अखिलेश का बड़ा सियासी दांव! धनराज नथवानी बने सपा के दूसरे राज्यसभा उम्मीदवार, प्रो. रामगोपाल संग दाखिल किया नामांकन
उत्तर प्रदेश की 10 रिक्त हो रही राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर सियासी बिसात पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक अप्रत्याशित और चौंकाने वाला दांव चल दिया है। सपा की ओर से जारी अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में जहां वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव का नाम पहले से तय माना जा रहा था, वहीं दूसरे उम्मीदवार के रूप में जाने-माने उद्योगपति और खेल प्रशासक धनराज परिमल नथवानी के नाम का ऐलान कर पार्टी ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में दोनों प्रत्याशियों ने लखनऊ में अपना आधिकारिक नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इस चुनाव में भाजपा और सपा के बीच का शक्ति संतुलन और सियासी समीकरण पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है।
इस कदम ने राजनीतिक विश्लेषकों को इसलिए भी हैरत में डाल दिया है क्योंकि धनराज परिमल नथवानी के पिता परिमल नथवानी पहले से ही भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में एनडीए खेमे से जुड़े एक प्रभावशाली उद्योगपति परिवार के सदस्य को समाजवादी पार्टी द्वारा राज्यसभा का टिकट दिया जाना एक सोची-समझी रणनीतिक चाल मानी जा रही है।
अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुआ औपचारिक नामांकन
समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए दोनों प्रत्याशियों के नामों की पुष्टि की। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी ने सुबह विधानसभा पहुंचकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना पर्चा दाखिल किया। नामांकन के दौरान पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ सपा विधायक और नेता मौजूद रहे।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इस दौरान यह भी संकेत दिया कि पार्टी सिर्फ दो सीटों तक सीमित रहने के मूड में नहीं है और सही समय आने पर तीसरे उम्मीदवार के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। सपा नेतृत्व का मानना है कि नथवानी के मैदान में आने से विपक्ष के वोट बैंक और रणनीतिक प्रभाव में बड़ा इजाफा हुआ है।
कौन हैं धनराज परिमल नथवानी? जानिए उनका बैकग्राउंड
धनराज परिमल नथवानी देश के प्रमुख युवा उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट हस्तियों में गिने जाते हैं। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के डायरेक्टर पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे देश के सबसे बड़े स्टेडियम यानी अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम का संचालन करने वाले गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष भी हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बाद जीसीए के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी।
लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस में स्नातक और कॉर्पोरेट लॉ व पब्लिक रिलेशंस में मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने वाले धनराज नथवानी का दायरा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। वे द्वारकाधीश मंदिर प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष, नाथद्वारा मंदिर बोर्ड के सदस्य और गुजरात राज्य वन्यजीव बोर्ड से भी जुड़े रहे हैं। कॉर्पोरेट और खेल जगत में उनका रसूख काफी व्यापक माना जाता है।
यूपी का अंकगणित और भाजपा के लिए नई चुनौती
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 प्रथम वरीयता के वोटों की दरकार है। समाजवादी पार्टी के पास अपने दो प्रत्याशियों को सुरक्षित रूप से जिताने के लिए आवश्यक 74 से अधिक विधायकों का समर्थन आसानी से उपलब्ध है।
हालांकि, धनराज नथवानी की उम्मीदवारी ने भाजपा के आठवें या संभावित नौवें प्रत्याशी के गणित को पेचीदा बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नथवानी के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और गैर-सपा विधायकों से व्यक्तिगत संबंध हैं। ऐसे में निर्दलीय विधायकों, छोटे सहयोगी दलों और असंतुष्ट विधायकों के बीच क्राॅस वोटिंग का जोखिम अब एनडीए खेमे के लिए भी बढ़ सकता है।
कॉर्पोरेट और सियासत के संगम से गरमाया माहौल
सपा द्वारा एक बड़े उद्योगपति को उच्च सदन भेजने के फैसले पर प्रदेश की सियासत में तीखी प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। जहां एक ओर इसे अखिलेश यादव का मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विरोधी खेमा इसे समाजवादी विचारधारा और कॉर्पोरेट राजनीति के विरोधाभास के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
बहरहाल, नामांकन दाखिल होने के साथ ही यह तय हो गया है कि उत्तर प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव अब केवल औपचारिक नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में जोड़-तोड़, रणनीतिक बैठकों और सियासी दांव-पेंचों का एक बड़ा अखाड़ा बनेगा।