सीएम योगी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगा चुनाव आयोग पहुंची सपा, दोनों डिप्टी सीएम को हाउस अरेस्ट करने की मांग
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर होने वाले चुनावों को लेकर प्रदेश का सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार पर सरकारी मशीनरी के खुले दुरुपयोग तथा आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। सपा का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय पहुंचा और मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्री संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर शिक्षक और स्नातक मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए ताबड़तोड़ सरकारी घोषणाएं और प्रशासनिक दबाव की रणनीति अपना रहे हैं। सपा नेताओं ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की मांग उठाई है।
सीएम योगी पर आचार संहिता उल्लंघन और ताबड़तोड़ घोषणाओं के आरोप
मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया कार्यक्रमों की तिथिवार सूची पेश की है। सपा नेताओं ने कहा कि 22 सितंबर को विधान परिषद चुनाव की अधिसूचना और घोषणा जारी होने के बाद से ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में नवचयनित प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब चुनाव शिक्षक और स्नातक कोटे का हो रहा है, तो सीधे तौर पर शिक्षक समुदाय को प्रभावित करने वाले ऐसे सरकारी आयोजन कैसे किए जा सकते हैं। इसके अलावा 12 अक्टूबर को गोरखपुर में 12 हजार शिक्षकों के साथ संवाद और 13 अक्टूबर को 68 हजार ग्राम प्रहरियों का मानदेय बढ़ाने तथा चौकीदारों की नई भर्ती की घोषणा को भी आचार संहिता का खुला उल्लंघन करार दिया गया है।
चुनाव आयोग के 2016 के निर्देशों का दिया हवाला
सपा प्रतिनिधिमंडल ने भारत निर्वाचन आयोग के 26 दिसंबर 2016 के उस स्पष्ट दिशा-निर्देश का उल्लेख किया, जिसके तहत शिक्षक या स्नातक एमएलसी चुनावों के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने वाली किसी भी प्रकार की वित्तीय घोषणा, नियुक्ति पत्र वितरण, मानदेय वृद्धि या नीतिगत निर्णय लेने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। पार्टी ने मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सभी चुनावी और सरकारी कार्यक्रमों की स्वतंत्र वीडियोग्राफी कराई जाए और चुनाव आयोग द्वारा रिकॉर्ड की गई फुटेज के आधार पर मुख्यमंत्री को आचार संहिता उल्लंघन का नोटिस जारी कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। सपा का कहना है कि जब तक नियम सबके लिए समान नहीं होंगे, तब तक लोकतंत्र में चुनावी शुचिता और निष्पक्षता की रक्षा नहीं की जा सकती।
दोनों उपमुख्यमंत्रियों को हाउस अरेस्ट करने की अनोखी मांग
समाजवादी पार्टी ने अपनी शिकायत में दोनों उपमुख्यमंत्रियों—केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक—पर भी गंभीर और सीधे आरोप मढ़े हैं। सपा का आरोप है कि दोनों उपमुख्यमंत्री क्रमशः इलाहाबाद-झांसी खंड और लखनऊ खंड स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लगातार डेरा डाले हुए हैं। पार्टी ने दावा किया कि ये दोनों नेता प्रशासनिक सर्किट हाउसों और सरकारी तंत्र का उपयोग करके संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस कप्तानों और निर्वाचन अधिकारियों पर भाजपा प्रत्याशियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का सीधा दबाव बना रहे हैं। इस स्थिति को रोकने के लिए सपा ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनाव संपन्न होने तक दोनों उपमुख्यमंत्रियों को उनके सरकारी आवासों पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) किया जाए और उनके चुनावी दौरों तथा प्रचार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
ईवीएम एफएलसी और मतदाता सूची में पारदर्शिता की गुहार
सपा प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ नेताओं के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह ने चुनाव प्रबंधन की तकनीकी निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) चल रही है, लेकिन प्रयागराज समेत कई जिलों के जिलाधिकारियों ने जांच कार्य में लगे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स या ईसीआईएल के इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों के नाम व संपर्क नंबर साझा करने से साफ मना कर दिया है। सपा ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इन इंजीनियरों की विस्तृत सूची राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाए, सभी मतदान केंद्रों पर वैध मतदाताओं की प्रमाणित सूची चस्पा की जाए और फर्जी वोटिंग रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल बना यह मुकाबला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सीटों का यह चुनाव सिर्फ उच्च सदन की सीटों का गणित नहीं है, बल्कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का एक बड़ा लिटमस टेस्ट और मनोवैज्ञानिक सेमीफाइनल बन चुका है। लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद जहां अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी शिक्षकों और बुद्धिजीवी स्नातक वर्ग में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कमान संभालते हुए गोरखपुर, बरेली, वाराणसी और मिर्ज़ापुर में ताबड़तोड़ जनसभाएं करके पूरा जोर लगा दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी की इस तीखी शिकायत और हाउस अरेस्ट की मांग पर भारत निर्वाचन आयोग क्या संज्ञान लेता है और प्रशासन को क्या निर्देश जारी करता है।