MP Karwa Chauth 2026: चक्रवाती सिस्टम और बादलों के फेर में फंसा करवा चौथ का चांद, मध्य प्रदेश में पूरब से पश्चिम तक 40 मिनट का बड़ा फासला

MP Karwa Chauth 2026: चक्रवाती सिस्टम और बादलों के फेर में फंसा करवा चौथ का चांद, मध्य प्रदेश में पूरब से पश्चिम तक 40 मिनट का बड़ा फासला

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाए जाने वाले अखंड सौभाग्य के महापर्व करवा चौथ पर मध्य प्रदेश की लाखों सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और खुशहाली के लिए निर्जला उपवास रखकर चांद के दीदार का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। लेकिन इस बार मौसम का मिजाज व्रतियों के सब्र की कड़ी परीक्षा लेता नजर आ रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत के ऊपर सक्रिय चक्रवाती चक्रवात और मौसमी सिस्टम के चलते प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से से लेकर पश्चिमी मालवा-निमाड़ तक आसमान में बादलों का घना डेरा बना हुआ है। खगोल विज्ञान और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पंचांग में दिया गया चंद्रोदय का समय क्षितिज पर चंद्रमा के उदित होने का गणितीय समय होता है। जब क्षितिज के समीप घने बादल, नमी या कोहरा छाया रहता है, तो वास्तविक रूप से आंखों से चंद्रमा की किरणें देख पाने में निर्धारित समय से कम से कम 10 से 15 मिनट का अतिरिक्त विलंब हो जाता है। पूर्वी अंचलों में रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी और बादलों के जमावड़े ने महिलाओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि चांद की एक झलक पाने के लिए बादलों के हटने की प्रतीक्षा करनी होगी।

पूरब से पश्चिम के बीच 40 मिनट का विशाल अंतर: खगोलीय विज्ञान और देशांतरीय स्थिति का रहस्य

मध्य प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्रफल और देशांतरीय विस्तार भारत के अन्य राज्यों की तुलना में काफी बड़ा है। पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की दिशा में लगातार घूमती है, जिसके कारण सौरमंडल के खगोलीय पिंड जैसे सूर्य और चंद्रमा हमेशा सबसे पहले पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देते हैं और उसके बाद धीरे-धीरे पश्चिमी क्षेत्रों की ओर उनका उदय होता है। प्रसिद्ध खगोल विज्ञानी सारिका घारू के वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, मध्य प्रदेश के सबसे पूर्वी छोर पर बसे सिंगरौली जिले में चंद्रमा सबसे पहले अपनी चमक बिखेरेगा। सिंगरौली में चंद्रोदय का समय रात ठीक 8:01 बजे रहेगा। इसके विपरीत, जैसे-जैसे पृथ्वी की घूर्णन गति आगे बढ़ेगी, चंद्र दर्शन का क्रम पश्चिम की ओर खिसकता जाएगा। प्रदेश के सबसे पश्चिमी छोर पर स्थित आलीराजपुर जिले में चंद्रमा सबसे अंत में रात करीब 8:41 बजे क्षितिज पर नजर आएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि एक ही राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर पूर्वी और पश्चिमी जिलों के बीच करवा चौथ का चांद देखने में लगभग 40 मिनट का बड़ा समय अंतराल रहेगा। राजधानी भोपाल में चांद के दर्शन रात 8:26 बजे और औद्योगिक नगरी इंदौर में रात 8:34 बजे होने की संभावना है।

मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों में चांद निकलने का सटीक समय: विंध्य, महाकौशल, मध्य और मालवा का पूरा शेड्यूल

मौसम की अनिश्चितता के बीच व्रती महिलाओं की सुविधा के लिए खगोलीय गणनाओं के आधार पर प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों में चंद्रोदय का अनुमानित समय निर्धारित किया गया है, जो इस प्रकार है:सिंगरौली: रात 08:01 बजे सीधी: रात 08:04 बजे रीवा: रात 08:06 बजे सतना: रात 08:10 बजे शहडोल: रात 08:12 बजे अनूपपुर: रात 08:13 बजे पन्ना: रात 08:14 बजे उमरिया: रात 08:15 बजे जबलपुर: रात 08:16 बजे से 08:21 बजे के बीच कटनी: रात 08:18 बजे मंडला: रात 08:18 बजे सागर: रात 08:20 बजे दमोह: रात 08:21 बजे छतरपुर: रात 08:22 बजे टीकमगढ़: रात 08:23 बजे ग्वालियर: रात 08:23 बजे से 08:25 बजे के बीच भिंड व मुरैना: रात 08:24 बजेदतिया: रात 08:25 बजेविदिशा: रात 08:25 बजेरायसेन: रात 08:26 बजेभोपाल: रात 08:26 बजे से 08:31 बजे के बीच सीहोर: रात 08:27 बजे नर्मदापुरम (होशंगाबाद): रात 08:28 बजे बैतूल: रात 08:29 बजे गुना व शिवपुरी: रात 08:30 बजे राजगढ़: रात 08:31 बजे देवास: रात 08:31 बजेछिंदवाड़ा: रात 08:32 बजे हरदा: रात 08:33 बजे इंदौर: रात 08:34 बजे से 08:39 बजे के बीचखंडवा: रात 08:35 बजेखरगोन: रात 08:36 बजे उज्जैन: रात 08:37 बजे से 08:42 बजे के बीच शाजापुर: रात 08:38 बजे बड़वानी: रात 08:39 बजेरतलाम: रात 08:39 बजेधार: रात 08:39 बजे मंदसौर: रात 08:40 बजे नीमच: रात 08:40 बजे झाबुआ: रात 08:40 बजे आलीराजपुर: रात 08:41 बजे

