'रामायण' में सनी देओल के 'महाबली हनुमान' लुक पर सस्पेंस बरकरार: पहले पार्ट के क्लाइमैक्स में होगी रोंगटे खड़े करने वाली एंट्री
मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी और भव्य पैन-इंडिया फिल्म 'रामायण' को लेकर दर्शकों के बीच हर गुजरते दिन के साथ उत्सुकता चरम पर पहुंचती जा रही है। निर्देशक नितेश तिवारी और ऑस्कर विजेता वीएफएक्स कंपनी डीएनईजी (DNEG) के संस्थापक नमित मल्होत्रा के निर्देशन व निर्माण में बन रही इस महागाथा में जहां रणबीर कपूर मर्यादा पुरुषोत्तम 'भगवान श्रीराम', साई पल्लवी 'माता सीता', और यश लंकापति 'रावण' की भूमिका में नजर आएंगे, वहीं सबसे ज्यादा चर्चा और कौतूहल जिस किरदार को लेकर बना हुआ है, वह है भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और शक्ति के प्रतीक 'महाबली हनुमान' का किरदार। बॉलीवुड के एक्शन सुपरस्टार सनी देओल इस महाकाव्य में पवनपुत्र हनुमान का अलौकिक रूप धारण कर रहे हैं। हालांकि, फिल्म के आधिकारिक प्री-प्रोडक्शन और प्रमोशन के बीच मेकर्स ने रणबीर और साई पल्लवी की झलकियों के संकेत भले ही दिए हों, लेकिन सनी देओल के 'हनुमान' अवतार को अब तक सबसे कड़े सुरक्षा घेरे में सीक्रेट रखा गया है। इंडस्ट्री के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर 68 वर्षीय सनी देओल पर्दे पर महाबली के रूप में कैसे दिखेंगे और सिनेमाघरों में जब उनकी पहली एंट्री होगी, तो वह दृश्य कितना भव्य और रोंगटे खड़े कर देने वाला होगा।
रामायण में सनी देओल के 'हनुमान' लुक पर सस्पेंस गहराया: मेकर्स ने क्यों छुपा रखा है महाबली का रूप?
फिल्म से जुड़े करीबी सूत्रों और प्रोडक्शन टीम से छनकर आ रही जानकारियों के अनुसार, मेकर्स ने सनी देओल के लुक को लेकर एक बेहद सख्त 'नो-फोन और नो-लीक' पॉलिसी अपनाई हुई है। दरअसल, पिछली कुछ पौराणिक फिल्मों में वीएफएक्स और आधुनिक तकनीकों के गलत इस्तेमाल के चलते हनुमान जी के चित्रण को लेकर दर्शकों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और भारी विवाद खड़ा हुआ था। नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा इस बात को भली-भांति समझते हैं कि भारतीय जनमानस के हृदय में हनुमान जी की छवि असीम श्रद्धा, पवित्रता और अटूट शक्ति से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि मेकर्स सनी देओल के लुक के साथ कोई भी समझौता नहीं करना चाहते और न ही किसी अधूरे टीजर के जरिए उनकी छवि को समय से पहले सार्वजनिक करना चाहते हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि नमित मल्होत्रा इस लुक को किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर ही एक भव्य वीडियो के साथ सीधे दर्शकों के सामने पेश करेंगे, ताकि लोगों को पहली ही नजर में यह अहसास हो सके कि दारा सिंह के बाद भारतीय सिनेमा को उनका सच्चा और प्रामाणिक हनुमान मिल चुका है।
पार्ट-1 के क्लाइमैक्स में होगी महाबली की धांसू एंट्री: राम-हनुमान मिलन से थिएटर्स में गूंजेगी जय-जयकार
'रामायण: पार्ट-1' की कहानी की संरचना को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले भाग में सनी देओल का स्क्रीन टाइम भले ही लगभग 12 से 15 मिनट का सीमित रखा गया है, लेकिन उनकी एंट्री ही पूरी फिल्म का सबसे बड़ा हाई-पॉइंट और इमोशनल क्लाइमैक्स होगी। पटकथा के अनुसार, पहले भाग की मुख्य कहानी भगवान राम के बाल्यकाल, स्वयंवर, वनवास और अंत में माता सीता के हरण के इर्द-गिर्द घूमेगी। जब भगवान राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में व्याकुल होकर ऋष्यमूक पर्वत और किष्किंधा के जंगलों में भटक रहे होंगे, ठीक उसी समय फिल्म के आखिरी 15 मिनट में महाबली हनुमान का प्राकट्य होगा। शुरुआत में एक विप्र (ब्राह्मण) के भेष में श्रीराम की परीक्षा लेना और फिर जब भगवान राम अपनी पहचान बताएंगे, तो हनुमान जी का अपने वास्तविक, विशाल और दिव्य वानर रूप में प्रकट होकर प्रभु के चरणों में गिर जाना—यह वह दृश्य होगा जिसे देखकर सिनेमाघरों में तालियों और 'जय श्री राम' के जयकारों की गूंज सुनाई देगी। यह दृश्य दर्शकों को भाव-विभोर करते हुए सीधे पार्ट-2 के उस महायुद्ध की ओर ले जाएगा जहां हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने से लेकर लंका दहन तक का महापराक्रम दिखाएंगे।
