दिवाली पर तोरण में आम के कितने पत्ते होने चाहिए? मुख्य द्वार पर बंधनवार लगाते समय भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
नई दिल्ली: सनातन हिंदू धर्म में सुख-समृद्धि, प्रकाश और धन-धान्य के महापर्व दिवाली पर घर के मुख्य प्रवेश द्वार को सजाने की अत्यंत प्राचीन और पवित्र परंपरा है। वास्तु शास्त्र और वैदिक ज्योतिष के अनुसार घर का मुख्य द्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यही वह प्रमुख केंद्र है जहां से सकारात्मक ऊर्जा, प्राणवायु और माता महालक्ष्मी का घर के भीतर शुभागमन होता है। दिवाली के पावन अवसर पर मुख्य द्वार पर आम और अशोक के ताजे पत्तों तथा गेंदे के फूलों से बना तोरण (बंधनवार) बांधना अनिवार्य और मंगलकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तोरण बांधने से घर में नकारात्मक और तामसिक शक्तियां प्रवेश नहीं कर पातीं और घर का वास्तु दोष स्वतः समाप्त हो जाता है। हालांकि अक्सर लोग बाजार से कोई भी प्लास्टिक का तोरण लाकर टांग देते हैं या फिर आम के पत्तों की गिनती और दिशा का ध्यान रखे बिना बंधनवार बना लेते हैं। शास्त्रों में तोरण के लिए आम के पत्तों की संख्या और इसे लगाने की विधि को लेकर बहुत स्पष्ट और कड़े नियम बताए गए हैं। यदि आप भी इस दिवाली अपने घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाने जा रहे हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि तोरण में कितने पत्ते होने चाहिए और इसे लगाते समय किन 5 बड़ी गलतियों से पूरी तरह बचना चाहिए।
तोरण में आम के कितने पत्ते होने चाहिए: जानिए शास्त्रों और वास्तु के अनुसार सबसे शुभ संख्या
वैदिक परंपरा और वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार तोरण या बंधनवार बनाते समय पत्तों की संख्या हमेशा विषम (Odd Numbers) होनी चाहिए। शास्त्रों में सम संख्या (Even Numbers) जैसे 4, 6, 8, 10 या 12 पत्तों का प्रयोग वर्जित माना गया है, क्योंकि विषम संख्याएं ऊर्जा के निरंतर प्रवाह, प्रगति और सकारात्मक विस्तार की प्रतीक होती हैं। घर के मुख्य द्वार के आकार के अनुसार तोरण में 7, 9, 11, 21 या 108 आम के पत्ते पिरोना सबसे उत्तम और मंगलकारी माना जाता है। सामान्य आवासीय घरों के लिए 11 या 21 पत्तों का तोरण सबसे आदर्श और सर्वश्रेष्ठ माना गया है। 11 की संख्या एकादश रुद्र, शुभता और पूर्णता का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि 21 की संख्या इक्कीस प्रकार के प्राकृतिक और आध्यात्मिक ऐश्वर्यों की प्रतीक है। यदि आपके मुख्य द्वार की चौड़ाई अधिक है, तो आप 21 या 27 पत्तों का तोरण तैयार कर सकते हैं। पत्तों को हमेशा लाल या पीले रंग के कच्चे सूत यानी कलावा (मौली) में ही पिरोना चाहिए। कलावा में पिरोते समय ध्यान रखें कि पत्तों की डंडी ऊपर की ओर रहे और पत्ते का नुकीला भाग नीचे की तरफ लटकता रहे, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नीचे की ओर घर के आंगन में फैले।
आम के पत्तों का ही तोरण क्यों: वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोण से है अतुलनीय
