यूपी में पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला: पुलिस और परिवहन समेत 4 विभागों में लिखित व फिजिकल टेस्ट से पूरी छूट
भारतीय सेना में सेवा पूरी कर चुके युवाओं के सुरक्षित भविष्य को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में पूर्व अग्निवीरों के समायोजन से जुड़ी सेवा नियमावली में व्यापक संशोधनों को हरी झंडी दे दी गई है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब सैन्य सेवा से लौटने वाले जांबाज जवानों को उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख वर्दीधारी विभागों की सीधी भर्ती प्रक्रियाओं में लिखित परीक्षा और कड़े शारीरिक दक्षता परीक्षण (फिजिकल टेस्ट) से नहीं गुजरना होगा। सेना की कठिन ट्रेनिंग और अनुशासन को आधार मानते हुए सरकार ने इन दोनों चरणों से पूर्ण मुक्ति दे दी है, जिससे उनके लिए प्रदेश में सरकारी नौकरी की राह बेहद सुगम हो गई है।
पुलिस, वन, जेल और परिवहन विभाग में सीधी एंट्री का रास्ता साफ
कैबिनेट की मंजूरी के अनुसार यह ऐतिहासिक छूट उत्तर प्रदेश पुलिस, वन विभाग, कारागार (जेल वार्डर) और परिवहन विभाग की सीधी भर्तियों में लागू की गई है। अब तक इन महकमों में सिपाही या समकक्ष पदों पर चयन के लिए अभ्यर्थियों को पहले विस्तृत लिखित परीक्षा और फिर कई चरणों वाले फिजिकल टेस्ट (दौड़, ऊंची कूद आदि) को पास करना अनिवार्य होता था। सरकार के नए फैसले के बाद पूर्व अग्निवीरों को इन दोनों ही कठिन प्रक्रियाओं से छूट दे दी गई है। इन चारों विभागों में आवेदन करने वाले पूर्व अग्निवीरों का चयन अब केवल मानक स्वास्थ्य परीक्षण (मेडिकल टेस्ट) और मूल शैक्षिक व सेवा दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर किया जाएगा।
20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और आयु सीमा में 3 साल की विशेष छूट
लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट देने के साथ ही योगी सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए इन चारों विभागों के कुल पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण की पुख्ता व्यवस्था भी लागू कर दी है। अभ्यर्थियों को उनकी मूल सामाजिक श्रेणी (सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी) के अनुसार इस आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त सेना में चार वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद आयु सीमा के कारण कोई युवा अवसर से वंचित न रह जाए, इसके लिए अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की शिथिलता प्रदान की गई है। इसके तहत सामान्य भर्ती की अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष को बढ़ाकर पूर्व अग्निवीरों के लिए 28 वर्ष निर्धारित कर दिया गया है। इस अतिरिक्त समय सीमा से युवाओं को सेवा निवृत्ति के तुरंत बाद बिना किसी दबाव के आवेदन का अवसर मिलेगा।
सैन्य अनुशासन और ट्रेनिंग का राज्य की कानून-व्यवस्था को सीधा लाभ
परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत प्रशिक्षित युवा शारीरिक और मानसिक रूप से पहले से ही अत्यधिक दक्ष होते हैं। उन्हें हथियारों के संचालन, आपदा प्रबंधन और सख्त सैन्य अनुशासन का व्यापक व्यावहारिक अनुभव होता है। ऐसे युवाओं को पुलिस थानों, जेलों की सुरक्षा व्यवस्था, जंगलों की निगरानी और परिवहन निगम के प्रवर्तन दलों में तैनात करने से प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को अत्यधिक मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही नए रंगरूटों को दी जाने वाली बुनियादी शारीरिक ट्रेनिंग पर लगने वाले सरकारी समय और संसाधनों की भी भारी बचत होगी।
देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल बना उत्तर प्रदेश का मॉडल
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम देश के उन लाखों नौजवानों के मनोबल को बढ़ाएगा जो भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में अग्निवीर के रूप में देश सेवा का सपना देख रहे हैं। सेना से बाहर आने के बाद रोजगार की अनिश्चितता को पूरी तरह समाप्त करने वाला यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर साबित हो रहा है। कैबिनेट के इस फैसले के बाद संबंधित विभागों ने अपनी भर्ती नियमावलियों में त्वरित संशोधन की प्रशासनिक अधिसूचना जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि आगामी भर्ती विज्ञापनों में पूर्व अग्निवीरों को इन सभी विशेष रियायतों का सीधा लाभ तत्काल प्रभाव से मिल सके।