दुकान पर मिलने वाले सस्ते हेयर डाई से हो सकता है गंभीर नुकसान, छिपा हुआ यह सच उड़ा देगा होश
उम्र से पहले सफेद होते बालों को छिपाने या ट्रेंडी दिखने के लिए बाजार में मिलने वाले हेयर डाई और केमिकल हेयर कलर का इस्तेमाल आज आम हो चुका है। किराने की दुकानों से लेकर बड़े सुपरमार्केट्स तक, कई तरह के पाउच और डिब्बाबंद डाई बेहद आकर्षक दामों और 'प्राकृतिक' या 'हर्बल' के भ्रामक दावों के साथ आसानी से बिक रहे हैं। हालांकि, बालों को चंद मिनटों में जेट ब्लैक या चमकदार शेड देने वाले इन उत्पादों के पीछे छुपा रासायनिक सच बेहद चौंकाने वाला है। डर्मेटोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो नियमित रूप से सिंथेटिक हेयर डाई का उपयोग केवल बालों को ही बेजान और रूखा नहीं बनाता, बल्कि स्कैल्प के जरिए शरीर में प्रवेश कर कई गंभीर आंतरिक बीमारियों का कारण भी बन सकता है।
पीपीडी और अमोनिया का घातक कॉम्बिनेशन: स्कैल्प के लिए धीमा जहर
बाजार में मिलने वाले अधिकांश स्थायी (Permanent) हेयर डाई में पैरा-फेनिलेनेडायमाइन (Paraphenylenediamine यानी PPD) नाम का सिंथेटिक केमिकल मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। पीपीडी का मुख्य काम बालों के क्यूटिकल्स में गहराई तक समाकर रंग को लंबे समय तक टिकाए रखना होता है। लेकिन यह केमिकल मेडिकल जगत में एक बेहद शक्तिशाली एलर्जिन माना गया है। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उनमें पीपीडी के संपर्क में आते ही स्कैल्प पर भीषण जलन, खुजली, छाले, चेहरे और आंखों के आसपास गंभीर सूजन (Contact Dermatitis) की समस्या पैदा हो जाती है। कई मामलों में यह एलर्जी इतनी गंभीर हो जाती है कि सांस लेने में तकलीफ तक होने लगती है।
इसके अलावा, डाई में मौजूद अमोनिया (Ammonia) बालों की बाहरी सुरक्षात्मक परत यानी क्यूटिकल को जबरन खोल देता है ताकि रंग अंदर तक जा सके। क्यूटिकल के क्षतिग्रस्त होने से बाल प्राकृतिक नमी खो देते हैं, जिससे वे बीच से टूटने लगते हैं, पतले हो जाते हैं और समय से पहले तेजी से झड़ने लगते हैं। अमोनिया की तीखी और तेज गंध आंखों में जलन, पानी आने और फेफड़ों में संक्रमण का जोखिम भी बढ़ाती है।
टॉक्सिक केमिकल्स का शरीर में अवशोषण: अंग और हार्मोन्स पर पड़ता है बुरा असर
दुकान पर मिलने वाले सस्ते और सामान्य हेयर डाई में केवल पीपीडी या अमोनिया ही नहीं, बल्कि रेसोरसीनॉल (Resorcinol), हाइड्रोजन पेरोक्साइड, लेड एसीटेट और कई प्रकार के भारी धातु (Heavy Metals) मौजूद होते हैं। रेसोरसीनॉल एक ऐसा केमिकल है जो शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) यानी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे थायराइड ग्रंथि के कामकाज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
हमारी स्कैल्प की त्वचा में अनगिनत रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) और रोमछिद्र होते हैं। जब बार-बार इन रसायनों का लेप सिर पर लगाया जाता है, तो इनमें से सूक्ष्म अंश त्वचा द्वारा अवशोषित होकर सीधे ब्लडस्ट्रीम में पहुंच जाते हैं। कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं और कैंसर शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि लंबे समय तक अत्यधिक रासायनिक हेयर डाई और डार्क शेड्स के उपयोग का संबंध मूत्राशय के कैंसर और गैर-हॉजकिन लिंफोमा जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे से हो सकता है। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को तो ऐसे केमिकल आधारित उत्पादों से पूरी तरह दूर रहने की सख्त सलाह दी जाती है।
सुरक्षित विकल्प अपनाएं: पैच टेस्ट और प्राकृतिक तरीकों से रखें बालों का ख्याल
अगर आपको सफेद बालों को छिपाने के लिए रंग का इस्तेमाल करना ही है, तो रासायनिक डाई के बजाय सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। घर पर तैयार की गई शुद्ध मेहंदी (Henna), इंडिगो पाउडर (नील पत्ती का पाउडर), आंवला, भृंगराज और शिकाकाई का प्राकृतिक मिश्रण बालों को बिना किसी साइड इफेक्ट के सुंदर प्राकृतिक काला या भूरा रंग प्रदान करता है। ये जड़ी-बूटियां बालों को नुकसान पहुंचाने के बजाय जड़ों को पोषण देती हैं और डैंड्रफ से भी बचाती हैं।
यदि आप बाजार से कोई हेयर कलर खरीद भी रहे हैं, तो पैकेट पर सामग्री (Ingredients) की सूची को ध्यान से पढ़ें और '100% PPD Free' तथा 'Ammonia Free' प्रमाणित उत्पादों का ही चयन करें। किसी भी नए उत्पाद को सीधे सिर पर लगाने से पहले कान के पीछे या कोहनी पर 48 घंटे पहले 'पैच टेस्ट' (Patch Test) अवश्य करें ताकि किसी भी संभावित जानलेवा एलर्जी या रिएक्शन से समय रहते बचा जा सके।