पाकिस्तान की नई 'फाज' मिसाइल के पीछे क्या है चीन का खूफिया सच

पाकिस्तान की नई 'फाज' मिसाइल के पीछे क्या है चीन का खूफिया सच

पड़ोसी देश पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत को अपग्रेड करने का दावा करते हुए हाल ही में अपनी पहली स्वदेशी बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) 'फाज' (FAAZ Missile) का सफल परीक्षण करने का ऐलान किया है। पाकिस्तान के सरकारी दावों के मुताबिक इस मिसाइल को जेएफ-17 (JF-17 Thunder) फाइटर जेट से टेस्ट फायर किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान इसे पूरी तरह से अपनी घरेलू इंजीनियरिंग और रिसर्च का नतीजा बता रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परदे के पीछे इसमें चीन की तकनीकी सहायता और उसकी 'किलर तकनीक' (Killer Technology) का बहुत बड़ा हाथ है। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की रक्षा औद्योगिक क्षमता इतनी उन्नत नहीं है कि वह अपने दम पर अत्याधुनिक सीकर (Seeker) और सॉलिड प्रोपल्शन तकनीक वाली मिसाइल विकसित कर सके। इस नए घटनाक्रम के बाद भारतीय सामरिक हलकों में भी इस बात की गहराई से समीक्षा की जा रही है कि क्या यह मिसाइल वास्तव में भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए कोई गंभीर चुनौती पेश करती है या यह महज कूटनीतिक प्रचार का एक हिस्सा है।

#1 क्या है पाकिस्तान की 'फाज' मिसाइल और इसके तकनीकी दावे?

पाकिस्तानी मीडिया और सैन्य विंग (ISPR) के अनुसार, 'फाज' मिसाइल एक एयर-टू-एयर और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल श्रृंखला है, जिसे ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूशंस (GIDS) द्वारा तैयार किया गया है। इस मिसाइल के कई वेरिएंट्स बताए जा रहे हैं, जिनमें फाज-आरएफ (रेडियो फ्रिक्वेंसी) और फाज-आईआईआर (इन्फ्रारेड होमिंग) शामिल हैं, जिनकी रेंज 100 किलोमीटर से अधिक बताई गई है। इसके अलावा उन्नत संस्करण 'फाज-2' की रेंज लगभग 180 किलोमीटर तक होने का दावा किया जा रहा है। इस मिसाइल में टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम और आधुनिक सेंसर तकनीक का इस्तेमाल करने की बात कही गई है, जो दुश्मन के विमानों को हवा में ही निशाना बनाने में सक्षम है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने अपने इस पहले परीक्षण में मिसाइल की सटीक स्पीड, सटीक रेंज और गाइडिंग डेटा से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं को सार्वजनिक नहीं किया है।

#1 क्या चीन ने दी है इस मिसाइल के लिए 'किलर तकनीक'?

यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान के रक्षा अनुसंधान और हथियार विकास कार्यक्रम में चीन रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है। रक्षा जानकारों के अनुसार, फाज मिसाइल में इस्तेमाल होने वाली उन्नत रडार गाइडिंग, सीकर टेक्नोलॉजी और प्रोपल्शन सिस्टम पूरी तरह से चीनी तकनीक (विशेषकर पीएल-12 या पीएल-15 मिसाइलों की तर्ज पर) पर आधारित हो सकते हैं। चीन अपनी हथियारों की तकनीक को सीधे तौर पर या तो पाकिस्तान को ट्रांसफर करता है या फिर अपने इंजीनियरों के जरिए वहां ज्वाइंट वेंचर चलाता है। पाकिस्तान भले ही इसे 'स्वदेशी' (Indigenous) करार दे रहा हो, लेकिन इसके पीछे चीन की डिफेंस सप्लाई चेन और उसकी घातक मिसाइल टेक्नोलॉजी का कड़ा सहयोग होने से इनकार नहीं किया जा सकता। बीजिंग इस तरह के हथियारों के जरिए दक्षिण एशिया में भारत के खिलाफ एक सामरिक संतुलन साधने की कोशिश करता रहा है।

#1 भारतीय वायुसेना के लिए यह कितना बड़ा खतरा? समझें जमीनी हकीकत

जब बात भारत की वायु रक्षा और रणनीतिक तैयारियों की आती है, तो भारतीय वायुसेना के पास दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलें मौजूद हैं। रूस से ली गई एस-400 (S-400 Triumf) मिसाइल प्रणाली और स्वदेशी 'अस्त्र' (Astra) मिसाइलें तकनीकी रूप से पाकिस्तान की इस नई 'फाज' मिसाइल से कहीं अधिक शक्तिशाली, तेज और अचूक मानी जाती हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भले ही कागजों पर इस मिसाइल की रेंज 100 से 180 किलोमीटर बताई जा रही हो, लेकिन वास्तविक युद्धक परिस्थितियों और जैमिंग (Jamming) के माहौल में इसकी प्रभावशीलता कितनी होगी, यह अभी जांच का विषय है। भारतीय वायुसेना के राफेल (Rafale) और सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) जैसे फाइटर जेट्स के पास सुपीरियर एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट हैं, जो किसी भी पाकिस्तानी मिसाइल के खतरे को हवा में ही नाकाम करने की पूरी क्षमता रखते हैं।

#1 सामरिक मोर्चे पर पाकिस्तान का प्रचार और भारत की मजबूत चौकसी

कुल मिलाकर, पाकिस्तान द्वारा 'फाज' मिसाइल का यह परीक्षण घरेलू जनता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रक्षात्मक साख को बचाने की एक कोशिश भर ज्यादा प्रतीत होता है। भारत की खुफिया और सैन्य एजेंसियां सीमा पर होने वाले इस तरह के हर एक तकनीकी परीक्षण पर पैनी नजर रखती हैं। भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायुसेना किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है और हमारे देश की स्वदेशी रक्षा तकनीक (जैसे डीआरडीओ के प्रोजेक्ट्स) पाकिस्तान की इस तथाकथित आधुनिक तकनीक से कई गुना आगे और भरोसेमंद है।