गेंद और बल्ले से अकेले पलटा मैच, पहले T20 में जिम्बाब्वे को धूल चटाकर अफगानिस्तान की धमाकेदार जीत
अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट के सबसे बड़े मैच-विनर और करिश्माई अफगान कप्तान राशिद खान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब वे मैदान पर अपने पूरे रंग में होते हैं, तो विपक्षी टीम के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचता। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज के पहले मुकाबले में राशिद खान के 'डबल अटैक' ने मेजबान टीम को पूरी तरह घुटनों पर ला दिया। पहले संकट के समय मैदान पर उतरकर अपने बल्ले से आतिशी कैमियो खेल मैच का पासा पलटा और फिर गेंद हाथ में आते ही अपनी रहस्यमयी लेग स्पिन और तीखी गुगली से जिम्बाब्वे के बल्लेबाजी क्रम की धज्जियां उड़ा दीं। अफगानिस्तान ने इस मुकाबले को एकतरफा अंदाज में जीतकर सीरीज में 1-0 की मजबूत और मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है। हरारे के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में टॉस से लेकर मैच के अंतिम क्षण तक दर्शकों को भरपूर रोमांच देखने को मिला। जिम्बाब्वे के कप्तान ने घरेलू परिस्थितियों और शुरुआती नमी का फायदा उठाने के इरादे से पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। शुरुआती ओवर्स में यह दांव काफी हद तक सही साबित होता भी दिखा जब अफगान टॉप ऑर्डर रन गति को बढ़ाने के चक्कर में नियमित अंतराल पर अपने अहम विकेट गंवाता चला गया। लेकिन जब तक राशिद खान डगआउट में मौजूद हों, विरोधी टीम कभी भी अपनी जीत तय नहीं मान सकती। क्रीज पर आते ही अफगान कप्तान ने मैच का रुख 180 डिग्री मोड़ दिया और मेजबानों के होश उड़ा दिए।
पहले बल्ले से मचाया कोहराम: डेथ ओवर्स में राशिद की आतिशी बल्लेबाजी
मैच के 15वें ओवर में जब अफगानिस्तान की पारी लड़खड़ाती हुई नजर आ रही थी और स्कोरबोर्ड पर एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा करना भी चुनौती लग रहा था, तब राशिद खान 7वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे। अमूमन अपनी जादुई गेंदबाजी के लिए विख्यात राशिद ने क्रीज पर कदम रखते ही अपने ट्रेडमार्क आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने पहली ही गेंद से जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाजों को निशाने पर लिया और मैदान के चारों ओर चौकों-छक्कों की बरसात कर दी। जिम्बाब्वे के प्रमुख डेथ गेंदबाजों ने यॉर्कर और वाइड आउटसाइड-ऑफ की रणनीति अपनाई, लेकिन राशिद की कलाई की जादूगरी और जबर्दस्त हैंड-आई कोऑर्डिनेशन के आगे हर रणनीति नाकाम साबित हुई। उन्होंने बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से हेलीकॉप्टर-स्टाइल फ्लिक और डीप मिडविकेट पर गगनचुंबी छक्के जड़कर स्टेडियम में बैठे फैंस को मंत्रमुग्ध कर दिया। राशिद ने महज 15 से 18 गेंदों की अपनी तूफानी पारी में ताबड़तोड़ रन कूटते हुए अफगानिस्तान के स्कोर को 175 के पार पहुंचा दिया, जो उस पिच पर एक बेहद चुनौतीपूर्ण और मैच-विनिंग टोटल बन चुका था। इस आतिशी पारी ने न केवल टीम को मजबूती दी, बल्कि जिम्बाब्वे के खेमे में हताशा भी भर दी।
फिर फिरकी का चला जादू: जिम्बाब्वे के शीर्ष क्रम को जाल में फंसाया
लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम को एक ठोस और तेजतर्रार शुरुआत की दरकार थी। शुरुआती दो-तीन ओवरों में सलामी बल्लेबाजों ने कुछ आक्रामक शॉट खेलकर इरादे जताने की कोशिश जरूर की, लेकिन पावरप्ले खत्म होते ही गेंद कप्तान राशिद खान के हाथों में आ गई। राशिद का आक्रमण पर आना ही जिम्बाब्वे के लिए पतन की शुरुआत साबित हुआ। उन्होंने अपने स्पेल के पहले ही ओवर की तीसरी गेंद पर जिम्बाब्वे के सबसे इन-फॉर्म बल्लेबाज को अपनी तेज गति वाली गुगली पर चकमा देकर सीधे एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। बल्लेबाज गेंद की लाइन को बिल्कुल भांप नहीं सका और बैकफुट पर खेलने के प्रयास में पूरी तरह बीट हो गया। इसके ठीक दो गेंद बाद राशिद ने एक और क्लासिक लेग ब्रेक फेंकी, जो पिच पर पड़ने के बाद तेजी से बाहर की ओर घूमी और बल्लेबाज के बल्ले का बाहरी किनारा चूमती हुई सीधे विकेटकीपर के दस्तानों में समा गई। एक ही ओवर में लगे इस दोहरे झटके ने जिम्बाब्वे की कमर तोड़ दी। इसके बाद मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने रक्षात्मक रुख अपनाने की कोशिश की, लेकिन राशिद के सटीक टप्पे और ड्रिफ्ट के आगे रन चुराना तो दूर, क्रीज पर टिके रहना भी असंभव नजर आने लगा। उन्होंने अपने चार ओवर के कोटे में बेहद किफायती गेंदबाजी करते हुए प्रमुख बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।
अफ़ग़ान टीम का बढ़ता दबदबा: क्यों टी-20 फॉर्मेट में खतरनाक बनी यह टीम?
अफगानिस्तान का यह दबदबा केवल किसी तुक्के का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस अथक मेहनत और सामरिक योजना का नतीजा है जो इस टीम ने पिछले कुछ वर्षों में टी-20 क्रिकेट में विकसित की है। दुनिया की लगभग हर बड़ी टी-20 फ्रेंचाइजी लीग में खेलने वाले अफगान खिलाड़ियों के पास अब दबाव के पलों को संभालने का गजब का अनुभव आ चुका है। टीम के पास जहां शीर्ष क्रम में निडर होकर बड़े शॉट लगाने वाले बल्लेबाज हैं, वहीं मध्यक्रम और लोअर ऑर्डर में राशिद खान और मोहम्मद नबी जैसे अनुभवी ऑलराउंडर मौजूद हैं जो किसी भी परिस्थिति से मैच निकालना जानते हैं। गेंदबाजी विभाग की बात करें तो अफगानिस्तान का स्पिन अटैक वर्तमान में दुनिया के सबसे घातक संयोजनों में से एक है। नूर अहमद, मुजीब उर रहमान और खुद राशिद खान की तिकड़ी किसी भी बल्लेबाजी लाइन-अप के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है। जब एक छोर से रन गति पर ताला लग जाता है, तो दूसरे छोर से विकेट गिरने का सिलसिला अपने आप शुरू हो जाता है। जिम्बाब्वे के बल्लेबाज भी इसी चक्रव्यूह में फंसकर एक के बाद एक गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलने पर मजबूर हुए और पूरी टीम निर्धारित 20 ओवर भी पूरे नहीं खेल सकी।
सीरीज में 1-0 की अजेय बढ़त: जिम्बाब्वे के सामने वापसी की कड़ी चुनौती
इस शानदार और एकतरफा जीत के साथ अफगानिस्तान ने तीन मैचों की टी-20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में अपने ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुने गए राशिद खान ने टीम के एकजुट प्रयास की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि उनका मकसद हमेशा टीम की जरूरत के मुताबिक योगदान देना होता है, चाहे वह बल्ला हाथ में हो या गेंद। उन्होंने अपने गेंदबाजों की अनुशासनबद्ध लाइन-लेंथ की भी तारीफ की। दूसरी तरफ, घरेलू मैदान पर इस तरह की करारी शिकस्त झेलने के बाद जिम्बाब्वे के लिए आगे की राह बेहद कठिन हो गई है। टीम के मुख्य कोच और कप्तान के सामने अब सबसे बड़ा सिरदर्द यह है कि वे आगामी मुकाबलों में अफगान स्पिनरों के इस रहस्यमयी जाल को कैसे तोड़ें। अगर जिम्बाब्वे को इस सीरीज में अपनी उम्मीदें जिंदा रखनी हैं, तो उनके बल्लेबाजों को राशिद खान के स्पेल के खिलाफ नई और आक्रामक योजना के साथ उतरना होगा। फिलहाल तो हरारे का मैदान पूरी तरह से अफगानिस्तान के परचम और राशिद खान के करिश्मे से सराबोर नजर आ रहा है।