अमित शाह ने लखनऊ से क्यों दिलाई मुलायम सिंह और 1990 की याद? 2027 के लिए कर दिया बड़ा ऐलान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सियासी गलियारे में उस वक्त सरगर्मी सातवें आसमान पर पहुंच गई, जब भारतीय जनता पार्टी की नवगठित प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक के मंच से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के रोडमैप और मिशन-2027 की रूपरेखा तय करने के मकसद से आयोजित इस महाबैठक में अमित शाह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया। शाह के भाषण के तीखे तेवर और सपा के सियासी इतिहास पर किए गए प्रहार ने साफ कर दिया कि भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी तीसरी पारी सुनिश्चित करने के लिए आक्रामक पिच पर उतर चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और संगठन के तीन हजार से अधिक वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में शाह ने विपक्ष के हौसलों पर राजनीतिक हथौड़ा चलाते हुए दो-टूक शब्दों में कहा कि अखिलेश बाबू, अब उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी का सपना देखना पूरी तरह छोड़ दीजिए।
'अखिलेश बाबू, सरकार बनाने का सपना भूल जाइए': शाह ने क्यों दिलाई नेताजी मुलायम की याद?
कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकते हुए गृह मंत्री ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की राजनीतिक कमजोरियों को कुरेदने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने मंच से गरजते हुए कहा कि अखिलेश बाबू, उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का सपना आप हमेशा के लिए भूल जाइए। शाह ने सपा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुलायम सिंह यादव की याद दिलाते हुए अखिलेश से कहा कि आपकी सरकार प्रदेश में तब बनी थी, जब आपके पीछे और आपके सिर पर आपके पिता मुलायम सिंह यादव का हाथ और उनका विशाल जनाधार था।
शाह ने चुनावी आंकड़ों की नजीर पेश करते हुए कहा कि जब से अखिलेश यादव ने पार्टी की पूरी कमान अपने हाथों में संभाली है, तब से समाजवादी पार्टी एक भी बड़ा चुनाव अपने दम पर जीतने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों के नतीजों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि जिस तरह राहुल गांधी के कमान संभालने के बाद कांग्रेस लगातार पराजय की ओर बढ़ी, ठीक वही हश्र अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी का हुआ है। शाह ने चुटकी लेते हुए कहा कि यदि इन दोनों नेताओं का यही राजनीतिक रवैया और दिशाहीन राजनीति जारी रही, तो ये पार्टियां अगले 30 वर्षों तक भी सत्ता में लौटने का स्वाद नहीं चख पाएंगी।
30 अक्टूबर की तारीख और 1990 की गोलीबारी: कारसेवकों का जिक्र कर घेरा
अमित शाह के भाषण का सबसे भावनात्मक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हिस्सा वह रहा, जब उन्होंने आज की तारीख यानी 30 अक्टूबर का ऐतिहासिक संदर्भ उठाया। उन्होंने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार में निहत्थे कारसेवकों पर चलाई गई गोलियों का मुद्दा फिर से जिंदा कर दिया। शाह ने कहा कि आज 30 अक्टूबर का वही दिन है जब सरयू का किनारा और अयोध्या की गलियां रामभक्तों के खून से रंग दी गई थीं।
गृह मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव और उनकी पूरी कंपनी को शायद यह गलतफहमी हो गई है कि उत्तर प्रदेश की जनता और रामभक्त उस निर्मम घटना को भूल चुके हैं। शाह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अखिलेश बाबू, जनता उस अत्याचार को न भूली है और न ही आपको कभी माफ करने वाली है। उन्होंने याद दिलाया कि जिस अयोध्या में रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां बरसाई गई थीं, उसी पावन धरती पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा होकर करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र बन चुका है।
'सपा ने अपनी गरीबी मिटाई, मोदी ने 25 करोड़ गरीबों को उबारा': योजनाओं पर सीधा वार
अखिलेश यादव द्वारा लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और गरीब-कल्याण के दावों पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने सपा के पांच साल के कार्यकाल का पाई-पाई का हिसाब मांगा। उन्होंने कहा कि अखिलेश बाबू हमेशा मंचों पर खड़े होकर गरीबों और वंचितों की बातें करते हैं, लेकिन उन्हें प्रदेश की जनता को यह सच बताना चाहिए कि जब वे 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने गरीबों के लिए धरातल पर क्या किया।
