यूपी में 12 अक्टूबर से शुरू होगी धान खरीद: 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं की आर्थिक समृद्धि और उनकी फसलों के उचित मूल्य को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में धान और श्री अन्न (मोटे अनाज) की सरकारी खरीद नीति को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। सरकार ने इस वर्ष राज्यभर में कुल 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष के रिकॉर्ड 62 लाख मीट्रिक टन से भी अधिक है। इस बार खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किसानों को उनकी फार्मर आईडी (एग्रीस्टैक पहचान पत्र) के आधार पर सीधे क्रय केंद्रों से जोड़ा गया है और उपज की तौल के 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिमी और पूर्वी यूपी में धान खरीद का अलग-अलग शेड्यूल
राज्य के भौगोलिक विस्तार और फसल पकने के अलग-अलग समय को देखते हुए सरकार ने धान खरीद को दो चरणों में विभाजित किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभागों—मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ और झांसी में धान की खरीद 12 अक्टूबर से शुरू होकर 15 फरवरी तक संचालित की जाएगी। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के तीन प्रमुख धान उत्पादक जिलों हरदोई, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में भी 12 अक्टूबर से ही क्रय केंद्र क्रियाशील हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर पूर्वी उत्तर प्रदेश के संभागों—चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर और प्रयागराज के साथ लखनऊ संभाग के शेष जिलों लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव में धान खरीद 1 नवंबर से प्रारंभ होकर 28 फरवरी तक चलेगी।
समर्थन मूल्य में वृद्धि और 4500 क्रय केंद्रों का जाल
केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी की गई है। सामान्य धान का समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-ए धान का मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। प्रदेश के खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार कुल 8 प्रमुख क्रय एजेंसियों के माध्यम से राज्यभर में 4,500 क्रय केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी परिषद, एफपीओ, एनसीसीएफ, नैफेड और एफसीआई शामिल हैं। क्रय केंद्रों पर बोरी की कमी न हो, इसके लिए प्राथमिक स्तर पर 80 हजार से अधिक बोरे तुरंत उपलब्ध कराए गए हैं और चरणबद्ध तरीके से 12 लाख से अधिक बोरों की खेप मंडियों में पहुंचाई जा रही है।
श्री अन्न (मोटा अनाज) की खरीद के लिए 31 दिसंबर की डेडलाइन तय
धान के साथ-साथ योगी कैबिनेट ने पौष्टिक और पर्यावरण-अनुकूल मोटे अनाजों यानी 'श्री अन्न' को बढ़ावा देने के लिए भी समय-सीमा और लक्ष्य तय कर दिए हैं। प्रदेश में मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद का संचालन 31 दिसंबर तक कराने का निर्णय लिया गया है। मोटे अनाज की खरीद के लिए जिलों का विशेष वर्गीकरण किया गया है, जिसके तहत बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर देहात, कन्नौज और ललितपुर समेत 25 जिलों में मक्के की खरीद होगी। वहीं पश्चिमी और मध्य यूपी के 33 जिलों में बाजरे के लिए 300 विशेष क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जबकि बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी समेत 13 जिलों में ज्वार की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाएगी।
ई-पॉप डिवाइस से बायोमीट्रिक सत्यापन और हेल्पलाइन की सुविधा
खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों और फर्जीवाड़े को पूरी तरह समाप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ परचेज (ई-पॉप) मशीनों का उपयोग अनिवार्य किया गया है। किसान का अंगूठा लगवाकर बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही तौल की पर्ची कटेगी। अब तक लगभग 14 हजार से अधिक किसान पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों के पास भारत सरकार की एग्रीस्टैक फार्मर आईडी मौजूद है, उन्हें दोबारा जटिल पंजीकरण से छूट दी गई है। किसानों की किसी भी समस्या, भुगतान में देरी या केंद्र पर तौल संबंधी शिकायत के त्वरित समाधान के लिए खाद्य विभाग ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-1800-150 जारी किया है, जहां किसान सीधे अपनी बात रख सकते हैं।