नई शुरुआत की। मध्यमवर्गीय परिवार की सादगी और यथार्थवादी भावनाओं पर आधारित इस शो ने आते ही इतिहास रच दिया और टीआरपी के शिखर पर पहुंचकर एकता कपूर को दोबारा उनका खोया हुआ ताज वापस लौटा दिया। एकता का कहना है कि 2008 की ठोकर ने ही उन्हें फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (ओटीटी) के विस्तार की दिशा में सोचने का सबसे बड़ा सबक दिया था।