सनातन धर्म के हर मांगलिक कार्य में आम के पत्तों का उपयोग अनायास ही नहीं किया जाता, इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है। धार्मिक दृष्टिकोण से आम के पेड़ को अमृत और देव वृक्ष माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आम का वृक्ष भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसके पत्तों की मौजूदगी से देवी-देवता आकर्षित होकर उस स्थान पर वास करते हैं। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो आम के पत्ते वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और अशुद्धियों को सोखने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। आम के पत्ते टूटने के बाद भी कई दिनों तक वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते रहते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। दिवाली के समय जब पटाखों के धुएं और मौसमी बदलाव के कारण हवा में प्रदूषण और नमी बढ़ती है, तब मुख्य द्वार पर लगा ताजे आम के पत्तों का तोरण एक प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर की तरह काम करता है और घर में प्रवेश करने वाली वायु को शुद्ध करता है। इसके अलावा गेंदे के पीले और नारंगी फूल, जो तोरण के बीच में लगाए जाते हैं, अपनी भीनी खुशबू से कीट-पतंगों को दूर रखते हैं और वातावरण में प्रसन्नता का संचार करते हैं।
गलती 1: सम संख्या में पत्ते लगाना और विषम संख्या के नियम की अनदेखी करना
दिवाली पर तोरण बनाते समय लोग सबसे पहली और आम गलती यह करते हैं कि वे पत्तों की गिनती किए बिना जितने पत्ते हाथ में आए, उन्हें धागे में पिरोकर टांग देते हैं। वास्तु शास्त्र में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि सम संख्या (जैसे 8, 10, 12, 14) में पत्ते लगाना ऊर्जा के प्रवाह को अवरुद्ध करता है। सम संख्या स्थिरता और ठहराव लाती है, जबकि विषम संख्या गतिशीलता और धन की वृद्धि की सूचक होती है। यदि आप 10 पत्ते लगाते हैं, तो वह अपूर्ण माना जाता है, इसलिए हमेशा 1 पत्ता अतिरिक्त जोड़कर उसे 11 करें। इसी प्रकार 20 पत्तों के स्थान पर 21 पत्तों का चयन करें। पत्तों की सही संख्या का चयन करने से ही उस तोरण का वास्तु लाभ प्राप्त होता है और वह घर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
गलती 2: सूखे, कटे-फटे, पीले या कीड़े लगे पत्तों का प्रयोग करना
बंधनवार बनाते समय दूसरी सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग बाजार से या पेड़ से पत्ते लाते समय उनकी गुणवत्ता की जांच नहीं करते। तोरण में कभी भी ऐसे पत्तों का उपयोग नहीं करना चाहिए जो कहीं से कटे-फटे हों, जिन पर कीड़ों ने छेद कर दिए हों या जो पीले पड़ चुके हों। शास्त्रों में किसी भी पूजा या मांगलिक कार्य में खंडित सामग्री का प्रयोग पूरी तरह वर्जित माना गया है। कटे-फटे और बदरंग पत्ते दरिद्रता, मानसिक तनाव और कलह को आमंत्रित करते हैं। तोरण के लिए हमेशा गहरे हरे रंग के, चिकने, चमकदार और पूर्ण रूप से स्वस्थ पत्तों का ही चयन करें। पत्तों को तोरण में पिरोने से पहले उन्हें शुद्ध जल और थोड़े से गंगाजल से अच्छी तरह धोकर किसी साफ सूती कपड़े से सुखा लें। इसके बाद प्रत्येक पत्ते पर अनामिका उंगली से रोली, कुमकुम या चंदन से 'शुभ' या 'ॐ' का चिन्ह बनाना या कम से कम एक लाल टीका लगाना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
गलती 3: प्लास्टिक और सिंथेटिक तोरण को ताजे पत्तों का विकल्प मान लेना
आजकल आधुनिकता और सुविधा के नाम पर बाजार में प्लास्टिक, कांच, थर्माकोल और कृत्रिम मोतियों से बने रंग-बिरंगे रेडीमेड तोरणों की भरमार है। कई लोग समय बचाने के चक्कर में इन्हीं प्लास्टिक के तोरणों को मुख्य द्वार पर टांग देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार प्लास्टिक या सिंथेटिक वस्तुएं 'मृत तत्व' होती हैं, जिनमें कोई प्राण ऊर्जा या स्पंदन नहीं होता। प्लास्टिक का तोरण केवल दिखावे के लिए सुंदर लग सकता है, लेकिन यह न तो घर के वास्तु दोष को दूर कर सकता है और न ही सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। प्लास्टिक नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के बजाय उसे अपने पास जमा करती है। दिवाली जैसे महापर्व पर यदि संभव हो तो प्राकृतिक और ताजे आम अथवा अशोक के पत्तों और ताजे गेंदे के फूलों से बना हस्तनिर्मित तोरण ही लगाएं। यदि आप धातु का तोरण लगाना चाहते हैं, तो पीतल या तांबे के पत्तों वाला तोरण लगाया जा सकता है, लेकिन प्लास्टिक और सिंथेटिक रेशों से बने तोरण को मुख्य द्वार पर लगाने से पूरी तरह बचें।
