दिलजीत दोसांझ के दिल्ली कॉन्सर्ट की तारीख तय, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मचेगा धमाल
मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ के प्रशंसकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अपने अंतरराष्ट्रीय दौरों और धमाकेदार लाइव प्रस्तुतियों से देश-दुनिया में धूम मचाने वाले दिलजीत दोसांझ ने दिल्ली में अपने आगामी कॉन्सर्ट को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सोशल मीडिया पर कॉन्सर्ट रद्द होने या सुरक्षा कारणों से टलने की तमाम अफवाहों और टीवी बहसों पर विराम लगाते हुए दिलजीत ने आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि वे राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जवाहरलाल नेहरू (JLN) स्टेडियम में लाइव परफॉर्म करेंगे।
दिलजीत ने अपने प्रशंसकों के लिए एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि तमाम भ्रामक खबरों, वायरल रील्स और डिबेट्स के बाद अब मंच सज चुका है और वे दिल्ली के दर्शकों से सीधे रूबरू होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा, ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन की औपचारिक मंजूरियां मिलने के बाद आयोजकों ने स्टेडियम में विशाल स्टेज और हाई-टेक साउंड सेटअप तैयार कर लिया है।
कॉन्सर्ट से ठीक पहले उठा विवाद: इन गानों पर रोक लगाने की उठी मांग
जैसे ही दिल्ली कॉन्सर्ट की तारीख पक्की हुई, वैसे ही दिलजीत के गानों को लेकर एक नया कानूनी और सामाजिक विवाद भी खड़ा हो गया। चंडीगढ़ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और प्रोफेसर डॉ. पंडितराव धरेनावर ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी (साउथ-ईस्ट) के समक्ष एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वर्ष 2019 के उस ऐतिहासिक आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें सार्वजनिक मंचों पर शराब, नशीले पदार्थों और हथियारों व हिंसा का महिमामंडन करने वाले गानों के लाइव प्रदर्शन पर सख्त पाबंदी लगाने की बात कही गई थी। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि दिलजीत दोसांझ को कॉन्सर्ट के दौरान निम्नलिखित गानों को गाने की अनुमति न दी जाए:
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'पटियाला पैग' (Patiala Peg): इस गाने में सीधे तौर पर शराब और नशे की संस्कृति का प्रचार करने का आरोप है।
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'5 तारा ठेके' (5 Tara Theke): शिकायत के अनुसार, यह गाना शराब के ठेकों और खुलेआम नशाखोरी को युवाओं के बीच एक स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में पेश करता है।
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'जेब विचों फीम लब्बीया': इस गाने में अफीम और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल का संदर्भ होने के कारण इसे सार्वजनिक मंच पर गाने से पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।
गन-कल्चर और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी रखी गईं कड़ी शर्तें
शिकायतकर्ता ने केवल गानों पर ही नहीं, बल्कि मंच पर कलाकार की वेशभूषा और बॉडी लैंग्वेज पर भी सवाल उठाए हैं। पुलिस को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि लाइव परफॉर्मेंस के दौरान कलाकार अक्सर अपनी छाती पर गन बुलेट बेल्ट (कारतूस की बेल्ट) पहनते हैं और हाथों से बंदूक चलाने का इशारा (गन गेस्चर) करते हैं।
शिकायत में कहा गया है कि जब देश में 'नशा मुक्त भारत अभियान' चल रहा हो, ऐसे समय में हजारों युवा दर्शकों के सामने इस तरह के प्रतीकों का प्रदर्शन करना समाज में गलत संदेश देता है। साथ ही, तेज आवाज वाले डेसिबल स्तर और अनियंत्रित भीड़ को देखते हुए छोटे बच्चों को स्टेज पर बुलाने से परहेज करने की भी गुजारिश की गई है।
कला की अभिव्यक्ति बनाम सामाजिक जिम्मेदारी पर नई बहस
इस विवाद के बाद एक बार फिर संगीत की आजादी और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच टकराव शुरू हो गया है। दिलजीत के प्रशंसकों का तर्क है कि ये गाने कई साल पुराने और बेहद लोकप्रिय चार्टबस्टर हैं, जिन्हें केवल मनोरंजन के नजरिए से देखा जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, सामाजिक संगठनों का मानना है कि सेलिब्रिटीज की समाज के प्रति एक नैतिक जवाबदेही होती है और उन्हें ऐसे कंटेंट से बचना चाहिए जो युवाओं को गलत दिशा में प्रेरित करे। फिलहाल दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और आयोजकों को तय नियमों व ध्वनि प्रदूषण मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।