करवा चौथ पर यूपी के कई जिलों में बादलों के बीच छिप सकता है चांद, लखनऊ, कानपुर, नोएडा से वाराणसी तक जानिए
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाने वाला अखंड सौभाग्य का महापर्व करवा चौथ आज पूरे उत्तर प्रदेश में पूरी श्रद्धा, उमंग और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। अपने पति की लंबी आयु, निरोगी काया और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ लाखों सुहागिन महिलाओं ने आज भोर में सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला उपवास रखा है। शाम होते ही सभी की निगाहें खुले आसमान की ओर इस उम्मीद में टिक जाती हैं कि कब चांद का दीदार हो और कब वे अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करें। हालांकि, इस बार मौसम का मिजाज व्रतियों के धैर्य की कठिन परीक्षा ले सकता है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के अनुसार, उत्तर भारत और मध्य भारत के ऊपर सक्रिय मौसमी प्रणालियों, चक्रवाती परिसंचरण और नमी युक्त पुरवैया हवाओं के असर से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में आंशिक से लेकर घने बादल छाए रहने की संभावना बनी हुई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पंचांग में जो चंद्रोदय का समय दिया जाता है, वह क्षितिज के समानांतर चंद्रमा के उदित होने का गणितीय समय होता है। यदि वायुमंडल में घने बादल, धुंध या नमी का जमावड़ा बना रहता है, तो वास्तविक रूप से आंखों से चंद्रमा की पहली किरण देखने में निर्धारित समय से 15 से 20 मिनट का अतिरिक्त समय लग सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के कुछ तराई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी और बादलों की आवाजाही के कारण चांद की लुका-छिपी देखने को मिल सकती है, जबकि पश्चिमी यूपी और एनसीआर के इलाकों में भी धुंध और हल्के बादलों का पहरा चंद्र दर्शन के समय को थोड़ा आगे खिसका सकता है।
पूरब से पश्चिम तक 25 मिनट का बड़ा अंतर: जानिए यूपी में चंद्रोदय का खगोलीय और देशांतरीय विज्ञान
उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला और भौगोलिक दृष्टि से एक विस्तृत भूभाग में फैला राज्य है। प्रदेश की पूर्वी सीमा बिहार से सटती है, जबकि पश्चिमी सीमा दिल्ली और हरियाणा को छूती है। खगोल विज्ञान के मूलभूत नियमों के अनुसार, पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की दिशा में चौबीसों घंटे घूमती रहती है। इसी घूर्णन गति और देशांतरीय अंतर (Longitudinal Difference) के कारण किसी भी खगोलीय पिंड जैसे सूर्य या चंद्रमा का उदय हमेशा सबसे पहले पूर्व दिशा के शहरों में होता है और उसके बाद धीरे-धीरे पश्चिम दिशा के शहरों में दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश के सबसे पूर्वी छोर पर स्थित जिलों जैसे बलिया, गाजीपुर, देवरिया और वाराणसी में चंद्रमा सबसे पहले उदित होगा। यहां रात लगभग 7:52 बजे से 7:58 बजे के बीच चंद्र देव के दर्शन हो सकते हैं। इसके बाद चंद्रोदय का यह क्रम धीरे-धीरे मध्य यूपी के प्रयागराज, अयोध्या, लखनऊ और कानपुर होते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा। सबसे अंत में चंद्रमा का दीदार पश्चिमी छोर और एनसीआर के जिलों जैसे गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, आगरा और मथुरा में होगा, जहां चांद रात 8:14 बजे से 8:20 बजे के आसपास क्षितिज पर नजर आएगा। इस प्रकार एक ही राज्य के भीतर पूर्व से पश्चिम के जिलों के बीच चंद्र दर्शन के समय में लगभग 20 से 25 मिनट का फासला देखने को मिलेगा।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में चांद निकलने का संभावित समय: देखें पूरी लिस्ट
मौसम की स्थिति और खगोलीय गणनाओं के आधार पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख संभागों और जिलों में करवा चौथ के चांद निकलने का संभावित समय इस प्रकार आंका गया है:
| जिला / शहर | चंद्रोदय का संभावित समय (रात) |
| बलिया | 07:52 PM |
| गाजीपुर | 07:54 PM |
| वाराणसी (काशी) | 07:56 PM - 08:00 PM |
| गोरखपुर | 07:55 PM - 07:59 PM |
| देवरिया / कुशीनगर | 07:54 PM |
| जौनपुर / आजमगढ़ | 07:58 PM |
| मिर्जापुर / सोनभद्र | 07:57 PM |
| प्रयागराज (इलाहाबाद) | 08:00 PM - 08:04 PM |
| अयोध्या | 08:00 PM - 08:04 PM |
| प्रतापगढ़ / सुल्तानपुर | 08:01 PM |
| बस्ती / गोंडा | 08:01 PM |
| रायबरेली / अमेठी | 08:03 PM |
