अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हेलिकॉप्टर 'मरीन वन' हवा में हादसे से बाल-बाल बचा, यात्री विमान से हुई महज कुछ ही दूरी; FAA ने शुरू की जांच

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हेलिकॉप्टर 'मरीन वन' हवा में हादसे से बाल-बाल बचा, यात्री विमान से हुई महज कुछ ही दूरी; FAA ने शुरू की जांच

अमेरिकी राजनीति से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है जहां देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आधिकारिक हेलिकॉप्टर 'मरीन वन' एक बड़े विमान हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गया। वाशिंगटन के ऊपर उड़ान भर रहे इस हेलिकॉप्टर के बेहद करीब अचानक एक यात्री विमान आ गया, जिससे एविएशन सेक्टर में हड़कंप मच गया है। दोनों विमानों के बीच की दूरी इतनी कम रह गई थी कि इसे गंभीर सुरक्षा चूक माना जा रहा है। इस पूरी घटना की गंभीरता को देखते हुए फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड ने तत्काल प्रभाव से उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।

कैसे हुआ यह खतरनाक वाकया और क्या थे आंकड़े

यह घटना दोपहर के वक्त उस समय घटी जब राष्ट्रपति ट्रंप वाइट हाउस से 'मरीन वन' के जरिए एंड्रयूज एयर फोर्स बेस जा रहे थे, जहां से उन्हें कैलिफोर्निया के लिए रवाना होना था। उसी दौरान रोनाल्ड रीगन वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से अमेरिकन एयरलाइंस की सब्सिडियरी कंपनी एन्वाय एयर के एक यात्री विमान ने भी उड़ान भरी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच की होरिजेंटल दूरी मात्र 0.8 मील और वर्टिकल दूरी सिर्फ 700 फीट ही रह गई थी, जबकि सुरक्षा मानकों के अनुसार यह दूरी काफी अधिक होनी चाहिए थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के साथ संपर्क में हुई तकनीकी गड़बड़ी और स्पष्ट संदेश न पहुंच पाने के कारण यह खतरनाक स्थिति उत्पन्न हुई थी।

व्हाइट हाउस का बयान और पुरानी दर्दनाक यादें

इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद व्हाइट हाउस और अमेरिकी मरीन कॉर्प्स ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं था और हेलिकॉप्टर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पायलटों द्वारा उड़ाया जा रहा था। हालांकि, इस घटना ने पिछले साल जनवरी 2025 में रोनाल्ड रीगन एयरपोर्ट के पास हुए उस भीषण हादसे की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें एक आर्मी हेलिकॉप्टर और यात्री विमान की टक्कर में 67 लोगों की जान चली गई थी। इस नए वाकये के बाद एक बार फिर अमेरिकी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।