धनतेरस से पहले चांदी ने दिया बड़ा झटका: आसमान छूते दामों से खरीदारों के छूटे पसीने
नई दिल्ली: धनतेरस और दिवाली के पावन त्योहार से ठीक पहले सोने और चांदी की खरीदारी की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं और निवेशकों को सराफा बाजार ने बड़ा झटका दिया है। भारतीय परंपरा में धनतेरस के दिन चांदी के सिक्के, बर्तन और आभूषण खरीदना अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक माना जाता है, लेकिन इस बार त्योहार से ऐन पहले चांदी की कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी ने खरीदारों के बजट को बुरी तरह बिगाड़ दिया है। वैश्विक कमोडिटी बाजारों में आई तेजी, औद्योगिक मांग में निरंतर उछाल और घरेलू त्योहारी मांग के चलते राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश और बिहार के खुदरा सराफा बाजारों में चांदी के दाम छलांग लगाते हुए ₹2,00,000 से लेकर ₹2,20,000 प्रति किलोग्राम के स्तर के आसपास पहुंच गए हैं। इस अचानक हुई मूल्यवृद्धि से स्थानीय सराफा बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ गई है और वे अपनी खरीदारी सूची को घटाने पर विचार करने लगे हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चांदी का हाल: ₹2 लाख प्रति किलो के पार पहुंचे भाव
देश के सबसे बड़े थोक और खुदरा सराफा केंद्र दिल्ली में धनतेरस से पहले चांदी के भाव में कड़े तेवर देखने को मिल रहे हैं। दिल्ली के चांदनी चौक, कूचा महाजनी और करोल बाग जैसे ऐतिहासिक आभूषण बाजारों में 999 शुद्धता वाली फाइन चांदी की कीमतें ₹2,00,000 से लेकर ₹2,16,900 प्रति किलोग्राम के दायरे में दर्ज की जा रही हैं। खुदरा बाजार में 10 ग्राम चांदी का भाव लगभग ₹2,000 से ₹2,169 के आसपास बना हुआ है। दिल्ली बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के व्यापारियों के अनुसार, जब ग्राहक आभूषण या चांदी के बर्तन बनवाते हैं, तो इस बेस प्राइस के ऊपर 3 प्रतिशत का वस्तु एवं सेवा कर (GST) और 5 से 10 प्रतिशत तक का मेकिंग चार्ज (घड़ाई शुल्क) अतिरिक्त जुड़ जाता है। इसके चलते चांदी के सिक्कों और बर्तनों का अंतिम खुदरा बिल खरीदारों की जेब पर भारी पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में भी रेट चढ़े हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के बाजारों में चांदी की चमक तेज: लखनऊ, कानपुर और मेरठ में भारी उछाल
उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक शहरों—राजधानी लखनऊ, औद्योगिक नगरी कानपुर, वाराणसी और मेरठ के सराफा बाजारों में भी चांदी की ऊंची कीमतों का सीधा असर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 1 किलोग्राम रिफाइंड चांदी की बेंचमार्क दरें ₹2,15,000 से ₹2,20,900 प्रति किलो के उच्च स्तर पर कारोबार कर रही हैं। लखनऊ के चौक और अमीनाबाद बाजारों में धनतेरस के अवसर पर आमतौर पर लक्ष्मी-गणेश की चांदी की मूर्तियों, सिक्कों और पूजा की थालियों की सबसे ज्यादा बिक्री होती है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार चांदी का भाव काफी ऊपर होने के कारण ग्राहक वजन में कटौती कर रहे हैं। जो ग्राहक पहले 50 या 100 ग्राम के चांदी के सिक्के या कलश खरीदते थे, वे अब 10 से 20 ग्राम के हल्के सिक्कों या केवल प्रतीकात्मक पूजन सामग्री की मांग कर रहे हैं ताकि परंपरा भी पूरी हो जाए और घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े।
बिहार के सराफा बाजार का मिजाज: पटना, गया और मुजफ्फरपुर में बढ़ी कीमतें
बिहार के प्रमुख आभूषण बाजारों में भी धनतेरस से पहले चांदी की महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। राजधानी पटना के बाकरगंज सराफा बाजार, मुजफ्फरपुर और गया के खुदरा बाजारों में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत ₹1,95,000 से लेकर ₹2,10,000 प्रति किलो के स्तर पर दर्ज की जा रही है। बिहार में धनतेरस के साथ-साथ लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के लिए भी लोग बड़े पैमाने पर चांदी के बर्तन, कटोरे और आचमनी खरीदते हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि कीमतों में आई इस तेज उछाल ने त्योहार का उत्साह थोड़ा फीका कर दिया है। पटना के आभूषण विक्रेताओं का मानना है कि ऊंची कीमतों के बावजूद शुभ मुहूर्त में शगुन की खरीदारी के लिए लोग आ रहे हैं, लेकिन भारी वजन वाले उत्पादों की जगह हल्के आभूषणों और चांदी के पतले नोटों की मांग ज्यादा देखी जा रही है।
आखिर धनतेरस से पहले चांदी में क्यों आई इतनी जबर्दस्त तेजी?
