चीन का अकेले नहीं कर सकते मुकाबला', फिलीपींस ने भारत से मांगी मदद
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के भू-राजनीतिक समीकरण इन दिनों बहुत तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। दुनिया के सबसे शक्तिशाली और आक्रामक रुख अपनाने वाले देश चीन की विस्तारवादी नीतियों से त्रस्त होकर अब दक्षिण-पूर्व एशियाई देश खुलकर भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ाने लगे हैं। इसी कड़ी में फिलीपींस (Philippines) के राष्ट्रीय रक्षा नेतृत्व और शीर्ष अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में यह स्वीकार किया है कि वे दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन यानी चीन की दादागिरी और लगातार बढ़ती समुद्री घुसपैठ का मुकाबला अकेले करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। अपनी संप्रभुता और समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए फिलीपींस ने अब भारत के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने की गुहार लगाई है। भारत द्वारा पहले ही फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें (BrahMos Missiles) बेची जा चुकी हैं, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। अब इस ताजा घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि भारत दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक प्रभुत्व को संतुलित करने के लिए एक प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में उभर रहा है, जो नई दिल्ली के लिए एक बड़ा कूटनीतिक अवसर माना जा रहा है।
#1 दक्षिण चीन सागर में क्यों बढ़ रही है फिलीपींस की मुश्किलें और चीन का आक्रामक रवैया?
दक्षिण चीन सागर लंबे समय से दुनिया के सबसे संवेदनशील और विवादित जलमार्गों में से एक रहा है, जहां चीन अपने 'नाइन-डैश लाइन' के झूठे दावों के आधार पर पूरे समुद्र पर अपना अधिकार जताता है। फिलीपींस के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर आने वाले रीफ्स और समुद्री इलाकों में चीनी तटरक्षक जहाजों (China Coast Guard) और मिलिशिया जहाजों द्वारा लगातार फिलीपींस के मछुआरों और नौसेना के जहाजों को परेशान किया जाता है। पिछले कुछ महीनों में चीनी जहाजों द्वारा फिलीपींस के जहाजों पर पानी की बौछार करने और खतरनाक तरीके से रोकने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (PCA) के फैसलों को ठेंगा दिखाते हुए चीन जिस प्रकार से दक्षिण चीन सागर के कृत्रिम द्वीपों पर अपनी सैन्य चौकियां बना रहा है, उससे फिलीपींस की सुरक्षा के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में मनीला सरकार के पास अब भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ मिलकर एक मजबूत रक्षा मोर्चा बनाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
#1 भारत-फिलीपींस रक्षा सहयोग और ब्रह्मोस मिसाइल सौदे का रणनीतिक महत्व
भारत और फिलीपींस के बीच पिछले कुछ वर्षों में कूटनीतिक और रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक नजदीकियां आई हैं। दोनों देशों के बीच हुआ लगभग 37.5 करोड़ डॉलर का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि फिलीपींस अपनी तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय तकनीक पर कितना भरोसा करता है। जब भारत ने फिलीपींस को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें सौंपी, तो बीजिंग की नींद उड़ गई थी। अब जबकि फिलीपींस ने भारत से और अधिक सैन्य साजो-सामान, युद्धाभ्यास, समुद्री खुफिया जानकारी (Maritime Domain Awareness) साझा करने और तकनीकी प्रशिक्षण में मदद मांगी है, तो यह भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट और 'मेक इन इंडिया' इनिशिएटिव के लिए एक बहुत बड़ी सफलता है। भारतीय नौसेना और वायुसेना के जहाजों व विमानों का दक्षिण चीन सागर के बंदरगाहों पर दौरा करना चीन को यह साफ संदेश देता है कि भारत अब केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन का प्रबल समर्थक है।
#1 दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन को घेरने के लिए भारत के पास कैसे खुला यह सुनहरा मौका?
भारत की पारंपरिक विदेश नीति हमेशा से रणनीतिक स्वायत्तता और पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में तटस्थ रहने की रही है, लेकिन जब से चीन ने भारत की उत्तरी सीमाओं (लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश) पर आक्रामकता दिखाई है, तब से नई दिल्ली ने अपनी 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) को और अधिक आक्रामक और व्यावहारिक बना लिया है। कूटनीति के जानकारों का मानना है कि 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है' की तर्ज पर भारत के लिए दक्षिण चीन सागर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चीन को उसी की भाषा में जवाब देने का सबसे बेहतरीन तरीका है। जब वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश भारत की तरफ मदद की उम्मीद से देखते हैं, तो इससे दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत का कूटनीतिक कद आसमान छूने लगता है। फिलीपींस का यह बयान कि वे चीन का मुकाबला अकेले नहीं कर सकते, भारत को हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक एक 'सिक्योरिटी आर्किटेक्ट' की भूमिका निभाने का ऐतिहासिक अवसर देता है।
#1 आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों पर असर
फिलीपींस की इस गुहार और भारत के सकारात्मक रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में क्वाड (QUAD) देशों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का यह गठबंधन चीन की विस्तारवादी सोच के लिए एक बहुत बड़ा अवरोध बनने जा रहा है। भारत केवल रक्षा उपकरण बेचने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि वह एक ऐसा भरोसेमंद मित्र बन चुका है जो जरूरत पड़ने पर अपने लोकतांत्रिक साथियों की संप्रभुता की रक्षा के लिए खड़ा हो सकता है। मनीला और नई दिल्ली के बीच बढ़ती यह रणनीतिक साझेदारी बीजिंग के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने के लिए काफी है और यह भविष्य के वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन की दिशा तय करेगी।