रामायणम्' में मां सीता को तलवार और युद्ध कौशल के साथ लड़ते देख भड़के दर्शक

रामायणम्' में मां सीता को तलवार और युद्ध कौशल के साथ लड़ते देख भड़के दर्शक

भारतीय पौराणिक कथाओं और महाकाव्यों पर आधारित जब भी कोई फिल्म या वेब सीरीज पर्दे पर आती है, तो दर्शकों की भावनाएं, उम्मीदें और धार्मिक आस्थाएं उससे बहुत गहराई से जुड़ जाती हैं। वर्तमान समय में सिनेमाई गलियारों में बहुचर्चित और मेगा-बजट प्रोजेक्ट 'रामायणम्' को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चाओं तक जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। फिल्म के मेकर्स द्वारा हाल ही में जारी किए गए कुछ विजुअल्स या टीजर-झलकियों में माता सीता को एक योद्धा के रूप में तलवार बाजी करते और युद्ध के मैदान में शत्रुओं से मुकाबला करते हुए दिखाया गया है, जिसके बाद से दर्शकों और पारंपरिक धार्मिक संगठनों का एक वर्ग बेहद नाराज हो गया है। दर्शकों का मानना है कि भारतीय जनमानस में माता सीता का स्वरूप हमेशा से एक त्याग, ममता, शालीनता, सहनशीलता और कोमलता की देवी के रूप में रहा है, इसलिए उन्हें इस आक्रामक और युद्धरत मुद्रा में दिखाना हमारी सांस्कृतिक मान्यताओं के खिलाफ है। दूसरी तरफ, इस भारी विरोध और तीखी आलोचनाओं के जवाब में 'रामायणम्' के मेकर्स और निर्देशक सामने आए हैं और उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ अपने इस सिनेमैटिक विजन का बचाव करते हुए कहा है कि उन्होंने माता सीता को कमजोर या असहाय दिखाने के बजाय एक शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और पराक्रमी योद्धा राजकुमारी के रूप में चित्रित किया है, जो प्राचीन काल के इतिहास और नारी शक्ति का सही प्रतीक है।

#1 रामायणम् में मां सीता के योद्धा रूप को लेकर क्यों भड़का है दर्शकों का एक वर्ग?

सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्थाओं में रामायण के हर एक पात्र की एक निश्चित छवि दशकों से लोगों के दिलों में बसी हुई है। जब मेकर्स ने 'रामायणम्' में माता सीता के किरदार को केवल महलों की चारदीवारी तक सीमित रखने के बजाय हाथों में तलवार थामे और युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए दिखाया, तो सोशल मीडिया पर इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। पारंपरिक विचार रखने वाले लोगों का तर्क है कि आदिशक्ति माता सीता का चरित्र त्याग, तपस्या और पवित्रता का सर्वोच्च आदर्श है, और उन्हें युद्ध के मैदान में हथियार उठाते दिखाना वाल्मीकि रामायण या तुलसीदास रीत रामचरितमानस की मूल भावना से अलग है। लोगों का यह भी कहना है कि आधुनिकता और सिनेमाई रोमांच पैदा करने के लिए पौराणिक कथाओं के मूल स्वरूप के साथ इस प्रकार की छेड़छाड़ करना उचित नहीं है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

#1 मेकर्स की आई सफाई: बोले- 'सीता जी केवल कोमल नहीं, बल्कि संकट के समय शस्त्र उठाने वाली साहसी रानी थीं'

लगातार बढ़ते विरोध और सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बाद 'रामायणम्' के निर्माताओं और क्रिएटिव टीम ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इस विवाद पर आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। मेकर्स का कहना है कि आज के आधुनिक दर्शकों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के सामने हम पौराणिक कथाओं को एक नए और सशक्त दृष्टिकोण के साथ पेश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि मिथिला की राजकुमारी और अयोध्या की महारानी होने के नाते सीता जी ने अपने जीवन में हर प्रकार की विषम परिस्थितियों का सामना किया था, और संकट के समय एक क्षत्रिय कुल की राजकुमारी के रूप में उन्हें युद्ध कौशल का ज्ञान होना स्वाभाविक है। निर्माताओं ने सफाई देते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेס पहुंचाना बिल्कुल नहीं है, बल्कि हमने प्राचीन ग्रंथों के कुछ ऐसे अनछुए पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया है जहां नारी शक्ति के उस रूप को दर्शाया गया है जो चुपचाप अन्याय सहने के बजाय जरूरत पड़ने पर खुद अपनी रक्षा के लिए तलवार उठा सकती है।

#1 पौराणिक कथाओं के आधुनिक फिल्मांकन और सिनेमैटिक लिबर्टी के बीच छिड़ी नई बहस

यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी पौराणिक फिल्म या वेब सीरीज को लेकर इस प्रकार का वैचारिक संघर्ष देखने को मिला हो। पिछले कुछ वर्षों में जब भी रामायण, महाभारत या अन्य धार्मिक ग्रंथों पर आधारित फिल्में बड़े पर्दे पर आई हैं, तो उनके किरदारों के पहनावे, संवादों और प्रस्तुतिकरण को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं। एक तरफ जहां सिनेमैटिक लिबर्टी (Cinematic Liberty) का समर्थन करने वाले जानकारों का मानना है कि समय के साथ कथाओं को आज के संदर्भ में प्रासंगिक बनाने के लिए थोड़ा बहुत नयापन जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक विश्लेषकों का तर्क है कि धार्मिक और ऐतिहासिक कथाओं के साथ प्रयोग करने की एक सीमा होनी चाहिए और दर्शकों की सामूहिक आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।

#1 आने वाले दिनों में फिल्म के प्रदर्शन पर पड़ सकता है इस विवाद का असर

जैसे-जैसे 'रामायणम्' की रिलीज की तारीख नजदीक आ रही है, इस प्रकार के विवाद फिल्म के लिए चर्चा का विषय तो बन ही रहे हैं, साथ ही मेकर्स के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी कर रहे हैं कि वे दर्शकों के एक बड़े वर्ग को कैसे संतुष्ट करें। फिल्म के वीएफएक्स, भव्य सेट और स्टार कास्ट को लेकर पहले से ही लोगों में भारी उत्सुकता बनी हुई थी, लेकिन अब कहानी के ट्रीटमेंट को लेकर जिस तरह की बहस छिड़ गई है, उसने फिल्म की रिलीज को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि जब यह फिल्म पूरी तरह से सिनेमाघरों में उतरेगी, तो दर्शक पर्दे पर माता सीता के इस नए और साहसी रूप को किस रूप में स्वीकार करते हैं और मेकर्स की यह दलील कितनी कारगर साबित होती है।