सुनील गावस्कर ने मोर्न मोर्कल पर साधा निशाना: भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन पर उठाए सवाल
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच मोर्न मोर्कल की कार्यशैली और गेंदबाजी रणनीति पर खुलकर सवाल खड़े किए हैं। टेस्ट और अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान भारतीय तेज गेंदबाजों के दिशाहीन प्रदर्शन और विरोधी बल्लेबाजों को साझेदारी बनाने की खुली छूट मिलने पर गावस्कर का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सीधे तौर पर दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज और वर्तमान भारतीय बॉलिंग कोच मोर्न मोर्कल को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि केवल मैदान के बाहर रणनीति की बातें करना काफी नहीं है, बल्कि अब सीधे कोच से यह पूछा जाना चाहिए कि वे अपने गेंदबाजों से आखिर किस तरह की लाइन-लेंथ और नतीजों की उम्मीद कर रहे थे।
'गेंदबाजी कोच से पूछना चाहिए वे क्या रणनीति बना रहे थे'—गावस्कर
मैच के विश्लेषण के दौरान सुनील गावस्कर ने भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के रवैये पर गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब मैच का महत्वपूर्ण चरण चल रहा था और नई गेंद से दबाव बनाने की सख्त जरूरत थी, तब भारतीय गेंदबाज लगातार ऑफ स्टंप के बाहर बहुत ज्यादा शॉर्ट या जरूरत से ज्यादा फुल गेंदें फेंक रहे थे। गावस्कर ने कहा, "यह देखना बेहद निराशाजनक है कि योजना को मैदान पर लागू करने में इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है? गेंदबाजी कोच मोर्न मोर्कल से प्रेस कॉन्फ्रेंस और टीम रिव्यू में सीधे यह पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने गेंदबाजों को क्या निर्देश दिए थे और वे उनसे क्या उम्मीद लगाए बैठे थे? यदि गेंदबाज तय योजना के अनुसार गेंद नहीं डाल रहे हैं, तो सपोर्ट स्टाफ की जिम्मेदारी क्या रह जाती है?"
जसप्रीत बुमराह के अलावा अन्य तेज गेंदबाजों के संघर्ष पर चिंता
गावस्कर ने स्पष्ट किया कि भारतीय आक्रमण में जसप्रीत बुमराह लगातार असाधारण गेंदबाजी करते हुए अकेले दम पर दबाव बनाते हैं, लेकिन दूसरे छोर से मोहम्मद सिराज, आकाश दीप या अन्य तेज गेंदबाजों से जिस निरंतरता और सटीक लाइन-लेंथ की दरकार होती है, वह पूरी तरह गायब दिख रही है। गावस्कर का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में साझेदारी केवल बल्लेबाजी में ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी में भी सबसे अहम हथियार होती है। जब एक छोर से रन रोके जा रहे हों और दूसरे छोर से बाउंड्री गेंदें दी जा रही हों, तो विरोधी टीम का दबाव तुरंत खत्म हो जाता है। मोर्न मोर्कल के कार्यकाल में विदेशी पिचों और घरेलू मैदानों पर इस समन्वय की कमी साफ तौर पर उजागर हुई है।
दक्षिण अफ्रीकी तकनीक बनाम भारतीय परिस्थितियां और लेंथ की विफलता
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि मोर्न मोर्कल स्वयं उछाल हासिल करने वाले लंबे कद के गेंदबाज रहे हैं, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप या पारंपरिक टेस्ट परिस्थितियों में गेंद को आगे रखकर स्विंग कराने और स्टंप टू स्टंप गेंदबाजी करने की तकनीक अलग होती है। गावस्कर ने इसी पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि गेंदबाज जरूरत से ज्यादा शॉर्ट पिच गेंदों पर निर्भर हो रहे हैं, जिससे टेस्ट मैचों में विकेट चटकाने के बजाय रन तेजी से लिक हो रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि कोचिंग स्टाफ को खिलाड़ियों की ताकत के अनुरूप रणनीति बनानी चाहिए, न कि विदेशी पिचों की अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को भारतीय गेंदबाजों पर थोपना चाहिए।
गंभीर-मोर्कल की जुगलबंदी पर उठ रहे सवाल और आगे की चुनौतियां
गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद मोर्न मोर्कल को भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया था। लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ गंभीर का मोर्कल के साथ काम करने का लंबा अनुभव रहा है, जिसके चलते उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, महत्वपूर्ण टेस्ट मैचों में गेंदबाजों के उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के बाद अब इस कोचिंग जोड़ी की रणनीति की समीक्षा की मांग तेज हो गई है। आगामी व्यस्त टेस्ट कैलेंडर और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के कड़े चक्र को देखते हुए गावस्कर की यह खरी-खरी भारतीय टीम प्रबंधन और मोर्न मोर्कल के लिए एक कड़ा वेक-अप कॉल मानी जा रही है।