अगर घने बादलों में छिप जाए चांद, तो कैसे करें पूजा और पारण? जानिए धर्मशास्त्रों के सटीक नियम

मौसम विभाग द्वारा जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और भोपाल संभाग में आंशिक से मध्यम बारिश और बादलों की चेतावनी के बाद कई महिलाओं के मन में यह चिंता है कि यदि चांद दिखाई ही न दे तो क्या व्रत अधूरा रह जाएगा? इस संदर्भ में ज्योतिषाचार्यों और धर्मशास्त्रियों का स्पष्ट मत है कि सनातन धर्म में किसी भी विपरीत परिस्थिति या प्राकृतिक आपदा के समय वैकल्पिक विधान की व्यवस्था की गई है। पंचांग के अनुसार आपके जिले का निर्धारित चंद्रोदय समय बीत जाने के बाद, यदि बादलों के कारण चांद स्पष्ट नजर नहीं आता है, तो महिलाएं भगवान देवाधिदेव महादेव के मस्तक पर सुशोभित बालचंद्र का ध्यान कर सकती हैं। इसके अलावा घर के पूजा स्थल पर चौकी लगाकर उस पर गंगाजल छिड़कें, शुद्ध अक्षत या चांदी के सिक्के से चंद्रमा की सुंदर प्रतीकात्मक आकृति बनाएं और उसे ही साक्षात चंद्रदेव मानकर विधि-विधान से रोली, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। मिट्टी के करवे की चोंच से उस प्रतीक को "ॐ सों सोमाय नमः" या "ॐ चंद्रमसे नमः" मंत्र का उच्चारण करते हुए भावपूर्वक अर्घ्य दें। इसके बाद आटे का चौमुखी दीपक प्रज्वलित कर छलनी से अपने पति का चेहरा देखें, उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और पति के हाथों से जल और मीठा ग्रहण कर अपना निर्जला उपवास पूर्ण करें। भावपूर्ण हृदय से की गई इस पूजा से भी अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।

भोपाल के न्यू मार्केट से इंदौर के राजबाड़ा तक: बादलों के साए में भी उल्लास से सराबोर हुए एमपी के बाजार

मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में बादलों की आवाजाही के बावजूद करवा चौथ को लेकर महिलाओं का उत्साह चरम पर दिखाई दे रहा है। राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट, बिट्ठल मार्केट, दस नंबर और पुराने शहर के चौक बाजार में सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हाथों में खूबसूरत शगुन की मेहंदी रचाने, मिट्टी के पारंपरिक करवे खरीदने और साड़ियों की मैचिंग चूड़ियों के लिए दुकानों पर लंबी कतारें देखी गईं। वहीं प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा, सराफा, छप्पन दुकान और सीतलामाता बाजार में पर्व का उल्लास देखते ही बन रहा है। इंदौर में महिलाएं पार पारंपरिक मालवी और मारवाड़ी परिधानों में सजी-धजी नजर आ रही हैं। जबलपुर के बड़ा फुहारा और गढ़ा बाजार से लेकर ग्वालियर के बाड़ा और महाराज बाड़े तक करवा चौथ की रौनक छाई हुई है। महिलाएं एक-दूसरे से फोन और सोशल मीडिया के जरिए मौसम का हाल पूछ रही हैं और अपने-अपने शहरों में चंद्र दर्शन के सटीक समय को लेकर लगातार अपडेट ले रही हैं। भले ही आसमान में बादलों का डेरा हो, लेकिन आस्था, प्रेम और समर्पण के इस महापर्व ने पूरे मध्य प्रदेश को एक पवित्र उत्सव के रंग में रंग दिया है।