'अखिलेश के बिना सब सूना है...', कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर बोले पूर्व BJP सांसद बृजभूषण शरण सिंह

'अखिलेश के बिना सब सूना है...', कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर बोले पूर्व BJP सांसद बृजभूषण शरण सिंह

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर विपक्षी 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर तनातनी और खींचतान खुलकर सतह पर आने लगी है। एक ओर जहां कांग्रेस पार्टी प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 150 सीटों पर चुनाव लड़ने का मजबूत दावा ठोक रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) इतनी सीटें छोड़ने के कतई मूड में नहीं दिख रही है। इसी गरमा-गरम सियासी माहौल के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कद्दावर नेता और कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने सूबे के राजनीतिक पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर तंज कसते हुए और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के समर्थन में आते हुए बृजभूषण ने दो टूक कहा कि 'अखिलेश के बिना सब सूना है'।

दिल्ली में मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे गए सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह की यह बेबाक और चुटीली टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में रहते हुए भी बृजभूषण का लगातार अखिलेश यादव के कद और उनकी ताकत को स्वीकार करना विपक्ष के गठबंधन में कांग्रेस की स्थिति को असहज करने के साथ-साथ भाजपा के भीतर भी नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

कांग्रेस की 150 सीटों की मांग और सपा का कड़ा रुख

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के उत्साहजनक नतीजों के बाद कांग्रेस पार्टी खुद को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश में जुटी है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि गठबंधन धर्म के तहत उन्हें कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए और पार्टी के पास सभी 403 सीटों के लिए सक्षम उम्मीदवार मौजूद हैं। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत पार्टी के कई शीर्ष नेता लगातार सीटों के सम्मानजनक बंटवारे की मांग उठाते आ रहे हैं।

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी किसी भी हाल में खुद को बड़े भाई की भूमिका से पीछे हटाने को तैयार नहीं है। सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी कांग्रेस को 80 से 90 सीटों से ज्यादा देने के पक्ष में नहीं है। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन समेत कई दिग्गज नेता कांग्रेस को धरातल की हकीकत पहचानने और जमीनी पकड़ के अनुसार सीटें मांगने की नसीहत दे चुके हैं। दोनों दलों के बीच रायबरेली और अमेठी की कई विधानसभा सीटों को लेकर भी खींचतान जारी है। ऐसे समय में जब दिल्ली में सीट शेयरिंग को लेकर बैठकों का दौर चल रहा है, बृजभूषण के इस बयान ने कांग्रेस की मोलभाव करने की क्षमता पर सीधा प्रहार कर दिया है।

'अखिलेश के बिना सब सूना है' - बृजभूषण के बयान के सियासी मायने

पत्रकारों ने जब बृजभूषण शरण सिंह से कांग्रेस की 150 सीटों की मांग और गठबंधन के भविष्य पर सवाल किया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए केवल एक लाइन में सपा और अखिलेश यादव का राजनीतिक वजन साफ कर दिया। उन्होंने कहा, "अखिलेश के बिना सब सूना है।" उनके इस संक्षिप्त जवाब का सीधा अर्थ निकाला जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा के खिलाफ मुख्य लड़ाई अगर कोई लड़ सकता है, तो वह केवल अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी ही है; कांग्रेस अकेले अपने दम पर राज्य में कोई बड़ा असर नहीं डाल सकती।

यह पहला मौका नहीं है जब पूर्व कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने अखिलेश यादव की तारीफ में कसीदे पढ़े हों। इससे पहले भी वे अखिलेश यादव को एक धार्मिक, संस्कारी और जमीन से जुड़ा नेता बता चुके हैं। बृजभूषण ने सार्वजनिक मंचों पर यह भी स्वीकार किया था कि जब महिला पहलवानों के विवाद के दौरान उन पर चौतरफा राजनीतिक हमले हो रहे थे, तब समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव ने उनके खिलाफ एक भी अमर्यादित शब्द नहीं कहा था और वे इस शिष्टाचार व अहसान को कभी नहीं भूल सकते।

बृजभूषण के बदले तेवर से भाजपा आलाकमान भी सतर्क

2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से ही बृजभूषण शरण सिंह के बयानों में भाजपा के प्रति तीखापन और नाराजगी कई मौकों पर देखी गई है। हालांकि उनके बेटे करण भूषण सिंह को पार्टी ने कैसरगंज से सांसद बनाया, लेकिन बृजभूषण खुद को दरकिनार किए जाने के दर्द को समय-समय पर जाहिर करते रहे हैं। उन्होंने हाल के दिनों में यहां तक कहा था कि 'अगर किसी को लगता है कि मैं भार बन चुका हूं, तो मुझे बता दें, हम दिखा देंगे कि हमारी उपयोगिता क्या है'।

गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती और अयोध्या समेत अवध व पूर्वांचल के क्षत्रिय समाज में बृजभूषण शरण सिंह का अपना एक मजबूत और स्वतंत्र प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनका बार-बार अखिलेश यादव की तारीफ करना और भाजपा की रणनीति से इतर बयान देना 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।

गठबंधन की बैठकों में बढ़ेगा अखिलेश का दबदबा

बृजभूषण के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि अब तो विरोधी दल के बड़े नेता भी मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ही भाजपा का असली विकल्प हैं।

सीटों के बंटवारे को लेकर दिल्ली में हो रही चर्चाओं के बीच इस बयान ने कांग्रेस नेतृत्व को बैकफुट पर धकेलने का काम किया है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपनी 150 सीटों की जिद पर अड़ी रहती है या फिर अखिलेश यादव की शर्तों को स्वीकार करते हुए सीमित सीटों पर ही समझौता करने को मजबूर होती है।