धनतेरस की शाम घर में कहां-कहां जलाएं ये खास 13 दीपक

धनतेरस की शाम घर में कहां-कहां जलाएं ये खास 13 दीपक

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस (Dhanteras 2026) का पावन पर्व सनातन धर्म में केवल सुख-समृद्धि, सोने-चांदी की खरीदारी और मां लक्ष्मी के स्वागत का ही दिन नहीं है, बल्कि यह यमराज की उपासना और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने का भी अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी और कुबेर देवता के पूजन के साथ-साथ मृत्यु के देवता यमराज (Yamraj) के निमित्त विशेष रूप से 'यम का दीया' (Yam Deepak) जलाने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर या घर के बाहर यम दीप जलाने के पीछे यह मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और यमराज की कृपा से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करती हैं। इस साल धनतेरस के पावन पर्व पर यम दीप जलाने का सही समय, उसकी पूजा-विधि, दिशा और नियमों की पूरी जानकारी होना हर सनातनी परिवार के लिए बेहद आवश्यक है, ताकि इस अनुष्ठान को पूरी विधि-विधान के साथ संपन्न किया जा सके।

#1 धनतेरस की शाम क्यों जलाया जाता है यम का दीया और क्या है इसका पौराणिक महत्व?

कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन काल में एक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन ही अकाल मृत्यु का योग था। जब नियत समय पर यमराज के दूत उस राजकुमार के प्राण लेने आए, तो उसकी नई नवेली पत्नी ने यमराज के दूतों का स्वागत बहुत आदर-सत्कार के साथ किया और उनके चारों तरफ बहुत सारे दीप जलाकर रख दिए तथा ढेर सारे आभूषण व अनाज बिखेर दिए। दीपों की तेज रोशनी, सोने की चमक और सुंदर भजनों से यमराज के दूत भ्रमित हो गए और वे राजकुमार के प्राण लिए बिना ही वापस लौट गए। इसी पौराणिक कथा और मान्यता के आधार पर हर साल धनतेरस की संध्या के समय यमराज के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा शुरू हुई, जिसे 'यम दीपदान' कहा जाता है। यह दीपक मुख्य रूप से घर के सभी सदस्यों की दीर्घायु, स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु के संकट को टालने के लिए जलाया जाता है।

#1 घर में कहां-कहां और कैसे जलाएं कुल 13 दीपक? जानिए सही स्थान और नियम

धनतेरस के दिन केवल एक यम का दीया नहीं बल्कि पूरे घर में कुल 13 दीपक जलाने की विशेष परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। आइए जानते हैं कि ये 13 दीपक घर के किन-किन प्रमुख स्थानों पर रखे जाने चाहिए। सबसे पहला और मुख्य यम का दीपक आपके घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जलाया जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इसके अलावा दूसरा दीपक घर के पूजा घर में मां लक्ष्मी और गणेश जी के सामने जलाएं। तीसरा दीपक तुलसी के पौधे के पास, चौथा दीपक रसोईघर में पानी के मटके या आरओ के पास, पांचवां दीपक घर के मुख्य हॉल या ड्राइंग रूम में, छठा दीपक घर की छत या बालकनी पर, सातवां दीपक सीढ़ियों के पास, आठवां, नौवां, दसवां और ग्यारहवां दीपक घर के चारों कोनों में, बारहवां दीपक पीपल के पेड़ के नीचे और तेरहवां दीपक घर के बाहर चौराहे या गली के नुक्कड़ पर रखा जाता है। इन सभी दीपकों को जलाने से घर की दरिद्रता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

#1 यम दीप जलाने की सही विधि, मंत्र और दिशा का विशेष ध्यान

यमराज के निमित्त जलाए जाने वाले मुख्य दीपक की विधि बेहद खास होती है। इसके लिए आप आटे का एक बड़ा चौमुखी (चार मुंह वाला) दीपक तैयार कर सकते हैं या फिर एक साफ-सुथरा नया मिट्टी का दीया भी ले सकते हैं। इस दीपक में सरसों का तेल या शुद्ध तिल का तेल भरा जाता है और चार लंबी रुई की बत्तियां लगाई जाती हैं, ताकि चारों दिशाओं में उसका प्रकाश फैल सके। प्रदोष काल के समय यानी जब सूर्यास्त हो रहा हो और रात का आरंभ हो रहा हो, तब इस दीपक को प्रज्वलित करना सबसे उत्तम माना जाता है। दीपक को प्रज्वलित करने के बाद उसमें कुछ काले तिल के दाने और एक सिक्का या कौड़ी जरूर डालें। इसके बाद हाथ में जल लेकर दीपक पर तीन बार घुमाएं और 'मृत्युना पाशदंडाभ्याम् कालेन च मया सह, त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयताम् मम' मंत्र का उच्चारण करते हुए यमराज से अपने परिवार की लंबी आयु और स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

#1 यम दीप जलाते समय भूलकर भी न करें ये छोटी-छोटी गलतियां

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के जानकारों का कहना है कि यम दीप जलाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सबसे पहला नियम यह है कि यमराज का मुख्य दीपक हमेशा घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ही रखा जाना चाहिए, इसे घर के अंदर पूजा स्थल पर नहीं रखना चाहिए। दूसरा, जब आप यम का दीपक जलाकर घर के अंदर आ जाएं, तो उस दीपक को पीछे मुड़कर बिल्कुल न देखें। ऐसा माना जाता है कि दीपक जलाने के बाद पीछे देखने से उसका फल समाप्त हो जाता है। तीसरा, इस दिन घर के सभी कोनों को अच्छी तरह साफ-सुथरा रखें और किसी भी अंधेरे कोने में नकारात्मकता न रहने दें। यदि आप इन सभी नियमों और विधि-विधान के साथ धनतेरस पर यम दीप जलाते हैं, तो आपके घर में साल भर सुख, शांति, आरोग्य और मां लक्ष्मी का अखंड आशीर्वाद बना रहेगा।