Jailer 2: कभी साउथ सिनेमा में 'पनौती' मानी जाती थीं विद्या बालन, सालों बाद छलका दर्द बोलीं...

Jailer 2: कभी साउथ सिनेमा में 'पनौती' मानी जाती थीं विद्या बालन, सालों बाद छलका दर्द बोलीं...

भारतीय सिनेमा की सबसे सशक्त और बहुमुखी अभिनेत्रियों में शुमार विद्या बालन इन दिनों साउथ के 'थलाइवा' रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जेलर 2' को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। जहां एक तरफ तमिल सिनेमा के इस विशालकाय प्रोजेक्ट में उनकी एंट्री को लेकर फैंस बेहद उत्साहित हैं, वहीं दूसरी तरफ अभिनेत्री ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों का एक ऐसा कड़वा सच उजागर किया है जिसने हर किसी को चौंका दिया है। आज बॉलीवुड में अपनी बेजोड़ अदाकारी के दम पर राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली विद्या बालन को एक वक्त पर साउथ फिल्म इंडस्ट्री में 'पनौती' यानी अनलकी मान लिया गया था। अभिनेत्री ने हालिया बातचीत में खुलकर बताया कि कैसे एक के बाद एक प्रोजेक्ट्स बंद होने के चलते उन्हें कई तमिल और मलयालम फिल्मों से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

जब लगातार 12 फिल्मों से बाहर हुईं और मिला 'अनलकी' का तमगा

विद्या बालन ने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा था, तो उनका पहला बड़ा ब्रेक मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल के साथ फिल्म 'चक्रम' से होने वाला था। विद्या के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था, लेकिन बदकिस्मती से कुछ दिनों की शूटिंग के बाद ही वह फिल्म अचानक बंद हो गई। फिल्म के बंद होने का पूरा दोष निर्माताओं और निर्देशकों ने नवोदित विद्या बालन के मत्थे मढ़ दिया। इसके बाद उनके साथ ऐसा अजीब सिलसिला शुरू हुआ कि जिस भी प्रोजेक्ट से उनका नाम जुड़ता, वह फिल्म या तो डिब्बाबंद हो जाती या फिर शुरू ही नहीं हो पाती। विद्या ने खुलासा किया कि देखते ही देखते उन्हें एक-दो नहीं, बल्कि लगातार 12 दक्षिण भारतीय फिल्मों से यह कहकर निकाल दिया गया कि उनकी मौजूदगी फिल्मों के लिए दुर्भाग्य लेकर आती है।

तमिल फिल्म के सेट पर निर्माता ने कराया था गहरे अपमान का अहसास

अपने दर्दनाक अनुभवों को साझा करते हुए विद्या बालन ने एक तमिल फिल्म से जुड़ा बेहद अपमानजनक किस्सा भी बयां किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में एक तमिल फिल्म के लिए उन्हें साइन किया गया था और उन्होंने कुछ दिनों तक काम भी किया, लेकिन अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें फिल्म से हटाकर दूसरी अभिनेत्री को ले लिया गया। जब विद्या अपने माता-पिता के साथ चेन्नई में उस निर्माता से मिलने और कारण जानने पहुंचीं, तो निर्माता ने उनके साथ बेहद असंवेदनशील व्यवहार किया। निर्माता ने उनकी तस्वीरें और फुटेज दिखाते हुए तंज कसा कि क्या यह किसी हीरोइन की तरह दिखती हैं, इन्हें न तो नाचना आता है और न ही अभिनय करना। विद्या ने बताया कि उस दिन अपने माता-पिता के सामने हुआ वह अपमान उनके दिल को चीर गया था और वे रात भर रोती रही थीं।

टूटने के बजाय संघर्ष को बनाया ताकत और बनीं बॉलीवुड की 'शेरनी'

लगातार मिलने वाली अस्वीकृति, उपहास और 'पनौती' के ठप्पे ने विद्या बालन के आत्मविश्वास को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था। कई महीनों तक उन्होंने आईना देखना बंद कर दिया था क्योंकि उन्हें लगने लगा था कि वाकई उनमें कोई बड़ी कमी है। हालांकि, विद्या ने हार मानने के बजाय अपने हुनर पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने म्यूजिक वीडियोज और विज्ञापनों से नए सिरे से शुरुआत की और आखिरकार प्रदीप सरकार की फिल्म 'परिणीता' से बॉलीवुड में ऐसा ऐतिहासिक डेब्यू किया कि पूरी इंडस्ट्री देखती रह गई। इसके बाद 'द डर्टी पिक्चर', 'कहानी', 'तुम्हारी सुलु' और 'शेरनी' जैसी फिल्मों में अपने दम पर बॉक्स ऑफिस हिलाकर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी अंधविश्वास की मोहताज नहीं होती।

'जेलर 2' से साउथ में भव्य वापसी और अंधविश्वास को करारा जवाब

अब जब निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार की मेगा बजट फिल्म 'जेलर 2' में विद्या बालन की दमदार मौजूदगी की खबरें सामने आ रही हैं, तो यह उनके करियर का एक पूरा चक्र पूरा होने जैसा है। जिस साउथ फिल्म इंडस्ट्री ने कभी उन्हें अनलकी कहकर दरकिनार कर दिया था, आज उसी इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार रजनीकांत के साथ मुख्य भूमिका के लिए उनका नाम सबसे आगे चल रहा है। सिनेमा प्रेमियों और विश्लेषकों का मानना है कि विद्या का यह सफर उन तमाम कलाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो करियर के शुरुआती दौर में रिजेक्शन और रूढ़िवादी सोच का शिकार होते हैं। विद्या बालन की यह कहानी साफ संदेश देती है कि मेहनत और अटूट विश्वास के आगे कोई भी 'पनौती' का लेबल कभी टिक नहीं सकता।