Lucknow Electricity Update: लखनऊ के 57 गांवों को मिलेगी लो वोल्टेज से राहत, बिछेगा नया बिजली नेटवर्क

Lucknow Electricity Update: लखनऊ के 57 गांवों को मिलेगी लो वोल्टेज से राहत, बिछेगा नया बिजली नेटवर्क

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ग्रामीण और अर्बन-रूरल ट्रांजिशन इलाकों में रहने वाले लाखों ग्रामीणों के लिए ऊर्जा विभाग और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम से जुड़ी बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। लखनऊ के विभिन्न उपकेंद्रों से जुड़े 57 गांवों और दूर-दराज के मजरों में दशकों पुरानी जर्जर बिजली लाइनों, बार-बार ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की गंभीर समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए व्यापक कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। लेसा (लखनऊ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन) द्वारा सौभाग्य योजना पार्ट-3 के अंतर्गत इन सभी 57 चिह्नित गांव-मजरों में आधुनिक और मजबूत बिजली का नया नेटवर्क बिछाने का फैसला लिया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद मोहनलालगंज, बख्शी का तालाब (बीकेटी), सरोजनीनगर और मलिहाबाद क्षेत्र के हजारों ग्रामीण परिवारों को पहली बार 24 घंटे निर्बाध और सुरक्षित बिजली की आपूर्ति मिल सकेगी।

सौभाग्य योजना पार्ट-3: 115 मजरों के सर्वे के बाद 57 गांवों पर लगी मुहर

लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल उमस भरी गर्मी और मानसूनी आंधी के दौरान बिजली संकट विकराल रूप धारण कर लेता था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सौभाग्य योजना के तीसरे चरण के तहत पावर कॉरपोरेशन और लेसा की संयुक्त टीमों ने पहले 115 ऐसे गांवों और मजरों का सघन भौतिक सर्वे किया था, जहां आबादी तो बस गई थी लेकिन बिजली का समुचित नेटवर्क नहीं था। इस विस्तृत जमीनी पड़ताल के बाद कुल 57 गांव और मजरों को अंतिम रूप से चिह्नित किया गया है, जहां अभी भी कई घरों में पर्याप्त वोल्टेज नहीं पहुंच रहा था या लाइनें नहीं खिंची थीं। इन चिह्नित इलाकों में सबसे बड़ा हिस्सा अमौसी जोन के अंतर्गत आने वाले 50 गांवों का है, जबकि जानकीपुरम जोन के 7 महत्वपूर्ण गांवों को भी इस आधुनिक बिजली संजाल से जोड़ा जा रहा है।

छह या अधिक परिवार वाले मजरों को प्राथमिकता: छोटे टोलों तक पहुंचेगी रोशनी

विद्युतीकरण के इस विशेष अभियान में लेसा प्रबंधन ने निष्पक्षता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक रोशनी पहुंचाने के लिए बेहद कड़े और व्यावहारिक मानदंड निर्धारित किए हैं। इस योजना के दायरे में समेसी, गोसाईगंज, निगोहां, मोहनलालगंज, रहीमाबाद, माल, मलिहाबाद, दुबग्गा, काकोरी और बीकेटी उपकेंद्रों के अंतर्गत आने वाले ऐसे सभी टोलों और मजरों को शामिल किया गया है, जहां कम से कम छह या उससे अधिक परिवार निवास करते हैं। अक्सर देखा जाता था कि मुख्य गांव से 500 मीटर या एक किलोमीटर दूर बसे छोटे मजरों को बिजली नेटवर्क से छोड़ दिया जाता था, लेकिन अब इस नई व्यवस्था से दूर-दराज के छोटे से छोटे टोले में भी स्वतंत्र खंभे और तार पहुंचाए जाएंगे।

खुले तारों का झंझट खत्म: एबीसी केबल और नए ट्रांसफार्मरों से रुकेगी बिजली चोरी

बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन 57 गांवों में बिजली आपूर्ति को विश्वस्तरीय बनाने के लिए पारंपरिक नंगे तारों (बेयर वायर) की जगह पूरी तरह से एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी केबल) बिछाया जाएगा। एबीसी केबल प्लास्टिक कोटेड और इंसुलेटेड होने के कारण इसमें कटिया मारकर बिजली चोरी करने की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है, जिससे लाइन लॉस न्यूनतम स्तर पर आ जाता है। साथ ही, इन गांवों में एचटी (हाई टेंशन) और एलटी (लो टेंशन) के नए खंभे खड़े किए जाएंगे और ओवरलोडिंग को रोकने के लिए पर्याप्त क्षमता वाले नए ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाएंगे। खुले तारों के आपस में टकराने से होने वाले शॉर्ट सर्किट और आंधी-पानी में लाइन टूटने की घटनाएं भी इस आधुनिक तकनीक से पूरी तरह थम जाएंगी।

किसानों और छोटे कारोबारियों को होगा सीधा फायदा: दिसंबर 2026 तक लक्ष्य

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों, ट्यूबवेल संचालकों, आटा चक्कियों, वेल्डिंग वर्कशॉप्स और लघु कुटीर उद्योगों को इस नए बिजली नेटवर्क से सबसे बड़ा संबल मिलेगा। लो-वोल्टेज के कारण अक्सर किसानों की सबमर्सिबल मोटरें जल जाती थीं और घरेलू पंखे व कूलर शोपीस बनकर रह जाते थे। नया ढांचा तैयार होने से ग्रामीणों को स्थिर वोल्टेज मिलेगा, जिससे बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान नहीं आएगा और रात के समय खेतों की सिंचाई सुगम होगी। लेसा के मुख्य अभियंताओं ने स्पष्ट किया है कि कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जा चुका है और सभी 57 मजरों में बुनियादी ढांचे को खड़ा करके दिसंबर 2026 तक निर्बाध बिजली सप्लाई चालू करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उपभोक्ताओं के लिए राहत: गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति के साथ आसान होंगे नए कनेक्शन

नया नेटवर्क बिछने के साथ ही इन गांवों के गैर-विद्युतीकृत परिवारों को झटपट पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से तुरंत नए घरेलू और कृषि बिजली कनेक्शन जारी किए जाएंगे। लेसा अधिकारियों ने फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए हैं कि केबल बिछाने के दौरान ही पात्र ग्रामीणों के कनेक्शन फॉर्म भरवा लिए जाएं, ताकि लाइन चार्ज होते ही हर घर का मीटर चालू हो सके। राजधानी के ग्रामीण अंचल में इंफ्रास्ट्रक्चर के इस बड़े कायाकल्प से स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह है और उन्होंने इसे ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।