विजय वर्मा ने CEC ज्ञानेश कुमार पर कसा तंज, प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आईं हुमा कुरैशी

विजय वर्मा ने CEC ज्ञानेश कुमार पर कसा तंज, प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आईं हुमा कुरैशी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिसिया धरपकड़ का असर अब बॉलीवुड के गलियारों में भी देखने को मिल रहा है। मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और चुनावी शुचिता को लेकर छिड़े इस विवाद में राजनीतिक दलों के बाद अब फिल्मी हस्तियों ने भी अपनी राय रखनी शुरू कर दी है। जाने-माने अभिनेता विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तंज कसा, वहीं अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने हिरासत में लिए गए युवा प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का खुलकर समर्थन किया है।

राजधानी में प्रदर्शन से पहले ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण विरोध को लेकर बहस छिड़ गई है। इसी कड़ी में दोनों कलाकारों की टिप्पणियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काफी ध्यान खींचा है।

विजय वर्मा का तीखा व्यंग्य: 'सवाल पूछना अब सबसे बड़ा अपराध'

अपनी संजीदा अदाकारी और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता विजय वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संक्षिप्त लेकिन व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए परोक्ष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त और प्रशासनिक रवैये पर कटाक्ष किया।

विजय वर्मा ने लिखा कि जब जवाबदेही मांगने वालों से ही सवाल किए जाने लगें और सवाल पूछने को ही अपराध मान लिया जाए, तो समझ लेना चाहिए कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहुत 'सुरक्षित' हाथों में है। उनके इस तंज को सीधे तौर पर चुनाव आयोग के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाने की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है। अभिनेता की इस पोस्ट पर नेटिजन्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, जहां कई लोगों ने उनकी बेबाकी की तारीफ की, तो कुछ ने उन्हें राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी।

प्रदर्शनकारियों के हक में उतरीं हुमा कुरैशी: 'शांतिपूर्ण विरोध कुचलना ठीक नहीं'

दूसरी ओर, अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने प्रदर्शनकारी युवाओं और छात्रों के साथ खड़े होने का संदेश दिया। हुमा ने दिल्ली में हुई गिरफ्तारियों की खबरों को साझा करते हुए लिखा कि लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

हुमा ने कहा कि अपनी बात रखने के लिए जुटने से पहले ही लोगों को घरों और एयरपोर्ट से उठा लेना किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब वे जनता के संदेहों और सवालों का पारदर्शिता से सामना करें, न कि पुलिसिया बल का इस्तेमाल करके आवाजों को खामोश करवाएं। हुमा का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई अधिकार समूहों ने उनके रुख का स्वागत किया है।

सियासी बहस में तब्दील होता आंदोलन

गौरतलब है कि एसआईआर मामले को लेकर दिल्ली में 10 अक्टूबर को सीजेपी ने बड़े प्रदर्शन की घोषणा की थी, लेकिन पुलिस ने शीर्ष नेताओं को पहले ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसे सरकार की तानाशाही करार दिया था, जबकि भाजपा ने इसे देश की छवि खराब करने की साजिश बताया था। अब सिनेमा जगत से जुड़े कलाकारों के आगे आने से यह साफ हो गया है कि चुनाव आयोग और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़ा यह मुद्दा अब केवल राजनीतिक रैलियों तक सीमित न रहकर एक व्यापक सार्वजनिक विमर्श का रूप ले चुका है।