शाह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में गरीबों की गरीबी दूर नहीं हुई, बल्कि सत्ता में बैठे एक खास परिवार और पार्टी के चहेते सिंडिकेट ने केवल अपनी निजी गरीबी दूर की और खजाने भरे। इसके विपरीत, केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार ने बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी रेखा से बाहर निकालने का ऐतिहासिक काम किया है। उन्होंने मुफ्त राशन, पक्के आवास, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज का ब्योरा देते हुए कहा कि गरीब के घर तक असली विकास भाजपा की डबल इंजन सरकार ने पहुंचाया है।
2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनी तो लागू होगा यूसीसी: लखनऊ से हुआ सबसे बड़ा ऐलान
लखनऊ के इस मंच से गृह मंत्री अमित शाह ने एक ऐसा नीतिगत ऐलान भी कर दिया, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी है। उन्होंने साफ शब्दों में घोषणा की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जब उत्तर प्रदेश की देवतुल्य जनता भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत देकर तीसरी बार सरकार बनाएगी, तो प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को पूरी तरह से लागू किया जाएगा।
शाह ने कहा कि उत्तराखंड के बाद उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यूसीसी का क्रियान्वयन सामाजिक न्याय और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दल दशकों तक वोट बैंक के डर से ऐसे कड़े फैसले लेने से बचते रहे, लेकिन भाजपा राष्ट्रीय एकता और सभी नागरिकों की समानता के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने देश को 31 दिसंबर 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को भी कार्यसमिति के सामने दोहराया।
माफियाराज का खात्मा और अपराध के आंकड़ों पर योगी मॉडल की पीठ थपथपाई
अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' क्राइम मॉडल की जमकर तारीफ की और आंकड़ों के साथ साबित किया कि कैसे पिछले दस वर्षों में यूपी की तस्वीर और तकदीर बदली है। शाह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सत्ता संभालने के बाद कठोर प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए उत्तर प्रदेश को माफिया, गुंडों और संगठित सिंडिकेट के चंगुल से हमेशा के लिए मुक्त कर दिया।
आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने बताया कि सपा शासन की तुलना में भाजपा राज में प्रदेश में डकैती की घटनाओं में 80 फीसदी, लूट की वारदातों में 74 फीसदी, सांप्रदायिक दंगों में 70 फीसदी और व्यापारियों से होने वाली रंगदारी के मामलों में 60 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जब कानून का राज कायम हुआ, तो गुंडों का खौफ खत्म हुआ; इसका सीधा असर यह हुआ कि देश-विदेश के उद्योगपति यूपी में निवेश करने लगे। आज प्रदेश में 35 हजार से अधिक बड़े कारखाने और औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है और पलायन पर पूरी तरह ब्रेक लग चुका है।
'देर कर दी मेहरबां आते-आते': अखिलेश यादव का पलटवार और 2027 का सियासी घमासान
अमित शाह के इन तीखे हमलों पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी तुरंत मोर्चा खोलते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पलटवार किया। शाह द्वारा यूपी में सरकार बनने पर यूसीसी लागू करने के बयान पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने फिल्मी अंदाज में कहा कि 'बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते'। उन्होंने हालिया विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए दावा किया कि भाजपा जनता के बीच अपना आधार तेजी से खो रही है और उसकी हताशा अब बयानों में झलकने लगी है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि 10 साल सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा के पास पेपर लीक, बंद होते सरकारी स्कूल और बेरोजगारी का कोई जवाब नहीं है।
लखनऊ में दोनों दिग्गज नेताओं के बीच हुई इस तीखी जुबानी जंग ने साफ संकेत दे दिया है कि उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनावी रण का बिगुल बज चुका है। एक तरफ जहां भाजपा अपने कल्याणकारी कार्यों, राम मंदिर निर्माण, कानून-व्यवस्था के रिकॉर्ड और यूसीसी के वादे के साथ मैदान में उतरने को तैयार है, वहीं समाजवादी पार्टी भी पीडीए और बेरोजगारी के मुद्दों पर सत्तापक्ष को घेरने की पूरी कोशिश में जुटी है।