मिनेसोटा के 5वें जिले से लगातार 5वीं बार बनीं सांसद; PoK दौरा कर पाकिस्तान के सुर में सुर मिला चुकी हैं डेमोक्रेटिक नेत्री

मिनेसोटा के 5वें जिले से लगातार 5वीं बार बनीं सांसद; PoK दौरा कर पाकिस्तान के सुर में सुर मिला चुकी हैं डेमोक्रेटिक नेत्री

वाशिंगटन/मिनियापोलिस: संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections) में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील गुट (The Squad) की प्रमुख और अपने भारत-विरोधी रुख के लिए पहचानी जाने वाली सांसद इल्हान उमर ने एक बार फिर चुनावी बाजी मार ली है। मिनियापोलिस का प्रतिनिधित्व करने वाली मिनेसोटा की 5वीं कांग्रेसनल सीट से इल्हान उमर ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन नागेल को पराजित करते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) के लिए लगातार पांचवीं बार अपनी सदस्यता पक्की की है।

सोमालिया में जन्मीं और शरणार्थी के रूप में अमेरिका पहुंचीं इल्हान उमर अमेरिकी राजनीति में अपनी कट्टर वामपंथी नीतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में लगातार भारत विरोधी एजेंडे को हवा देने के लिए विवादों में रही हैं। उनके इस नए कार्यकाल के साथ ही अमेरिकी संसद के भीतर भारत और मानवाधिकारों को लेकर एक बार फिर तीखी बहसें देखने को मिल सकती हैं।

1. मिनेसोटा में रिपब्लिकन उम्मीदवार को दी शिकस्त

मिनेसोटा का 5वां कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट लंबे समय से डेमोक्रेटिक पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इल्हान उमर ने इस चुनाव में मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, किफायती आवास, जलवायु परिवर्तन और शरणार्थी अधिकारों को केंद्र में रखकर प्रचार किया था। दूसरी ओर, पूर्व स्टेट पेट्रोल ट्रूपर रहे रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन नागेल ने सीमा सुरक्षा, संघीय खर्चों में कटौती और वित्तीय जांचों का मुद्दा उठाया था। हालांकि, मिनियापोलिस के विविध और अप्रवासी बहुल मतदाताओं ने इल्हान उमर के पक्ष में मतदान करते हुए उन्हें संसद में एक और कार्यकाल सौंप दिया।

2. पाकिस्तान का दौरा और PoK जाकर दिया था विवादित बयान

इल्हान उमर और भारत के बीच राजनयिक विवाद की सबसे बड़ी वजह अप्रैल 2022 में उनका किया गया अनधिकृत पाकिस्तान दौरा था।

  • PoK का दौरा: अमेरिकी सांसद के रूप में इल्हान उमर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का दौरा किया था, जो भारतीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन था। वहां उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ मंच साझा किया और जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के नैरेटिव का खुलकर समर्थन किया।

  • इमरान खान से मुलाकात: अपनी इस यात्रा के दौरान उमर ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान से भी गुप्त मुलाकात की थी।

  • भारत का कड़ा विरोध: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इल्हान उमर के PoK दौरे पर बेहद सख्त ऐतराज जताते हुए इसे 'संकीर्ण मानसिकता की राजनीति' करार दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ कहा था कि यदि कोई विदेशी नेता भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करता है, तो वह केवल अपनी ओछी राजनीति को दर्शाता है।

3. अमेरिकी संसद में भारत विरोधी प्रस्ताव और तीखी बयानबाजी

इल्हान उमर केवल दौरों तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) के मंच का इस्तेमाल भी लगातार भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने के लिए किया:

  • सीएए और एनआरसी पर झूठा नैरेटिव: नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर उमर ने अमेरिकी कांग्रेस में भारत के खिलाफ कई बार झूठे दावे किए और इसे एक वर्ग विशेष के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताने की कोशिश की।

  • कश्मीर पर भारत-विरोधी प्रस्ताव: उमर ने अमेरिकी विदेश विभाग से मांग की थी कि जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर एक अलग रिपोर्ट तैयार की जाए।

  • भारतीय नेतृत्व के भाषण का बहिष्कार: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था, तो इल्हान उमर उन मुट्ठी भर वामपंथी सांसदों में शामिल थीं जिन्होंने इस ऐतिहासिक भाषण का बहिष्कार किया था।

4. अमेरिकी राजनीति में भी विवादों से रहा है पुराना नाता

इल्हान उमर का राजनीतिक सफर न केवल विदेश नीति बल्कि घरेलू स्तर पर भी गंभीर विवादों से घिरा रहा है:

  • विदेशी मामलों की समिति से निष्कासन: पूर्व में रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व वाले निचले सदन ने इजरायल और यहूदी समुदाय पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के चलते इल्हान उमर को शक्तिशाली 'हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी' (House Foreign Affairs Committee) से हटा दिया था।

  • जांच और वित्तीय आरोप: उनके अभियान कोष (Campaign Funds) के निजी इस्तेमाल और व्यक्तिगत दस्तावेजों को लेकर भी फेडरल एजेंसियां समय-समय पर जांच करती रही हैं।

5. नई संसद में भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या होगा असर?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की वापसी और इल्हान उमर जैसे प्रगतिशील नेताओं के जीतने के बाद, संसद की मानवाधिकार और विदेश नीति उप-समितियों में दक्षिण एशियाई मामलों पर निगरानी बढ़ सकती है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध रणनीतिक (Quad, रक्षा सौदों और तकनीकी सहयोग) स्तर पर दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों (डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन) के समर्थन पर आधारित हैं। ऐसे में इल्हान उमर जैसे कुछ व्यक्तिगत सांसदों के भारत विरोधी रुख से दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक रिश्तों की दिशा पर कोई गंभीर असर पड़ने की संभावना बेहद कम है।