ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रदर्शन से कांग्रेस ने क्यों बनाई दूरी? AAP और लेफ्ट ने दिया साथ
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा जंतर-मंतर पर बुलाए गए बड़े प्रदर्शन को जहां आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वामपंथी दलों (Left) का खुला समर्थन मिला, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी। विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के दलों द्वारा इस आंदोलन में अलग-अलग रणनीति अपनाने से राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
CJP के प्रदर्शन से कांग्रेस ने क्यों बनाई दूरी?
कांग्रेस पार्टी ने संसद और अपने स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाए हैं, लेकिन शनिवार को जंतर-मंतर पर आयोजित इस विशिष्ट प्रदर्शन से दूरी बनाने के पीछे पार्टी की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक और रणनीतिक योजनाएं मानी जा रही हैं:
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समानांतर और स्वतंत्र आंदोलन की रणनीति: कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व किसी तीसरे दल या सामाजिक मंच के बैनर तले चलने वाले आंदोलन का केवल हिस्सा बनने के बजाय अपने आधिकारिक सांगठनिक ढांचे के तहत चुनाव आयोग को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। कांग्रेस पहले ही दिल्ली और अन्य राज्यों में अपने स्तर पर विरोध मार्च निकाल चुकी है।
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संवैधानिक और संस्थागत रास्ता: कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह केवल सड़कों पर टकराव के बजाय कानूनी और संवैधानिक रास्तों को प्राथमिकता दे रही है। संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर सीधे राष्ट्रपति से मुलाकात कर औपचारिक ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं।
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राहुल गांधी का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम: प्रदर्शन के दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के चेन्नई में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जिसके चलते वे दिल्ली के इस जमीनी प्रदर्शन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हुए।
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नेतृत्व और श्रेय का समीकरण: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी अन्य गैर-पारंपरिक दल के नेतृत्व वाले आंदोलन में शामिल होने से मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस की अपनी स्वतंत्र आवाज और नैरेटिव कमजोर पड़ने का अंदेशा रहता है।
आम आदमी पार्टी, लेफ्ट और टीएमसी ने क्यों दिया साथ?
कांग्रेस के विपरीत, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों ने इस प्रदर्शन में पूरी ताकत झोंक दी:
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सड़क पर उतरने की आक्रामक शैली: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने स्वयं अपने परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की और इसे "लोकतंत्र को बचाने का आंदोलन" करार दिया। आप लंबे समय से चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर मुखर रही है।
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छात्र और युवा संगठनों से जुड़ाव: लेफ्ट दलों (जैसे सीपीआई-एमएल, सीपीएम) और उनके छात्र विंग (SFI, AISA) पहले से ही छात्र आंदोलनों और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर CJP के साथ सड़कों पर तालमेल बिठाते रहे हैं।
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इस्तीफे की सीधी मांग: लेफ्ट और आप नेताओं का तर्क है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक बिना किसी हिचकिचाहट के हर मंच से दबाव बनाना आवश्यक है।
क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद केंद्रीय चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों की खबरें सामने आने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों के बाद गहराया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम काटे जाने और प्रक्रियात्मक विसंगतियों को लेकर आयोग पारदर्शी रवैया नहीं अपना रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आयोग के भीतर विभिन्न विचारों का होना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है और सभी निर्णय स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं और नियमों के तहत ही लिए जाते हैं।