कमोडिटी और वित्तीय बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि चांदी केवल एक सजावटी या आभूषण धातु नहीं है, बल्कि यह एक प्रमुख औद्योगिक कच्चा माल भी है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी, सोलर पैनल निर्माण, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी की खपत ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है। दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में हो रहे बदलावों के कारण वैश्विक खदानों से जितनी चांदी की आपूर्ति हो रही है, उसकी तुलना में औद्योगिक मांग कहीं ज्यादा है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति के दबाव और अमेरिकी डॉलर व ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव के बीच बड़े संस्थागत निवेशक और हेज फंड्स चांदी को एक सुरक्षित निवेश मानकर इसमें भारी पूंजी निवेश कर रहे हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें चढ़ती हैं, तो भारत जैसे आयातक देश में आयात शुल्क और परिवहन लागत जुड़ने के बाद घरेलू दाम स्वतः ही नए रिकॉर्ड बनाने लगते हैं।
धनतेरस पर खरीदारी करने वालों के लिए जरूरी सावधानियां और गाइडेंस
त्योहारी सीजन में चांदी की ऊंची कीमतों के बीच ग्राहकों को खरीदारी करते समय विशेष रूप से गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। अक्सर देखा जाता है कि जब कीमतें आसमान छूती हैं, तो बाजार में कम शुद्धता वाली या मिलावटी चांदी बेचे जाने की आशंका बढ़ जाती है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुसार, ग्राहकों को हमेशा हॉलमार्क वाली चांदी ही खरीदनी चाहिए। चांदी के आभूषणों और सिक्कों पर 999 (99.9% शुद्ध), 925 (92.5% स्टर्लिंग सिल्वर) या 900 की हॉलमार्किंग और बीआईएस का आधिकारिक लोगो अवश्य देखना चाहिए। इसके अलावा, खरीदारों को पक्के जीएसटी बिल के साथ ही खरीदारी करनी चाहिए, जिसमें चांदी का सटीक वजन, उस दिन का लागू भाव और मेकिंग चार्ज अलग से दर्ज हो। डिजिटल माध्यम से निवेश करने के इच्छुक खरीदार फिजिकल चांदी के बजाय सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) या म्यूचुअल फंड्स के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं, जहां उन्हें मेकिंग चार्ज और लॉकर में रखने की झंझट से पूरी मुक्ति मिल जाती है।
सराफा कारोबारियों की उम्मीदें: क्या धनतेरस के दिन लौटेगी रौनक?
भले ही चांदी के बढ़े हुए भावों ने शुरुआती दौर में खुदरा ग्राहकों को झटका दिया है, लेकिन उत्तर भारत के सर्राफा व्यापारी धनतेरस के मुख्य दिन को लेकर पूरी तरह से निराश नहीं हैं। व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस पर धातु खरीदना भारतीय संस्कृति में सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए आम लोग अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ चांदी अवश्य खरीदते हैं। बाजारों में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स ने मेकिंग चार्ज पर विशेष छूट, आकर्षक एक्सचेंज ऑफर और जीरो-मेकिंग चार्ज वाले चांदी के सिक्कों की पेशकश की है। अब देखना यह होगा कि धनतेरस के शुभ मुहूर्त पर चांदी की यह महंगाई पारंपरिक आस्था पर हावी होती है या फिर खरीदारों का उल्लास इस मूल्यवृद्धि को पीछे छोड़ते हुए बाजारों में एक बार फिर रिकॉर्ड बिक्री की नई कहानी लिखता है।