पासपोर्ट और पहचान पत्र नागरिकता का सबूत नहीं! विदेश मंत्रालय के बयान से छिड़ी बहस, जानिए क्या कहता है भारतीय कानून
"क्या आपके पास मौजूद भारतीय पासपोर्ट इस बात का पक्का सबूत है कि आप भारत के नागरिक हैं?" इस सवाल का कानूनी जवाब आपको चौंका सकता है। हाल ही में पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट मूल रूप से एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक यह बहस छिड़ गई है कि अगर पासपोर्ट, वोटर आईडी और अन्य कार्ड नागरिकता का असली सबूत नहीं हैं, तो फिर कानून की नजर में भारत का असली नागरिक कौन है और इसका पक्का प्रमाण क्या है?
पासपोर्ट एक्ट 1967 की धारा 20: कानून में क्या लिखा है?
पासपोर्ट को लेकर आम जनता में यह धारणा है कि यह नागरिकता का सबसे बड़ा पैमाना है, लेकिन देश का कानून कुछ और कहता है। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत केंद्र सरकार को यह विशेष अधिकार प्राप्त है कि वह जनहित या विशेष परिस्थितियों में किसी ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है जो भारत का नागरिक नहीं है।
चूंकि कानून गैर-नागरिकों को भी विशेष शर्तों पर पासपोर्ट देने की इजाजत देता है, इसलिए तकनीकी और कानूनी रूप से पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और अकाट्य प्रमाण नहीं माना जा सकता।
बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
यह कानूनी बहस नई नहीं है। साल 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए साफ तौर पर कहा था कि केवल पासपोर्ट धारक होने का यह अर्थ कतई नहीं है कि वह व्यक्ति अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक ही है। अदालत ने पासपोर्ट को नागरिकता के अंतिम और पूर्ण सबूत के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
नागरिकता अधिनियम 1955: इन 5 तरीकों से मिलती है भारतीय नागरिकता
भारतीय नागरिकता का एकमात्र कानूनी आधार नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) है। इस कानून के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता पांच तरीकों से मिल सकती है:
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1. जन्म से (By Birth):
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26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मे सभी लोग जन्म से भारतीय हैं।
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1987 से 2003 के बीच जन्मे उन लोगों को नागरिकता मिली जिनके माता या पिता में से कोई एक भारतीय था।
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2003 के बाद से नियम है कि माता-पिता दोनों भारतीय हों या एक भारतीय हो और दूसरा अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) न हो।
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2. वंश के आधार पर (By Descent): भारत से बाहर पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति वंश के आधार पर नागरिकता का दावा कर सकता है, बशर्ते उसके जन्म के एक वर्ष के भीतर उसका पंजीकरण भारतीय दूतावास (Indian Embassy) में कराया गया हो।
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3. पंजीकरण द्वारा (By Registration): भारतीय मूल के व्यक्ति या भारत के नागरिक से शादी करने वाले विदेशी लोग तय नियमों के तहत आवेदन करके नागरिकता पा सकते हैं।
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4. देशीयकरण द्वारा (By Naturalisation): यदि कोई विदेशी नागरिक (जो अवैध प्रवासी न हो) भारत में लगातार 12 वर्षों से रह रहा हो, तो सरकार उसे देशीयकरण का प्रमाण पत्र दे सकती है।
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5. क्षेत्र के विलय द्वारा (By Incorporation of Territory): यदि कोई नया भू-भाग (जैसे भविष्य में कोई विदेशी क्षेत्र) भारत का हिस्सा बनता है, तो वहां के निवासियों को सरकार के आदेश द्वारा भारत की नागरिकता मिल जाती है।
तो फिर नागरिकता का असली सबूत क्या है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, देश के नागरिकों को दी जाने वाली प्रक्रियाओं के बाद गृह मंत्रालय द्वारा जारी नागरिकता प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate) ही नागरिकता का एकमात्र औपचारिक और अचूक कानूनी प्रमाण होता है।
इसके विपरीत, हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले दस्तावेज जैसे पासपोर्ट, वोटर आईडी, पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्र केवल पहचान और निवास के दस्तावेज (Identity & Residence Proof) हैं। इन्हें प्रशासनिक और नागरिक सुविधाओं (जैसे मतदान, बैंकिंग या यात्रा) के लिए जारी किया जाता है, न कि किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता को प्रमाणित करने के लिए।