गलती 4: तोरण की गलत ऊंचाई और सिर से टकराने की स्थिति पैदा करना
तोरण लगाते समय तीसरी बड़ी तकनीकी और वास्तु संबंधी गलती उसकी ऊंचाई के चयन में होती है। कई बार लोग तोरण को दरवाजे पर बहुत नीचे लटका देते हैं, जिसके कारण घर में आने-जाने वाले सदस्यों या अतिथियों का सिर बार-बार तोरण के पत्तों या फूलों से टकराता है। वास्तु नियमों के अनुसार तोरण इतना ऊंचा बंधा होना चाहिए कि घर में प्रवेश करते समय किसी का भी सिर उससे न छुए। जब कोई व्यक्ति तोरण से बार-बार टकराता है, तो इससे तोरण का अपमान माना जाता है और वह नकारात्मक ऊर्जा का कारण बनता है। तोरण को हमेशा चौखट के सबसे ऊपरी सिरे पर मजबूती से बांधना चाहिए ताकि वह तना हुआ रहे और बीच में से झूलकर नीचे न लटके। इसके अलावा तोरण को कभी भी लोहे की जंग लगी पुरानी कीलों पर न टांगें; लकड़ी की खूंटियों या पीतल के हुक पर तोरण बांधना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।
गलती 5: सूखे हुए तोरण को महीनों तक मुख्य द्वार पर टंगे रहने देना
दिवाली बीत जाने के बाद सबसे बड़ी और गंभीर भूल यह देखी जाती है कि लोग लगाए गए तोरण को हफ्तों और महीनों तक दरवाजे पर ही सूखने के लिए छोड़ देते हैं। पत्ते पूरी तरह भूरे, सूखे और मुरझा जाते हैं, फिर भी वे दरवाजे पर लटके रहते हैं। वास्तु शास्त्र में सूखे और मृत पत्ते घर की चौखट पर रखना घोर दरिद्रता और राहु के दुष्प्रभाव का कारक माना गया है। जब आम के पत्ते सूखकर मुरझा जाएं, तो वे सकारात्मकता खो देते हैं और नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करने लगते हैं। शास्त्रों के अनुसार दिवाली पर लगाया गया ताजे पत्तों का तोरण तब तक ही द्वार पर रहना चाहिए जब तक वह हरा और ताजा हो। जैसे ही पत्ते सूखने लगें, उन्हें पूरे आदर के साथ उतार लेना चाहिए। उतारे गए सूखे पत्तों को कभी भी कूड़ेदान में न फेंकें और न ही उन पर किसी का पैर पड़ने दें। इन्हें किसी पवित्र नदी, बहते जल में विसर्जित करें या फिर घर के किसी गमले या पेड़ की जड़ में मिट्टी में दबा दें, ताकि उनका सम्मान बना रहे।
दिवाली के दिन तोरण बांधने का सही समय और प्रामाणिक विधि
दिवाली के दिन तोरण बांधने का सबसे शुभ समय सुबह का माना जाता है। दिवाली की सुबह सूर्योदय के तुरंत बाद घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और मुख्य द्वार पर हल्दी व गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद सुबह 08:30 बजे से लेकर दोपहर 12:00 बजे के बीच शुभ या लाभ के चौघड़िया में मुख्य द्वार पर नया तोरण बांधें। तोरण बांधते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। कलावा में 11 या 21 आम के पत्ते और बीच-बीच में गेंदे के फूल पिरोएं। तोरण बांधने के बाद मुख्य द्वार के दोनों कोनों पर सिंदूर और घी के मिश्रण से 'स्वास्तिक' और 'शुभ-लाभ' का चिन्ह अवश्य बनाएं। इस विधि और नियमों का पालन करके लगाया गया तोरण पूरे परिवार को सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और मां लक्ष्मी की अखंड कृपा का आशीर्वाद प्रदान करता है।