2 अक्टूबर को बॉक्स ऑफिस पर मचेगा घमासान, ‘दृश्यम 3’ से टकराएगी यह धमाकेदार कॉमेडी फिल्म
भारतीय सिनेमा के इतिहास में 2 अक्टूबर की तारीख हमेशा से एक खास मुकाम रखती है, लेकिन फिल्म प्रेमियों के लिए यह दिन अब सिर्फ राष्ट्रीय पर्व नहीं बल्कि 'विजय सलगांवकर' और उसके परिवार की रहस्यमयी कहानी का पर्याय बन चुका है। अब इसी तारीख को लेकर बॉक्स ऑफिस का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सस्पेंस और मर्डर मिस्ट्री के बेताज बादशाह अजय देवगन अपनी कल्ट फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी ‘दृश्यम 3’ (Drishyam 3) लेकर सिनेमाघरों में उतरने को तैयार हैं। हालांकि, इस बार 2 अक्टूबर का रास्ता विजय सलगांवकर के लिए बिल्कुल आसान नहीं होने वाला है। ट्रेड गलियारों से आई ताजा खबरों के मुताबिक, उसी दिन एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म भी थिएटर्स में दस्तक देने जा रही है। बॉक्स ऑफिस पर एक तरफ जहां रोंगटे खड़े कर देने वाला क्राइम-थ्रिलर ड्रामा होगा, तो वहीं दूसरी तरफ दर्शकों को लोटपोट करने वाला हंसी का फव्वारा फूटेगा। इस महाक्लैश की खबर सामने आते ही सिनेमा जगत और दर्शकों में जबर्दस्त हलचल मच गई है।
2 अक्टूबर और दृश्यम का अटूट नाता, विजय सलगांवकर की वापसी से थिएटर्स में खलबली
बॉलीवुड में अगर किसी तारीख को किसी फिल्म फ्रेंचाइजी ने अपना ट्रेडमार्क बनाया है, तो वह निस्संदेह ‘दृश्यम’ और '2 अक्टूबर' है। स्वामी चिन्मयानंद का आश्रम, पणजी की यात्रा, होटल में पाव भाजी और 3 अक्टूबर को वापसी की वह गढ़ी हुई कहानी दर्शकों के जेहन में हमेशा के लिए दर्ज हो चुकी है। मेकर्स ने इसी तारीख के ऐतिहासिक महत्व को भुनाते हुए ‘दृश्यम 3’ को 2 अक्टूबर पर रिलीज करने का फैसला किया है। पिछले दोनों भागों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान रचे थे और दर्शकों को सीट से बांधे रखा था। अब तीसरे और संभवतः निर्णायक भाग में यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि क्या आईजी और पुलिस प्रशासन सलगांवकर परिवार के राज का पर्दाफाश कर पाते हैं या फिर विजय एक बार फिर कानून के फंदे से अपने परिवार को महफूज निकाल ले जाता है। थ्रिलर जॉनर के दीवाने दर्शक इस रिलीज डेट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
कॉमेडी फिल्म की सीधी चुनौती, सस्पेंस बनाम ठहाकों का जोरदार मुकाबला
दृश्यम 3 के इस गंभीर और तनाव से भरे सस्पेंस के सामने दर्शकों को गुदगुदाने के लिए एक बड़ी कॉमेडी फिल्म को मैदान में उतारा जा रहा है। पारिवारिक कॉमेडी और लाफ्टर जॉनर की फिल्मों का अपना एक बहुत बड़ा और वफादार दर्शक वर्ग होता है, जो छुट्टियों के दिन पूरे परिवार के साथ सिनेमाघरों में सिर्फ ठहाके लगाने पहुंचता है। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती की राष्ट्रीय छुट्टी और उसके साथ मिलने वाले लंबे वीकेंड का फायदा उठाने के लिए दोनों ही प्रोडक्शन हाउस अपनी-अपनी ताकत झोंक रहे हैं। जहां दृश्यम 3 युवाओं और सस्पेंस प्रेमियों की पहली पसंद बनेगी, वहीं कॉमेडी फिल्म उन परिवारों और बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करेगी जो छुट्टी के दिन किसी भी तरह के भारी-भरकम सस्पेंस के बजाय हल्का-फुल्का मनोरंजन चाहते हैं। यह मुकाबला कंटेंट के स्तर पर बेहद कड़ा और दिलचस्प होने वाला है।
मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन में स्क्रीन शेयरिंग को लेकर छिड़ी रस्साकशी
जब भी दो बड़ी और अलग-अलग जॉनर की फिल्में एक ही दिन रिलीज होती हैं, तो सबसे बड़ा संकट सिनेमाघरों के मालिकों और वितरकों के सामने खड़ा होता है। मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े फिल्म वितरण क्षेत्रों में स्क्रीन के बंटवारे को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। मल्टीप्लेक्स चेन्स में तो स्क्रीन और शोज का विभाजन अनुपात के आधार पर कर दिया जाता है, लेकिन सिंगल स्क्रीन थिएटर्स में स्थिति बेहद नाजुक हो जाती है। सिंगल स्क्रीन के मालिक अक्सर उस फिल्म को प्राथमिकता देते हैं जिसमें मास अपील और दर्शकों को बार-बार खींचने का दम हो। दृश्यम फ्रेंचाइजी की उत्तर भारत और टियर-2, टियर-3 शहरों में भारी मांग को देखते हुए वितरक अधिक से अधिक प्राइम टाइम शोज सुरक्षित करने की जुगत में हैं, जबकि कॉमेडी फिल्म के निर्माता भी पारिवारिक दर्शकों के लिए दोपहर और शाम के शोज हासिल करने पर अड़े हुए हैं।
जनरेटिव एआई सर्च और आधुनिक बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन
आज के आधुनिक डिजिटल युग में जब गूगल एआई ओवरव्यूज, बिंग कोपायलट और तमाम सर्च इंजनों पर लोग रिलीज से पहले ही फिल्मों के संभावित कलेक्शन और एडवांस बुकिंग का ट्रेंड तलाश रहे हैं, 2 अक्टूबर के इस क्लैश ने डिजिटल ट्रैफिक में भारी उछाल ला दिया है। एआई आधारित प्रेडिक्शन मॉडल्स और बॉक्स ऑफिस विशेषज्ञों का आकलन है कि छुट्टी का दिन होने की वजह से ओपनिंग डे पर दोनों ही फिल्मों को बंपर ओपनिंग मिल सकती है। कुल बॉक्स ऑफिस क्षमता इतनी बड़ी है कि दो विपरीत जॉनर की फिल्में एक साथ 50 से 60 करोड़ रुपये तक का घरेलू कारोबार पहले ही दिन दर्ज कर सकती हैं। असली परीक्षा दूसरे और तीसरे दिन शुरू होगी, जब वर्ड ऑफ माउथ और पब्लिक रिव्यूज तय करेंगे कि किस फिल्म की पकड़ मजबूत रहती है और कौन सी फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती। फिलहाल तो दोनों ही खेमों ने अपनी-अपनी मार्केटिंग और प्रमोशनल स्ट्रैटेजी को धार देना शुरू कर दिया है।