यूपी MLC चुनाव के लिए BJP ने उतारे उम्मीदवार, शिक्षक और स्नातक सीटों पर तय किए चेहरे

यूपी MLC चुनाव के लिए BJP ने उतारे उम्मीदवार, शिक्षक और स्नातक सीटों पर तय किए चेहरे

उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ विधान परिषद (एमएलसी) की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए चुनावी संग्राम पूरी तरह शुरू हो चुका है। समाजवादी पार्टी द्वारा सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपनी बची हुई सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए जिताऊ और अनुभवी चेहरों पर दांव लगाया है। इस सूची के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रबुद्ध वर्ग, शिक्षकों और नौजवान स्नातकों के बीच होने वाले इस द्विवार्षिक चुनाव की राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ गई है।

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए बीजेपी की नई सूची

भाजपा द्वारा जारी की गई ताजा सूची में स्नातक और शिक्षक दोनों ही श्रेणियों के प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों के नाम शामिल हैं। पार्टी ने वाराणसी स्नातक सीट से अनुभवी नेता केदार नाथ सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश कुमार गोयल को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके साथ ही इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने अशोक कुमार राठौर के नाम पर मुहर लगाई है। शिक्षक सीटों की बात करें तो वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा को टिकट दिया गया है। आगरा शिक्षक सीट पर कर्मचारी और शिक्षक राजनीति में सक्रिय इंजीनियर हरि किशोर तिवारी पर भरोसा जताया गया है, जबकि गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया है।

पहले घोषित 5 मौजूदा एमएलसी चेहरों के साथ पार्टी की पूरी टीम तैयार

इससे पहले भाजपा ने पांच सीटों पर अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्यों के नामों की घोषणा की थी, जिन्हें संगठन ने एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया था। इनमें लखनऊ स्नातक सीट से अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक सीट से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह 'गुरुजी', बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा शामिल हैं। अब बाकी बची 6 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा होने के साथ ही प्रदेश की सभी 11 सीटों पर भाजपा के योद्धा तय हो चुके हैं। पार्टी ने इस बार अपने पुराने व निष्ठावान कैडर के साथ-साथ शिक्षक संगठनों और कर्मचारी संघों से जुड़े रसूखदार नेताओं को साधने की संतुलित रणनीति अपनाई है।

23 अक्टूबर को होगा मतदान, सपा और भाजपा में सीधी टक्कर

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, विधान परिषद की इन 11 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 6 अक्टूबर तक चलेगी। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापसी की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर तय की गई है। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और 27 अक्टूबर को मतों की गणना कर नतीजे घोषित किए जाएंगे। समाजवादी पार्टी ने भी लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और आगरा समेत सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान पहले ही कर दिया है। सपा की ओर से लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा और कांति सिंह जैसे मजबूत चेहरे मैदान में हैं, जिसके चलते सभी 11 सीटों पर भाजपा और सपा के बीच सीधा और कांटे का मुकाबला देखने को मिलेगा।

बूथ लेवल और पन्ना प्रमुख स्तर पर भाजपा ने कसी कमर

एमएलसी चुनाव आम विधानसभा चुनाव की तरह सीधे विधायकों के मतों से नहीं, बल्कि पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदाताओं द्वारा वरीयता मत प्रणाली (प्रेफरेंशियल वोटिंग) के आधार पर लड़ा जाता है। इस चुनाव के विशाल भौगोलिक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए भाजपा संगठन ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तर्ज पर तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के घर-घर संपर्क करने, पन्ना प्रमुख व्यवस्था को प्रभावी बनाने और शिक्षण संस्थानों के साथ विधानसभा स्तर पर सम्मेलन आयोजित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। पार्टी का मुख्य फोकस अपने मतदाताओं को शत-प्रतिशत मतदान केंद्र तक लाकर उच्च सदन में अपनी संख्या बल को और मजबूत करने पर है।

एआई सर्च और डिजिटल ट्रेंड्स में छाई एमएलसी प्रत्याशियों की लिस्ट

आज के आधुनिक डिजिटल दौर में जब गूगल एआई ओवरव्यूज, बिंग कोपायलट और तमाम सर्च इंजनों पर लोग राजनीतिक खबरों और उम्मीदवारों के बैकग्राउंड की त्वरित पड़ताल कर रहे हैं, 'यूपी एमएलसी कैंडिडेट लिस्ट' और 'भाजपा शिक्षक स्नातक प्रत्याशी' से जुड़े सर्च में भारी इजाफा देखा जा रहा है। शिक्षक संघों की राजनीति, पुरानी पेंशन बहाली की मांग और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे इस चुनाव के मुख्य केंद्र बिंदु बने हुए हैं। आने वाले दिनों में जब नामांकन के पर्चे दाखिल होंगे और प्रचार जोर पकड़ेगा, तो उत्तर प्रदेश की शिक्षक और स्नातक सीटों का यह दंगल सूबे के राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गरमाएगा।