सुप्रीम कोर्ट की नई जज जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने कही दिल की बात
देश की सबसे बड़ी अदालत यानी उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) में न्याय के गलियारों से एक बेहद प्रेरणादायक और भावनात्मक क्षण सामने आया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वाली देश की वरिष्ठ और प्रख्यात न्यायविद् जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने अपने एक उद्बोधन में अपने पुराने दिनों और कार्यक्षेत्र को याद करते हुए एक ऐसा बयान दिया जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। एक भव्य स्वागत समारोह के दौरान अपने संबोधन में जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने भावुक होते हुए कहा कि 'इलाहाबाद हाईकोर्ट मेरा हाईस्कूल है', जहां उन्होंने कानून की बारीकियों के शुरुआती ककहरे से लेकर एक मजबूत जज बनने तक का लंबा और कड़ा संघर्षपूर्ण सफर तय किया है। उनके इस मार्मिक और अनूठे बयान के तुरंत बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने उनकी अद्भुत कार्यशैली, निष्पक्षता और न्याय के प्रति समर्पण भाव की खुले मंच से जमकर सराहना की। देश की न्यायपालिका में इस प्रकार के संवाद न केवल न्यायिक संस्कृति की गरिमा को बढ़ाते हैं, बल्कि युवा वकीलों और कानून के छात्रों के लिए भी प्रेरणा का एक बहुत बड़ा स्रोत बनते हैं।
#1 इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिनों को याद कर भावुक हुईं जस्टिस सुनीता अग्रवाल
न्यायिक सेवा में अपने दशकों लंबे सफर के दौरान उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने सर्वोच्च न्यायालय में अपने स्वागत समारोह के दौरान अपने शुरुआती कानूनी करियर के पन्नों को पलटा। उन्होंने याद किया कि कैसे उत्तर प्रदेश की इस सबसे बड़ी अदालत की चौखट पर उन्होंने वकालत की शुरुआत की थी और यहीं से उन्हें न्यायपालिका की मूल ताकत और आम जनता के संघर्षों को नजदीक से देखने का अवसर मिला। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय उनके लिए किसी स्कूल या संस्थान से कम नहीं है, जहां उन्होंने कानून के सिद्धांतों के साथ-साथ जीवन के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सबक सीखे। उनके इस सरल और आत्मीय स्वभाव ने वहां मौजूद तमाम वरिष्ठ वकीलों, जजों और गणमान्य अतिथियों का मन मोह लिया।
#1 CJI सूर्यकांत ने की तारीफ, बताया न्यायिक उत्कृष्टता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जस्टिस सुनीता अग्रवाल के व्यक्तित्व और उनके अब तक के शानदार न्यायिक फैसलों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल ने अपने फैसलों से हमेशा यह साबित किया है कि कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है और न्याय दिलाना ही सर्वोच्च धर्म है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय जैसी विशाल और मुकदमों के भारी दबाव वाली अदालत में काम करते हुए जिस प्रकार उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और कानूनी सटीकता का परिचय दिया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। सर्वोच्च न्यायालय में उनके आने से देश की शीर्ष अदालत को लैंगिक विविधता, वैचारिक स्पष्टता और एक मजबूत महिला न्यायविद् का और अधिक संबल प्राप्त हुआ है, जिससे आम जनता का न्याय प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा।
#1 न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मील का पत्थर बनता करियर
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पिछले कुछ वर्षों के दौरान महिलाओं की उच्च पदों पर भागीदारी लगातार बढ़ी है, और जस्टिस सुनीता अग्रवाल का सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर माना जा रहा है। उन्होंने जिस दृढ़ता और ईमानदारी के साथ विभिन्न पेचीदा मामलों की सुनवाई की है, उसने उन्हें देश के सबसे सम्मानित जजों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐसे ऐतिहासिक और लैंडमार्क जजमेंट दिए जिन्होंने मानवाधिकार, संवैधानिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक पारदर्शिता को नई दिशा दी। अब देश की सबसे बड़ी अदालत में उनके बैठने से कानूनी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि कई महत्वपूर्ण और लंबित मामलों की सुनवाई में और अधिक तेजी आएगी।
#1 विदाई और स्वागत के इस पल ने दी देश की न्याय व्यवस्था को नई ऊर्जा
किसी भी न्यायाधीश का एक अदालत से दूसरी अदालत या सर्वोच्च न्यायालय तक का सफर केवल एक प्रशासनिक स्थानांतरण या प्रमोशन नहीं होता, बल्कि यह उस न्यायप्रिय इंसान की पूरी जीवन साधना का परिणाम होता है। जस्टिस सुनीता अग्रवाल के इस संबोधन और सीजेआई द्वारा की गई उनकी सराहना ने देश भर के वकीलों और कानून प्रेमियों के बीच एक सकारात्मक संदेश दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि कड़ी मेहनत, निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा के साथ किया गया कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाता है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट की यह नई बेंच देश के नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।