ट्रंप ने जिसे चुनावी रैली में कहा था 'जिहादी', वही बने अमेरिकी सीनेट के पहले मुस्लिम सांसद: मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल अल-सईद ने रचा इतिहास

ट्रंप ने जिसे चुनावी रैली में कहा था 'जिहादी', वही बने अमेरिकी सीनेट के पहले मुस्लिम सांसद: मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल अल-सईद ने रचा इतिहास

वाशिंगटन/डेट्रायट: संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections) में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के साथ ही देश के संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे हमलों और आक्रामक बयानों के केंद्र में रहे प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक उम्मीदवार डॉ. अब्दुल अल-सईद (Abdul El-Sayed) ने मिशिगन राज्य की हाई-प्रोफाइल सीनेट सीट पर शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही 41 वर्षीय अब्दुल अल-सईद 237 वर्षों के अमेरिकी इतिहास में संसद के उच्च सदन यानी यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट (US Senate) में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सांसद बन गए हैं।

अब्दुल अल-सईद ने रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज उम्मीदवार और प्रतिनिधि सभा की खुफिया समिति के पूर्व अध्यक्ष माइक रोजर्स (Mike Rogers) को कड़े मुकाबले में पराजित किया। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-सईद की धार्मिक पहचान और पृष्ठभूमि को लेकर कई विवादित और आक्रामक टिप्पणियां की थीं, लेकिन मिशिगन के मतदाताओं ने इन बयानों को दरकिनार करते हुए अल-सईद के पक्ष में ऐतिहासिक जनादेश दिया।

ट्रंप ने चुनावी रैली में क्या कहा था?

मध्यावधि चुनाव के मतदान से ठीक दो दिन पहले आयोवा (Iowa) में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल-सईद पर सीधा हमला बोला था। ट्रंप ने अपने भाषण में खुले तौर पर उन्हें 'जिहादी' करार दिया था।

ट्रंप ने रैली में उपस्थित भीड़ से कहा था:

"यदि आप इस जिहादी पागल (Jihadist Lunatic) को वोट देते हैं जो आपको तबाह करना चाहता है, तो आप पूरी तरह पागल हैं। माइक रोजर्स असली 'एपल पाई' (पारंपरिक अमेरिकी) हैं। और जानते हैं कि इस देश को क्या चाहिए? थोड़ा एपल पाई। हमें कम्युनिस्टों, जिहादियों या मुस्लिम ब्रदरहुड की जरूरत नहीं है, हमें रोजर्स जैसे लोगों की जरूरत है।"

इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी तंज कसा था कि यदि अब्दुल अल-सईद चुनाव जीतकर सीनेट में पहुंचते हैं, तो संसद को उनके लिए 'एक विशेष मेटल डिटेक्टर' लगाना पड़ेगा।

कौन हैं अब्दुल अल-सईद? डॉक्टर से ऐतिहासिक सीनेटर बनने का सफर

अब्दुल अल-सईद का जन्म मिशिगन में हुआ था; उनके माता-पिता मिस्र (Egypt) से आकर अमेरिका में बसे थे। वे एक जाने-माने चिकित्सक (Medical Doctor), जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ और लेखक हैं:

  • शिक्षा: उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय से स्नातक, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से रोड्स स्कॉलर (Rhodes Scholar) के रूप में पब्लिक हेल्थ में पीएचडी और कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री (MD) प्राप्त की।

  • डेट्रायट हेल्थ कमिश्नर: महज 30 वर्ष की उम्र में वे डेट्रायट शहर के स्वास्थ्य विभाग के सबसे युवा हेल्थ डायरेक्टर (हेल्थ कमिश्नर) नियुक्त किए गए थे, जहां उन्होंने गरीब और कामकाजी वर्ग के स्वास्थ्य संकट को दूर करने के लिए उल्लेखनीय काम किया।

  • राजनीतिक सफर: 2018 में उन्होंने मिशिगन के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी लड़ी थी, जहां उन्हें बर्नी सैंडर्स और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ (AOC) जैसे प्रगतिशील नेताओं का खुला समर्थन मिला था।

जीत के बाद अब्दुल अल-सईद का बयान: "नफरत की राजनीति पर उम्मीद की जीत"

सीनेट चुनाव में जीत पक्की होने के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए डॉ. अब्दुल अल-सईद ने ट्रंप का नाम लिए बिना विभाजनकारी राजनीति पर तीखा प्रहार किया:

"आज मिशिगन की जनता ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र डर, नफरत और संकीर्णता से नहीं, बल्कि एकता, बेहतर स्वास्थ्य और कामकाजी परिवारों के अधिकारों से चलता है। मुझे अपनी आस्था और अपनी पहचान पर गर्व है, लेकिन मैं सीनेट में हर उस नागरिक की आवाज बनूंगा, चाहे उसने मुझे वोट दिया हो या न दिया हो। यह जीत उन सभी के मुंह पर तमाचा है जो धर्म और नस्ल के नाम पर अमेरिकियों को बांटना चाहते थे।"

अमेरिकी सीनेट में क्यों अभूतपूर्व है यह जीत?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में पहले से ही कीथ एलिसन (2007), आंद्रे कार्सन, इल्हान उमर और रशीदा तलीब जैसे मुस्लिम सांसद प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। लेकिन 100 सदस्यों वाले उच्च सदन यानी सीनेट (Senate) का दरवाजा अब तक किसी भी मुस्लिम अमेरिकी के लिए नहीं खुला था।

अब्दुल अल-सईद की यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि:

  1. डेमोक्रेट्स का बहुमत सुरक्षित रखा: मिशिगन की यह ओपन सीट जीतना डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए सीनेट में नियंत्रण हासिल करने के लिहाज से सबसे अनिवार्य सीटों में से एक थी।

  2. अरब और मुस्लिम समुदाय का समर्थन: मिशिगन में (विशेषकर डियरबॉर्न और वेन काउंटी) अरब और मुस्लिम अमेरिकियों की खासी आबादी है। गाजा और मध्य-पूर्व नीति को लेकर डेमोक्रेट्स से नाराज चल रहे इस वर्ग ने अल-सईद के समर्थन में रिकॉर्ड मतदान किया।

  3. स्वास्थ्य और न्यूनतम वेतन का एजेंडा: अल-सईद ने स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता करने, दवाइयों की कीमतें घटाने और श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को बढ़ाने के मुद्दे पर अभियान चलाया, जिसने राज्य के श्वेत कामकाजी मतदाताओं को भी उनके पक्ष में एकजुट किया।

अब्दुल अल-सईद की जीत ने न केवल अमेरिकी सीनेट में विविधता का एक नया इतिहास रचा है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि आक्रामक निजी हमलों के बावजूद जमीनी मुद्दों पर लड़ा गया चुनाव ध्रुवीकरण की राजनीति को मात देने में सक्षम है।