बदलते मौसम में हल्के बुखार के साथ दिखें ये 4 लक्षण तो न करें अनदेखी, हो सकता है डेंगू
मौसम में बदलाव आते ही तापमान के उतार-चढ़ाव और बारिश के बाद जगह-जगह रुके पानी के चलते मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप अचानक बढ़ जाता है। विशेष रूप से बरसात के बाद और गुलाबी ठंड की शुरुआत के बीच का समय एडीज इजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। दिन के समय काटने वाला यह मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो डेंगू वायरस सीधे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाता है। शुरुआत में लोग इसे मौसम में बदलाव के कारण होने वाला सामान्य मौसमी फ्लू, वायरल फीवर या साधारण जुकाम-खांसी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और मेडिकल स्टोर से बिना सलाह पैरासिटामोल या दर्द निवारक दवाएं लेकर काम चलाते रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू के मामले में यही शुरुआती लापरवाही सबसे घातक साबित होती है, क्योंकि सही समय पर पहचान न होने से प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से नीचे गिर जाता है और मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
ब्रेकबोन फीवर के क्लासिक लक्षण: हड्डियों में असहनीय दर्द और आंखों के पीछे भारीपन
डेंगू के लक्षणों की शुरुआत आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 7 दिनों के भीतर होती है। इसका सबसे पहला और प्रमुख संकेत है अचानक 102 से 104 डिग्री फारेनहाइट तक तेज बुखार चढ़ना। इस बुखार के साथ होने वाला शारीरिक दर्द इतना असहनीय और तीव्र होता है कि डेंगू को आम बोलचाल में 'हड्डी तोड़ बुखार' (Breakbone Fever) भी कहा जाता है। मरीज की मांसपेशियों, कमर के निचले हिस्से और घुटनों व कोहनी के जोड़ों में तीव्र खिंचाव और अकड़न महसूस होती है।
इसके साथ ही डेंगू का एक बेहद खास और विशिष्ट लक्षण है 'रेट्रो-ऑर्बिटल पेन' यानी आंखों की पुतलियों के ठीक पीछे तेज दर्द होना। जब मरीज आंखों को इधर-उधर घुमाता है या तेज रोशनी की तरफ देखता है, तो सिर और आंखों में भारी खिंचाव महसूस होता है। तेज सिरदर्द, लगातार मिचली आना, उल्टी का अहसास होना और भूख का पूरी तरह खत्म हो जाना इसके प्राथमिक लक्षण हैं। बुखार आने के 2 से 3 दिन बाद मरीज की त्वचा पर बारीक लाल रंग के चकत्ते या खसरे जैसे दाने (Skin Rashes) भी उभर सकते हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत होते हैं कि शरीर की केशिकाओं (Capillaries) पर वायरस का असर शुरू हो चुका है।
डेंजर साइन पहचानें: जब प्लेटलेट्स गिरने लगें और आंतरिक रिसाव का बने खतरा
डेंगू बुखार में सबसे नाजुक दौर वह होता है जब 3 से 4 दिन बाद बुखार उतरने लगता है। अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि बुखार कम होने का मतलब है बीमारी ठीक हो रही है, जबकि मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार बुखार उतरने के बाद के 48 घंटे ही सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसे 'क्रिटिकल फेज' (Critical Phase) कहा जाता है, जिसमें डेंगू शॉक सिंड्रोम या डेंगू हेमोरेजिक फीवर का खतरा सबसे अधिक रहता है।
यदि बुखार उतरने के दौरान या उसके तुरंत बाद मरीज को लगातार तेज पेट दर्द की शिकायत हो, बार-बार उल्टियां आ रही हों और पानी भी न पच रहा हो, तो यह खतरे की घंटी है। इसके अलावा, मसूड़ों या नाक से खून आना, उल्टी या शौच में काले रंग का खून दिखना, अत्यधिक थकान, सांस लेने में तेजी और रक्तचाप (BP) का अचानक बहुत कम हो जाना ऐसे लक्षण हैं जो दर्शाते हैं कि प्लेटलेट्स खतरनाक स्तर तक गिर चुकी हैं और प्लाज्मा लीकेज शुरू हो चुका है। ऐसी स्थिति में बिना एक मिनट गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड या आईसीयू में भर्ती कराना अनिवार्य होता है।
क्या करें और किन गलतियों से बचें: हाइड्रेशन और सही जांच ही सबसे बड़ा बचाव
अगर बदलते मौसम में बुखार के ऐसे लक्षण दिखते हैं, तो सबसे पहले डॉक्टर की सलाह पर 'डेंगू एनएस1 एंटीजन' (NS1 Antigen) या 'सीबीसी' (Complete Blood Count) टेस्ट करवाएं ताकि प्लेटलेट्स और हेमटोक्रिट के स्तर की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। घर पर इलाज के नाम पर कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या ब्रूफेन जैसी दर्द निवारक (NSAIDs) दवाएं बिल्कुल न लें। ये दवाएं खून को पतला करती हैं, जिससे आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। सामान्य बुखार को नियंत्रित करने के लिए केवल डॉक्टर द्वारा सुझाई गई खुराक में सादा पैरासिटामोल ही सुरक्षित माना जाता है।
मरीज के शरीर में पानी की कमी (Dehydration) न होने दें। डेंगू में प्लाज्मा लीकेज को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट रखना है। सादे पानी के साथ-साथ नारियल पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, नींबू पानी, पतली छाछ और ताजे फलों का जूस लगातार थोड़ी-थोड़ी देर में देते रहें। घर के आसपास गमलों, पुराने टायरों, कूलर या छतों पर जमा बारिश के पानी को तुरंत खाली करें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और दिन के समय भी मच्छर भगाने वाले लोशन का प्रयोग करें ताकि इस खतरनाक संक्रमण की चपेट में आने से बचा जा सके।