असदुद्दीन ओवैसी का CEC ज्ञानेश कुमार और तमिलनाडु की राजनीति पर बड़ा हमला
देश की राजनीति में इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर घमासान मचा हुआ है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के फैसलों पर तीखा प्रहार किया है। ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही, दक्षिण भारत की राजनीति विशेषकर तमिलनाडु के सियासी घटनाक्रम और अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) तथा राज्य के मुख्यमंत्री को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, जहां विपक्ष लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
#1 चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर क्यों भड़के असदुद्दीन ओवैसी?
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान और अन्य प्रशासनिक फैसलों को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। ओवैसी का आरोप है कि चुनाव आयोग के कई फैसले लोकतांत्रिक मर्यादाओं और पारदर्शिता के दावों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि चुनाव आयोग की कार्यशैली से निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। देश के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और नामों के हटाए जाने को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ओवैसी ने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को पूरी तरह से निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, ताकि आम जनता और राजनीतिक दलों का भरोसा तंत्र पर बना रहे।
#1 तमिलनाडु की राजनीति में उबाल: थलपति विजय की पार्टी और विरोध प्रदर्शन के मायने
दूसरी तरफ, तमिलनाडु के राजनीतिक मैदान में भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और टीवीके (TVK) प्रमुख थलपति विजय की पार्टी ने भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मतदाता सूची संशोधन और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को लेकर थलपति विजय की पार्टी और विपक्षी दलों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है। तमिलनाडु में तेजी से बदल रहे राजनीतिक समीकरणों के बीच क्षेत्रीय दलों और नए सियासी मोर्चों का यह आक्रामक तेवर आने वाले चुनावों के लिहाज से बहुत अहम माना जा रहा है।
#1 क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय चेहरों के बीच बढ़ती सियासी रस्साकशी
राष्ट्रीय स्तर पर असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाना और क्षेत्रीय स्तर पर थलपति विजय जैसे युवा नेतृत्व का मुखर होना यह संकेत देता है कि देश की चुनावी और राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव आ रहे हैं। जहां एक तरफ विपक्षी दल और स्वतंत्र नेता सरकार तथा प्रशासनिक संस्थाओं को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संवैधानिक संस्थाएं भी अपनी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार स्पष्टीकरण दे रही हैं। बहरहाल, चुनाव आयोग के खिलाफ उठ रही इन आवाजों ने राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ दक्षिण भारत के सियासी गलियारों का पारा भी सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।