चारधाम यात्रा 2026: यमुनोत्री से बद्रीनाथ तक कब बंद होंगे कपाट? नोट कर लें सभी शुभ तिथियां और नियम

चारधाम यात्रा 2026: यमुनोत्री से बद्रीनाथ तक कब बंद होंगे कपाट? नोट कर लें सभी शुभ तिथियां और नियम

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से हिमालय की ऊंची चोटियों पर विराजमान बाबा केदार, भगवान बद्रीविशाल, मां गंगोत्री और मां यमुनोत्री के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सनातन परंपरा और ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, दीपावली के पावन पर्व के आसपास से ही चारों धामों के कपाट शीतकालीन अवधि के लिए विधिवत बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों के महीनों में अत्यधिक बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे जाने वाले तापमान के कारण हर वर्ष 6 महीनों के लिए धामों के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) और संबंधित तीर्थ पुरोहित सभाओं द्वारा पंचांगीय गणनाओं के आधार पर चारों पवित्र धामों के कपाट बंद होने की शुभ तिथियों की घोषणा कर दी गई है।

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम: अन्नकूट और भैयादूज पर विदा होंगी मां गंगा और मां यमुना

चारधाम यात्रा में सबसे पहले उत्तरकाशी जिले में स्थित मां गंगोत्री और मां यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की शास्त्रीय परंपरा है:

  1. गंगोत्री धाम के कपाट: गंगोत्री मंदिर के कपाट हर साल दीपावली के अगले दिन यानी गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के पावन पर्व पर बंद किए जाते हैं। मंदिर समिति द्वारा तय मुहूर्त में विधिवत मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद मां गंगा की डोली शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव (मुखीमठ) के लिए प्रस्थान करती है। आगामी 6 महीने तक श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और पूजन मुखबा के गंगा मंदिर में कर सकते हैं।

  2. यमुनोत्री धाम के कपाट: यमुना जी के पवित्र धाम के कपाट भैयादूज (यम द्वितीया) के शुभ दिन दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में बंद किए जाते हैं। कपाट बंद होने के उपरांत मां यमुना की विग्रह डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव पहुंचती है, जहां शीतकाल में पूरे विधि-विधान से मां यमुना की नियमित सेवा-पूजा संपन्न होती है।

केदारनाथ धाम: भैयादूज पर समाधि रूप में लीन होंगे बाबा केदार

रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होने की तिथि भी भैयादूज के पावन अवसर पर ही निर्धारित होती है।

कपाट बंद होने के दिन प्रातः काल से ही विशेष समाधि पूजा शुरू होती है। मुख्य पुजारी द्वारा स्वयंभू शिवलिंग को भस्म, समाधि लेप और स्थानीय फूलों से ढककर समाधि रूप दिया जाता है। इसके पश्चात मंदिर के मुख्य द्वार बंद कर सील लगा दी जाती है। बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली सेना की गढ़वाल राइफल्स के बैंड-बाजों और 'जय बाबा केदार' के जयकारों के बीच अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करती है। अगले 6 महीने तक भक्त ऊखीमठ में ही बाबा केदार के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

बद्रीनाथ धाम: विजयादशमी को तय हुई कपाट बंद होने की अंतिम तिथि

चारों धामों में भगवान बद्री विशाल के कपाट सबसे अंत में बंद होते हैं। चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख विजयादशमी (दशहरे) के दिन पंचांग गणना के आधार पर तय की जाती है।

रावल जी (मुख्य पुजारी) और धर्माधिकारी की उपस्थिति में पंचांग देखकर कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त निकाला जाता है, जो आमतौर पर नवंबर माह के मध्य में पड़ता है। कपाट बंद होने से पूर्व पांच दिनों तक विशेष 'पंच पूजा' का आयोजन किया जाता है, जिसमें गणेश जी, आदि केदारेश्वर, खड़क पुस्तक और महालक्ष्मी जी की आराधना की जाती है। अंतिम दिन माता लक्ष्मी को भगवान नारायण के गर्भगृह में स्थापित किया जाता है और इसके बाद भगवान बद्रीनाथ के कपाट आगामी शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद भगवान बद्रीविशाल की गद्दी उनके शीतकालीन गद्दीस्थल नरसिंह मंदिर, जोशीमठ में विराजमान होती है।

चारों धामों के शीतकालीन प्रवास स्थल और दर्शन व्यवस्था

कपाट बंद होने के बाद भी चारों धामों की पूजा-अर्चना रुकती नहीं है, बल्कि वह निचले हिमालयी क्षेत्रों में स्थित शीतकालीन गद्दीस्थलों में निरंतर जारी रहती है:

  • श्री केदारनाथ जी: ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग)

  • श्री बद्रीनाथ जी: श्री नरसिंह मंदिर, जोशीमठ (चमोली)

  • मां गंगोत्री जी: मुखबा गांव (उत्तरकाशी)

  • मां यमुनोत्री जी: खरसाली गांव (उत्तरकाशी)

सर्दियों के महीनों में देश भर के तीर्थयात्री इन शीतकालीन गद्दीस्थलों पर जाकर देव दर्शन का आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप 2026 के अंतिम दिनों में मुख्य धामों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो कपाट बंद होने की इन तारीखों और मौसम की एडवाइजरी को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा का कार्यक्रम तय करें।