कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने पूर्व महासचिव चंपत राय पर फोड़ा ठीकरा, बोले— 'उनकी शिथिलता से आया यह संकट'

कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने पूर्व महासचिव चंपत राय पर फोड़ा ठीकरा, बोले— 'उनकी शिथिलता से आया यह संकट'

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दानपात्रों से हुई करोड़ों रुपये की चोरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर की रार अब खुलकर सामने आ गई है। ट्रस्ट से इस्तीफा दे चुके निवर्तमान महासचिव चंपत राय पर अब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी ने बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंदिर में हुई इस ऐतिहासिक चोरी और लचर सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ठीकरा चंपत राय की शिथिल कार्यपद्धति पर फोड़ दिया है। स्वामी गोविंददेव गिरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चंपत राय ने कार्यों का विकेंद्रीकरण करने के बजाय सब कुछ खुद संभालने की कोशिश की और अपने व्यक्तिगत ड्राइवर पर अंधविश्वास किया, जिसकी वजह से निगरानी तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया और रामभक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंची।

ड्राइवर पर अंधविश्वास और शिथिल कार्यपद्धति ने डुबोया: अनदेखी करने की आदत पड़ी भारी

एक विशेष बातचीत के दौरान स्वामी गोविंददेव गिरी ने चंपत राय की प्रशासनिक खामियों को उजागर करते हुए कहा कि जब राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन का काम इतने बड़े पैमाने पर फैला हुआ था, तब व्यवस्थाओं को प्रोफेशनल हाथों में सौंपने के बजाय चंपत जी सब कुछ खुद नियंत्रित करना चाहते थे।

उन्होंने अपने निजी ड्राइवर पर बेइंतिहा भरोसा कर लिया, जो बाद में इस बड़े संकट का कारण बना। कोषाध्यक्ष ने खुलासा किया कि इस महा-घोटाले और चोरी के सामने आने से पहले भी ट्रस्ट के भीतर इस लचर व्यवस्था को लेकर कई बार गंभीर बातें उठी थीं, लेकिन चंपत राय ने हमेशा इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया। उन्हें लगता था कि सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा, और उनकी इसी असावधानी व शिथिलता ने आज राम मंदिर को इस विवाद के चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।

जब तक धन कोष में नहीं आता, मेरी जिम्मेदारी नहीं: प्रोफेशनल मैनेजमेंट के लिए अब नियुक्त होगा नया CEO

ट्रस्ट के वित्तीय ढांचे और अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर स्थिति साफ करते हुए कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने कहा कि मंदिर के भीतर रखे दानपात्रों और वहां सीधे आने वाले चढ़ावे की देखरेख की प्राथमिक जिम्मेदारी ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की थी। कोषाध्यक्ष होने के नाते उनका दायित्व केवल उस धन को संभालना और उसका सही ऑडिट रखना है जो आधिकारिक रूप से मुख्य बैंक कोष (ट्रेजरी) में जमा हो चुका हो। कोष में आने से पहले की पूरी प्रक्रिया उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थी।

उन्होंने स्वीकार किया कि चढ़ावे की गिनती और उसकी सुरक्षा का काम कड़े अनुशासन और प्रोफेशनल्स का है, जिसमें भारी चूक हुई है। इस व्यवस्था को भविष्य में फूलप्रूफ बनाने के लिए अब ट्रस्ट द्वारा एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके लिए तीन सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जो जल्द ही तीन योग्य प्रोफेशनल्स के नाम ट्रस्ट के सामने रखेगी, जिनमें से एक का चयन सीईओ के पद पर किया जाएगा।

रामभक्तों की श्रद्धा पर गहरा प्रहार: दोषियों को मिलेगा कड़ा दंड, लेकिन हिंदू समाज में फूट नहीं होने देंगे

स्वामी गोविंददेव गिरी ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि दान पेटी में लगी यह सेंध कोई साधारण चोरी नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों के अंतःकरण और उनकी अटूट श्रद्धा पर एक बहुत गहरा प्रहार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर हर एक अपराधी को सख्त से सख्त कानूनी दंड दिलवाया जाएगा और इसमें पूरा न्याय होगा।

हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने समाज से अपील की कि इस विवाद को लेकर हमें इतना भी उग्र या प्रभावित नहीं हो जाना चाहिए जिससे हिंदू समाज या रामभक्तों के बीच किसी भी प्रकार की आपसी फूट पैदा हो। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के प्रति जो वैश्विक श्रद्धा भाव है, उसे हम किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देंगे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को बदलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैंक एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान है, किसी एक व्यक्ति की भूल के कारण वे पूरी संस्था को लांछित नहीं करना चाहते, लेकिन चूक को सुधारा जरूर जाएगा।