वाराणसी में बोले CM योगी: देश की रक्षा में शस्त्र धारण के लिए भी रहें तैयार, 'शस्त्र सिर्फ पूजन की वस्तु नहीं'
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक स्वाभिमान को लेकर एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। वाराणसी के सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी वर्ष समारोह एवं दुर्गा पूजा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन परंपरा में शक्ति और साधना एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे यहां पूजा केवल धूप, दीप और नैवेद्य से ही नहीं होती, बल्कि मां भगवती की उपासना अस्त्र-शस्त्रों के साथ भी की जाती है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि शस्त्र केवल घर या मंदिर में सजाकर पूजने की वस्तु नहीं हैं, बल्कि जब राष्ट्र और धर्म पर संकट आए, तो देश की रक्षा के लिए इन्हें धारण करने के लिए भी हर नागरिक और संन्यासी को तत्पर रहना होगा।
स्वामी प्रणवानंद जी महाराज और गोरक्षपीठ का ऐतिहासिक नाता
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद जी महाराज के जीवन और उनके राष्ट्र जागरण के संकल्पों को नमन किया। उन्होंने गोरक्षपीठ और स्वामी प्रणवानंद के गहरे आत्मिक संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1912-13 में जब स्वामी जी महज 12-13 वर्ष के बालक (विनोद) थे, तब वे अपने गुरु की खोज में गोरखपुर की गोरक्षपीठ पहुंचे थे। वहां सिद्ध संत बाबा गंभीरनाथ ने उन्हें देखते ही 'जन्मजात सिद्ध योगी' बताया था। स्वामी प्रणवानंद ने वहीं तीन घंटे की अखंड समाधि लगाई थी और वहीं से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त कर देश भर में हिंदू जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाई थी। योगी ने कहा कि स्वामी जी ने केवल व्यक्तिगत मोक्ष के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र की उन्नति और रक्षा को ही अपनी साधना का मूल मंत्र बनाया था।
'विभाजन और कमजोरी के कारण झेलने पड़े 500 वर्षों के कलंक'
इतिहास की त्रासदियों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब-जब समाज बंटा और कमजोर पड़ा, तब-तब देश की विरासत, धर्म और संस्कृति पर आक्रांताओं ने प्रहार किए। उन्होंने काशी विश्वनाथ, अयोध्या की राम जन्मभूमि और मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि हमारे पूर्वज एकजुट रहते, तो किसी विदेशी आक्रांता में इतना साहस नहीं होता कि वह काशी में बाबा विश्वनाथ के पावन मंदिर को अपवित्र कर सके या अयोध्या में 500 वर्षों तक गुलामी का ढांचा खड़ा रह सके। सीएम योगी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम का भव्य स्वरूप और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का पुनर्निर्माण उसी सुप्त राष्ट्रीय चेतना के दोबारा जागृत होने का सुखद परिणाम है।
संन्यासियों के साहस की सराहना और विपक्ष पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल में भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासियों के प्रति तृणमूल कांग्रेस सरकार के रवैये पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बंगाल में जब सरकार संन्यासियों को डराने-धमकाने लगी, तब यह साफ हो गया था कि वह सरकार रावण और कंस के रास्ते पर चल रही है। संन्यासियों के अडिग रहने की प्रशंसा करते हुए योगी ने कहा कि जब उन्होंने वहां के संतों से पूछा था कि क्या उन्हें कोई भय है, तो संतों का जवाब था कि वे देश और धर्म के लिए जीने-मरने को तैयार हैं। इसके साथ ही वाराणसी दौरे के दौरान सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर भी चुटकी ली और आरोप लगाया कि सपा का पीडीए असल में 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' और 'पराया धन अपना' तक ही सीमित है।
100 परिवारों को सिलाई मशीनें बांटकर दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह के पावन अवसर पर सेवा कार्यों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद परिवारों के सशक्तिकरण पर भी बल दिया। इस दौरान संघ की ओर से 100 जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई मशीनें प्रदान की गईं, जिनमें से 5 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री ने अपने कर-कमलों से मशीनें सौंपी। सीएम योगी ने कहा कि सेवा, साधना और सुरक्षा का यह त्रिवेणी संगम ही भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।