सीएम योगी की मौजूदगी में BJP के 8 राज्यसभा उम्मीदवारों ने किया नामांकन, सपा के मैदान छोड़ने से सभी की जीत पक्की

सीएम योगी की मौजूदगी में BJP के 8 राज्यसभा उम्मीदवारों ने किया नामांकन, सपा के मैदान छोड़ने से सभी की जीत पक्की

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लखनऊ स्थित विधान भवन में अपना जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, दोनों उप-मुख्यमंत्रियों (केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक) और एनडीए के सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में भाजपा के सभी आठ प्रत्याशियों ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा '3 नहीं, 403' का फॉर्मूला देते हुए तीसरा प्रत्याशी न उतारने के फैसले के बाद अब किसी भी तरह के मुकाबले या मतदान की संभावना समाप्त हो गई है। 10 रिक्त सीटों के सापेक्ष अब कुल 10 ही प्रत्याशी (भाजपा के 8 और सपा के 2) मैदान में हैं, जिसके चलते भाजपा के सभी आठों उम्मीदवारों की संसद के उच्च सदन में निर्विरोध जीत पूरी तरह पक्की हो चुकी है।

विधान भवन में शक्ति प्रदर्शन: इन 8 चेहरों ने दाखिल किया पर्चा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भाजपा के आठों प्रत्याशियों ने अपने-अपने प्रस्तावकों के साथ पहुंचकर नामांकन के चार-चार सेट दाखिल किए:

  1. धर्मपाल सिंह: उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और रुहेलखंड में लोधी समाज के प्रमुख चेहरे।

  2. राधाकांत ओझा: इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ संघ पृष्ठभूमि के वकील।

  3. प्रकाश पाल: भाजपा प्रदेश ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष और संगठन के पुराने रणनीतिकार।

  4. विद्यासागर सोनकर: पूर्वांचल से आने वाले दलित नेता (खटीक समाज) और पूर्व एमएलसी।

  5. गोपी कृष्ण पांडेय: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पृष्ठभूमि से जुड़े समर्पित सांगठनिक नेता।

  6. प्रियंका सिंह रावत: बाराबंकी की पूर्व सांसद, पार्टी की प्रदेश महामंत्री और पासी समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली दलित महिला चेहरा।

  7. राम प्रताप सिंह चौहान: आगरा के एत्मादपुर से पूर्व विधायक और ब्रज क्षेत्र के राजपूत नेता।

  8. श्रुति गंगवार: वरिष्ठ भाजपा नेता संतोष गंगवार की पुत्री और कुर्मी ओबीसी समाज की युवा महिला प्रतिनिधि।

नामांकन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रत्याशियों को बधाई देते हुए कहा कि पार्टी ने संगठन के निष्ठावान और सर्वसमावेशी समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यकर्ताओं को संसद भेजने का निर्णय लिया है। उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भाजपा ने हर वर्ग और क्षेत्र को एक सूत्र में पिरोया है, जबकि विपक्ष अपने ही बुने चक्रव्यूह में फंसकर मैदान छोड़ चुका है।

एनडीए की अभेद्य घेराबंदी के आगे सपा ने टेके घुटने

भाजपा की इस एकतरफा जीत की पटकथा संख्याबल के मजबूत किले ने लिखी है। 403 सदस्यीय यूपी विधानसभा में एनडीए के पास 293 से अधिक विधायकों का समर्थन मौजूद था। भाजपा को अपने आठों प्रत्याशियों को जिताने के लिए 296 प्रथम वरीयता वोटों की दरकार थी, जिसे पार्टी आसानी से जुटाने की स्थिति में थी।

वहीं सपा के पास अपने 101 और कांग्रेस के 2 विधायकों को मिलाकर 103 वोट थे। अपने दो प्रत्याशियों (प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी) के लिए 74 वोट सुरक्षित करने के बाद सपा के पास केवल 29 वोट बचते थे। तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए सपा को कम से कम 8 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी। पिछले चुनाव में हुई बगावत और हाल ही में कई सपा विधायकों के बागी रुख को देखते हुए अखिलेश यादव ने रिस्क न लेते हुए पैर पीछे खींच लिए।

नाम वापसी के बाद निर्विरोध निर्वाचन का औपचारिक ऐलान

चुनाव आयोग की तय समय-सारिणी के अनुसार नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) और नाम वापसी की समयसीमा पूरी होते ही निर्वाचन अधिकारी सभी 10 प्रत्याशियों—भाजपा के 8 और सपा के 2—के निर्विरोध निर्वाचित होने का आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी कर देंगे।

केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली के बड़े रसूखदारों की जगह पार्टी काडर, संघ के पुराने स्वयंसेवकों और महिलाओं को 25% हिस्सेदारी देकर भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम किया है।