CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का 'जन महाभियोग' अचानक टला: खराब मौसम और बारिश बनी बड़ी वजह

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का 'जन महाभियोग' अचानक टला: खराब मौसम और बारिश बनी बड़ी वजह

निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध शुक्रवार को प्रस्तावित 'जन महाभियोग' (सांकेतिक/मॉक महाभियोग) कार्यक्रम को अचानक स्थगित कर दिया गया है। शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित होने वाली इस जन-संसद की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं, लेकिन ऐन वक्त पर विपक्षी नेताओं ने इस प्रतीकात्मक सुनवाई को टालने का निर्णय लिया।

क्या बताई गई कार्यक्रम टालने की असली वजह?

विपक्षी खेमे और कांग्रेस सूत्रों की ओर से इस कार्यक्रम को स्थगित करने के पीछे मुख्य रूप से दो प्रमुख वजहें बताई गई हैं:

  1. खराब मौसम और बारिश का खलल: शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में चक्रवाती तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के असर से अचानक मौसम खराब हो गया और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। चूंकि कार्यक्रम खरगे के आवास पर खुले और सेमी-ओपन परिसर में होना था, बारिश के चलते तकनीकी व्यवस्थाएं और प्रसारण उपकरण प्रभावित होने लगे।

  2. वरिष्ठ व बुजुर्ग सांसदों की सहूलियत: इस जन महाभियोग में विपक्षी दलों के कई पूर्व केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ नेता और उम्रदराज सांसद शामिल होने वाले थे। मौसम के बिगड़े मिजाज और बारिश की वजह से बुजुर्ग नेताओं व प्रतिनिधियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए राहुल गांधी और गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने सर्वसम्मति से इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया।

अनुमति का विवाद: रामलीला मैदान से खरगे के आवास तक कैसे पहुंचा था आयोजन?

विपक्ष का यह सांकेतिक महाभियोग पहले एक बड़े सार्वजनिक मैदान में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन विपक्षी नेताओं का आरोप है कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर इस कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने घोषणा की थी कि लोकतांत्रिक विरोध के तहत इस जन-संसद को मल्लिकार्जुन खरगे के आधिकारिक आवास (10, राजाजी मार्ग) पर आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए मल्टी-कैमरा लाइव स्ट्रीमिंग सेटअप लगाया गया था ताकि जनता तक इस 'मॉक पार्लियामेंट' की कार्यवाही सीधे पहुंचाई जा सके।

क्या थी 'जन महाभियोग' की पूरी रूपरेखा?

इस प्रतीकात्मक जन-अदालत की पूरी पटकथा संसद की तर्ज पर तैयार की गई थी:

  • अध्यक्षता: लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को इस पूरी जन-सुनवाई की अध्यक्षता सौंपी गई थी।

  • प्रस्ताव पेश करना: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र (चार्जशीट) और महाभियोग प्रस्ताव पेश करने वाले थे।

  • विपक्षी दलों की भागीदारी: 'इंडिया' गठबंधन के 19 से अधिक घटक दलों के प्रतिनिधियों, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के सदस्यों को बारी-बारी से मतदाता सूची में नाम काटे जाने और कथित 'वोट चोरी' पर अपनी दलीलें रखनी थीं।

  • समापन वक्तव्य: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पूरे सत्र का समापन भाषण देना था, जिसके बाद सांकेतिक रूप से प्रस्ताव पारित किया जाना तय था।

1 नवंबर के 'दिल्ली चलो मार्च' पर टिकी निगाहें

विपक्षी नेताओं ने साफ किया है कि भले ही शुक्रवार का सांकेतिक जन महाभियोग मौसम के चलते टाल दिया गया हो, लेकिन निर्वाचन आयोग के खिलाफ उनका आंदोलन धीमा नहीं पड़ेगा। विपक्ष अब 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होने वाली विशाल रैली और 'दिल्ली चलो' जन-आंदोलन की तैयारियों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है। कांग्रेस और सहयोगी दलों का दावा है कि इस महा-जुटान में देश भर से लाखों नागरिक, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता के पक्ष में आवाज बुलंद करेंगे।