अस्थमा के मरीजों के लिए फ्लू बनना पड़ सकता है जानलेवा खतरा

अस्थमा के मरीजों के लिए फ्लू बनना पड़ सकता है जानलेवा खतरा

बदलते मौसम, लगातार बढ़ते प्रदूषण और सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हमारे देश में श्वसन तंत्र (Respiratory System) से जुड़ी समस्याएं तेजी से विकराल रूप धारण करने लगती हैं। खासकर अस्थमा (Asthma) या पुरानी ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीजों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सामान्य फ्लू या वायरल इंफेक्शन एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए भले ही कुछ दिनों की मामूली परेशानी हो, लेकिन जब यही फ्लू किसी अस्थमा के मरीज को अपनी चपेट में लेता है, तो यह उनके लिए एक गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य आपातकाल में बदल सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों और पल्मोनोलॉजिस्ट्स का कहना है कि फ्लू वायरस अस्थमा के मरीजों की श्वास नली (Airways) में गंभीर सूजन और संकुचन पैदा कर देता है, जिससे सांस लेना दूभर हो जाता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि अस्थमा रोगी और उनके परिवारजन फ्लू के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

#1 अस्थमा के मरीजों के लिए फ्लू इतना खतरनाक क्यों साबित होता है?

जब कोई अस्थमा का मरीज इन्फ्लूएंजा (फ्लू) वायरस की चपेट में आता है, तो वायरस सीधे तौर पर उसके फेफड़ों और श्वसन मार्ग की आंतरिक झिल्ली को संक्रमित करता है। इससे फेफड़ों में बलगम (Mucus) का अत्यधिक उत्पादन होने लगता है और श्वास नली सिकुड़ने लगती है। अस्थमा के मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता और फेफड़े पहले से ही संवेदनशील होते हैं, जिसके कारण वायरल संक्रमण उनके अस्थमा के लक्षणों को बहुत तेजी से ट्रिगर कर देता है। कई मामलों में देखा गया है कि सामान्य सर्दी-जुकाम या हल्का बुखार समझकर जब मरीज इस पर ध्यान नहीं देते, तो यह संक्रमण निचले श्वसन तंत्र तक फैल जाता है और निमोनिया या गंभीर अस्थमा अटैक (Asthma Attack) का रूप ले लेता है, जिसके कारण कई बार अस्पताल में आईसीयू (ICU) तक की नौबत आ जाती है।

#1 इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, तुरंत हो जाएं सतर्क

अस्थमा रोगियों को सामान्य सर्दी-जुकाम और फ्लू के शुरुआती संकेतों को बहुत बारीकी से समझना चाहिए। यदि आपको या आपके किसी परिजन को अस्थमा की शिकायत है और इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सबसे पहले छाती में भारीपन या जकड़न महसूस होना, जो सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो। दूसरा, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (Wheezing) आना और सांस का बहुत तेजी से फूलना। तीसरा, खांसी का लगातार बना रहना और रात के समय खांसी के कारण नींद टूटना। चौथा, इनहेलर (Inhaler) या अपनी नियमित दवाएं लेने के बाद भी अस्थमा के लक्षणों में कोई राहत न मिलना। ये सारे संकेत इस बात की गवाही देते हैं कि फ्लू का संक्रमण आपके फेफड़ों को जकड़ रहा है और स्थिति गंभीर हो सकती है।

#1 सर्दियों और बदलते मौसम में अस्थमा मरीज कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल?

इस खतरनाक फ्लू और अस्थमा के दोहरे वार से बचने के लिए एहतियात बरतना सबसे बड़ा इलाज है। विशेषज्ञों की सलाह है कि हर साल मौसम बदलने से पहले डॉक्टर की सलाह पर फ्लू का टीका (Flu Shot) जरूर लगवाएं, जो इस तरह के वायरल संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है। इसके अलावा, जब भी घर से बाहर निकलें, मास्क का उपयोग जरूर करें ताकि ठंडी हवा और प्रदूषण सीधे आपके फेफड़ों तक न पहुंच सकें। अपने इनहेलर को हमेशा अपने साथ रखें और डॉक्टर द्वारा बताई गई प्रिवेंटिव मेडिसिन का समय पर सेवन करें। शरीर को अंदर से हाइड्रेटेड रखने के लिए गुनगुना पानी पिएं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली पौष्टिक आहार शैली को अपनाएं।

#1 समय पर चिकित्सीय सलाह और जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव

अस्थमा जैसी पुरानी बीमारी के साथ जीवन जीते समय थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। यदि फ्लू के लक्षण दिखने पर तुरंत पल्मोनोलॉजिस्ट या चेस्ट स्पेशलिस्ट की देखरेख में इलाज शुरू कर दिया जाए, तो किसी भी बड़े खतरे को आसानी से टाला जा सकता है। परिवार के सदस्यों को भी चाहिए कि वे अस्थमा के मरीज की सेहत में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर तुरंत ऑक्सीजन स्तर (SpO2) की जांच करवाएं। सही समय पर सही कदम उठाकर आप इस ठंड के मौसम में अपने फेफड़ों को सुरक्षित रख सकते हैं और एक स्वस्थ व खुशहाल जीवन जी सकते हैं।