| लखनऊ | 08:05 PM - 08:10 PM |
| बाराबंकी / सीतापुर | 08:05 PM |
| कानपुर नगर व देहात | 08:07 PM - 08:12 PM |
| उन्नाव | 08:07 PM |
| लखीमपुर खीरी / बहराइच | 08:06 PM |
| फतेहपुर / बांदा | 08:08 PM |
| झांसी / ललितपुर | 08:15 PM - 08:20 PM |
| हमीरपुर / जालौन (उरई) | 08:12 PM |
| बरेली / पीलीभीत | 08:09 PM - 08:14 PM |
| शाहजहांपुर / बदायूं | 08:10 PM |
| मुरादाबाद / रामपुर | 08:12 PM |
| अलीगढ़ / हाथरस | 08:14 PM |
| आगरा | 08:15 PM - 08:20 PM |
| मथुरा / फिरोजाबाद | 08:16 PM |
| मेरठ | 08:15 PM - 08:19 PM |
| सहारनपुर / मुजफ्फरनगर | 08:14 PM |
| गाजियाबाद | 08:16 PM - 08:21 PM |
| नोएडा / ग्रेटर नोएडा | 08:17 PM - 08:22 PM |
| बुलंदशहर / हापुड़ | 08:15 PM |
अगर घने बादलों में छिप जाए चांद, तो कैसे करें पूजा और पारण? जानिए धर्मशास्त्रों के प्रामाणिक विकल्प
मौसम विभाग द्वारा पूर्वी और मध्य यूपी में आंशिक बादलों और धुंध की संभावना को देखते हुए कई व्रती महिलाओं के मन में यह संशय उत्पन्न हो सकता है कि यदि रात को चांद बादलों की ओट में छिपा रहा, तो व्रत का पारण कैसे किया जाए। धर्मशास्त्रों, स्कंद पुराण और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सनातन परंपरा में किसी भी विषम मौसम परिस्थिति या प्राकृतिक बाधा के समाधान हेतु स्पष्ट शास्त्रीय विधान मौजूद हैं। यदि आपके शहर में निर्धारित पंचांग समय बीत जाने के बाद भी घने बादलों के कारण चंद्रमा प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देता है, तो महिलाओं को परेशान या विचलित होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। ऐसी स्थिति में व्रती महिलाएं भगवान देवाधिदेव महादेव के मस्तक पर सुशोभित बालचंद्र का ध्यान कर सकती हैं। घर के पूजा स्थल पर उत्तर-पूर्व दिशा में एक स्वच्छ चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाएं, उस पर गंगाजल छिड़कें और शुद्ध अक्षत या चांदी के सिक्के से चंद्रमा की सुंदर प्रतीकात्मक आकृति बनाएं। इस आकृति को साक्षात चंद्रदेव का स्वरूप मानकर रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प और मिष्ठान अर्पित करें। इसके बाद मिट्टी के करवे की टोटी से "ॐ सों सोमाय नमः" अथवा "ॐ चंद्रमसे नमः" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करते हुए अर्घ्य समर्पित करें। इसके पश्चात छलनी में आटे का जलता हुआ चौमुखी दीपक रखकर अपने पति का चेहरा देखें, उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और पति के हाथों से जल व मिठाई ग्रहण कर अपना निर्जला उपवास विधिपूर्वक संपन्न करें। शास्त्रों में स्पष्ट है कि निष्काम भाव और अंतःकरण की शुद्ध भावना से किया गया मानसिक पूजन भी साक्षात चंद्र दर्शन के समान ही अखंड सौभाग्य और दीर्घायु का फल प्रदान करता है।
लखनऊ के हजरतगंज से काशी के अस्सी घाट तक: बादलों के साए में भी पर्व के उल्लास से सराबोर हुए यूपी के बाजार
आसमान में बादलों की आवाजाही और मौसम की अनिश्चितता के बावजूद पूरे उत्तर प्रदेश में करवा चौथ को लेकर सुहागिनों और परिवारों में उत्साह चरम पर है। राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक हजरतगंज, अमीनाबाद, चौक, आलमबाग और भूतनाथ मार्केट में सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बाजारों में शगुन की चूड़ियां, पारंपरिक लाल व सुनहरी साड़ियां, मिट्टी के टोटीदार करवे, सींक और छलनी खरीदने के लिए दुकानों पर लंबी कतारें देखी गईं। मेंहदी आर्टिस्ट्स के पास महिलाओं ने देर रात तक बैठकर अपने हाथों पर पिया के नाम की खूबसूरत मेहंदी रचाई। वहीं कानपुर के नवीन मार्केट, पीपीएन मार्केट और गोविंद नगर में उत्सव का उल्लास देखते ही बन रहा है। धर्मनगरी वाराणसी में दशाश्वमेध और अस्सी घाट के आसपास गंगा किनारे की छटा निराली है, जहां व्रती महिलाएं गंगाजल भरकर मिट्टी के करवे में पूजा की तैयारी कर रही हैं। प्रयागराज के सिविल लाइंस और कटरा बाजार, आगरा के संजय प्लेस और किनारी बाजार से लेकर नोएडा के अट्टा मार्केट व सेक्टर 18 तक हर तरफ पारंपरिक उत्सव का माहौल है। महिलाएं सोशल मीडिया और मौसम ऐप्स के जरिए लगातार अपने-अपने शहरों में चंद्रोदय के समय का लाइव अपडेट ले रही हैं। बादलों का साया भले ही व्रतियों का थोड़ा इंतजार बढ़ा दे, लेकिन सुहाग, समर्पण और अटूट प्रेम का यह महापर्व हर आंगन को खुशियों और मांगलिक आभा से महका रहा है।