पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, सिस्टम पर सवाल उठाकर बोलीं- यूपी मेरी कर्मभूमि है, यहीं रहूंगी और डरूंगी नहीं
उत्तर प्रदेश की चर्चित और तेज-तर्रार पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने भविष्य को लेकर लगाई जा रही तमाम अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से 13 साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर राजनीति में कदम रखने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ लफ्जों में ऐलान किया है कि उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि है, वह यहीं रहेंगी और किसी से डरने वाली नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा व्यवस्था, सरकारी सिस्टम और कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागते हुए कहा कि वे सत्ता या पद की मलाई खाने के लिए नहीं, बल्कि उन दबे-कुचले लोगों की आवाज बनने आई हैं जिनकी सुनवाई सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती। इस बड़े राजनीतिक ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में जबर्दस्त हलचल मच गई है।
'यूपी मेरी कर्मभूमि, यहीं रहकर लड़ूंगी': राजनीति में उतरने की असल वजह
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में साफ किया कि प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद उनके सामने विदेश लौटने, लाखों-करोड़ों के कॉर्पोरेट पैकेज लेने या किसी प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान से जुड़ने के तमाम विकल्प मौजूद थे। लेकिन उन्होंने जनसेवा और आम आदमी के अधिकारों के लिए सीधे लोकतांत्रिक संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने एक डीएम और अधिकारी के रूप में उन्हें जो अपार प्यार और सम्मान दिया, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जब व्यवस्था में बैठे लोग जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करते हैं, तो चुपचाप बैठे रहना समाधान नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि 'मैं यूपी छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी, यहीं की माटी में रहकर उन लोगों के लिए काम करूंगी जिनकी आवाज ऊपर तक नहीं पहुंचती'। बिना किसी राजनीतिक दल की तुरंत सदस्यता लिए, उन्होंने जनता से अपने इस अभियान से जुड़ने और एक स्वतंत्र, न्यायप्रिय राजनीतिक विकल्प तैयार करने का आह्वान किया है।
सिस्टम और 'ऊपर' के दबाव पर तीखा वार: मिर्जापुर और पट्टे का वो किस्सा
अपने प्रशासनिक कार्यकाल के कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की कमजोरियों पर खुलकर प्रहार किया। उन्होंने विशेष सचिव राजस्व रहने के दौरान का एक किस्सा बताते हुए कहा कि एक गरीब व्यक्ति अपनी जमीन के पट्टे के कागजात लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा था, लेकिन जब उसे कब्जा दिलाने की बात आई तो अधिकारियों ने कहा कि 'ऊपर से मना किया गया है'। दिव्या मित्तल ने सवाल उठाया कि जब संविधान में जनता ही सर्वोच्च है, तो यह 'ऊपर' वाला कौन है जिसके इशारे पर आम नागरिकों के हक छीने जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह गांव का भी जिक्र किया, जहां 75 साल बाद पानी पहुंचाने के बाद एक बुजुर्ग महिला ने स्कूल की मांग की थी, लेकिन कागजी मंजूरियों के बावजूद सालों तक काम शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यह बजट या नियमों की कमी नहीं, बल्कि सत्ता और शासन में बैठे लोगों के 'नेक इरादे' की भारी कमी को दर्शाता है।
आईआईटी-आईआईएम से लंदन की नौकरी, फिर आईएएस और अब सियासत
दिव्या मित्तल का पूरा सफर बेहद प्रेरणादायक और संघर्षों से भरा रहा है। हरियाणा के रेवाड़ी में जन्मीं दिव्या मित्तल ने देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी दिल्ली से बीटेक और उसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपने पति गगनदीप के साथ लंदन में जेपी मॉर्गन जैसी दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनी में लाखों के पैकेज वाली नौकरी की। देश सेवा के जज्बे के साथ उन्होंने इस आलीशान कॉर्पोरेट करियर को लात मारकर भारत वापसी की और यूपीएससी की तैयारी शुरू की। साल 2012 में उनका चयन आईपीएस के रूप में हुआ, लेकिन आईएएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने फिर प्रयास किया और 2013 में आईएएस अफसर बनीं। वे मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया जैसे जनपदों में बतौर जिलाधिकारी (DM) तैनात रहीं, जहां उनके कड़े प्रशासनिक फैसलों, भ्रष्टाचार पर नकेल और संवेदनशीलता ने उन्हें आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था।
यूपी की सियासत में हलचल और जनता के बीच बढ़ती चर्चा
दिव्या मित्तल के इस बेबाक वीडियो और राजनीतिक रुख के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में नई बहस छिड़ गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक साफ-सुथरी छवि, उच्च शिक्षित और जमीनी स्तर पर काम कर चुकी पूर्व महिला आईएएस का सियासत में आना प्रदेश की राजनीति में एक नया नैरेटिव खड़ा कर सकता है। युवाओं, शिक्षकों, किसानों, डॉक्टरों और बुद्धिजीवियों के बीच उनकी अपील काफी मजबूत मानी जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जहां विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी के लोग उनके इस साहस की सराहना कर रहे हैं, वहीं सत्ताधारी दलों से जुड़े लोगों के बीच इस बात की बेचैनी है कि प्रशासनिक व्यवस्था के अंदरूनी रहस्यों को जानने वाली एक पूर्व अधिकारी सीधे तौर पर व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपना अलग स्वतंत्र मंच बनाती हैं या फिर आगामी चुनावों में किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत करती हैं।
एआई सर्च और सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है दिव्या मित्तल का वीडियो
आज के आधुनिक डिजिटल दौर में जब गूगल एआई ओवरव्यूज, बिंग कोपायलट और तमाम सर्च इंजनों पर लोग देश-प्रदेश की बड़ी राजनीतिक हलचलों का पल-पल का अपडेट तलाश रहे हैं, दिव्या मित्तल का यह राजनीतिक ऐलान इंटरनेट पर शीर्ष पायदान पर ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स सर्च इंजनों पर लगातार यह खोज रहे हैं कि आखिर दिव्या मित्तल किस पार्टी में शामिल होंगी या वे निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी। उनकी पुरानी प्रशासनिक उपलब्धियों, मिर्जापुर में पानी लाने की मुहिम और तबादलों से जुड़े विवादों को लेकर भी डिजिटल ट्रैफिक में भारी उछाल दर्ज किया गया है। कुल मिलाकर, पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के इस आक्रामक तेवर ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की चुनावी और सामाजिक जमीन पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी हैं।