दारा सिंह के बाद सनी देओल बनेंगे आधुनिक युग के हनुमान: भारी-भरकम कद-काठी और रूहानी भक्ति का संगम
रामानंद सागर के ऐतिहासिक धारावाहिक 'रामायण' में स्वर्गीय दारा सिंह ने जिस सादगी, प्रचंड शक्ति और भक्ति भाव से हनुमान जी का किरदार निभाया था, वह दशकों तक भारतीय संस्कृति में अमिट छाप छोड़ चुका है। इसके बाद किसी भी अभिनेता के लिए उस स्तर की दिव्यता को पर्दे पर दोबारा जीवंत करना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा था। जब नितेश तिवारी ने इस रोल के लिए सनी देओल से संपर्क किया, तो उन्होंने पाया कि सनी देओल की चौड़ी छाती, स्वाभाविक भारी-भरकम कद-काठी, रौबदार आवाज और आंखों में छलकती मासूमियत इस किरदार के लिए बिल्कुल सटीक बैठती है। सनी देओल के ढाई किलो के हाथ की असली ताकत अब प्रभु राम की भक्ति में समर्पित गदा के रूप में पर्दे पर दिखाई देगी। बताया जा रहा है कि सनी देओल ने इस किरदार को निभाने के लिए कई हफ्तों तक विशेष शारीरिक प्रशिक्षण लिया है और अपनी दिनचर्या में पूरी तरह सात्विक जीवनशैली को अपनाया है, ताकि किरदार की आध्यात्मिक पवित्रता उनके अभिनय और हाव-भाव में स्पष्ट रूप से झलक सके।
हॉलीवुड स्तर का प्रोस्थेटिक्स और DNEG का वीएफएक्स: बिना एआई तकनीक के गढ़ा गया अलौकिक रूप
फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा, जिनकी कंपनी DNEG ने 'ड्यून', 'ओपेनहाइमर' और 'इंटरस्टेलर' जैसी हॉलीवुड फिल्मों के लिए ऑस्कर जीते हैं, इस बार रामायण में तकनीक और कला का ऐसा संतुलन बना रहे हैं जो भारतीय सिनेमा में पहले कभी नहीं देखा गया। सनी देओल के चेहरे और शरीर के लिए किसी भी सस्ते या अति-काल्पनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा नहीं लिया गया है। इसके बजाय हॉलीवुड के शीर्ष प्रोस्थेटिक मेकअप आर्टिस्ट्स की मदद से एक ऐसा रियलिस्टिक लुक तैयार किया गया है, जिसमें सनी देओल के चेहरे के स्वाभाविक भाव, आंखें और मुस्कान पूरी तरह साफ दिखाई देंगी। इसके साथ ही, महाबली के विशालकाय शरीर, उनकी दिव्य आभा और वानर रूप के सूक्ष्म बालों व मांसपेशियों के टेक्सचर को निखारने के लिए अत्याधुनिक सीजीआई (CGI) का उपयोग किया गया है। मेकर्स का लक्ष्य यह है कि दर्शक जब पर्दे पर हनुमान जी को देखें, तो उन्हें कोई कार्टूनिश सुपरहीरो नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास से परिपूर्ण एक साक्षात जीवित पौराणिक देवस्वरूप की अनुभूति हो।
केवल कैमियो नहीं, बल्कि पार्ट-2 और सोलो स्पिन-ऑफ की नींव: नमित मल्होत्रा का महाबली को लेकर मेगा प्लान
सनी देओल का यह किरदार केवल 'रामायण' के दो भागों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में निर्माता नमित मल्होत्रा ने यह आधिकारिक खुलासा किया कि वे रामायण को केवल एक या दो फिल्मों तक सीमित रखने के बजाय एक बहुत बड़ा सिनेमैटिक यूनिवर्स बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस मास्टर प्लान के तहत रामायण के दो मुख्य भागों के अलावा भगवान हनुमान के पराक्रम पर केंद्रित एक अलग सोलो स्पिन-ऑफ फिल्म भी बनाई जाएगी, जिसमें सनी देओल ही मुख्य भूमिका में पूरी कहानी का नेतृत्व करेंगे। 'रामायण: पार्ट वन' में उनका आगमन दरअसल इस पूरे यूनिवर्स की सबसे मजबूत नींव का काम करेगा। पार्ट-2 में जहां यश (रावण) और सनी देओल (हनुमान) के बीच की गर्जना और शक्ति का टकराव देखने को मिलेगा, वहीं सोलो फिल्म में हनुमान जी के बाल्यकाल से लेकर उनकी अमरता और चिरंजीवी होने के रहस्यों को अंतरराष्ट्रीय विजुअल इफेक्ट्स के साथ पेश किया जाएगा।
15 मिनट का स्क्रीन टाइम लेकिन तालियों की गारंटी: जब गदा उठाकर पर्दे पर गरजेंगे तारा सिंह
ट्रेड एनालिस्ट्स और बॉक्स ऑफिस विशेषज्ञों का मानना है कि 'गदर 2' की ऐतिहासिक सफलता के बाद पूरे भारत के सिंगल स्क्रीन से लेकर मल्टीप्लेक्स तक सनी देओल का जो जन-जुड़ाव बना हुआ है, वह 'रामायण' के लिए सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता साबित होगा। फिल्म के पहले भाग में भले ही 90 प्रतिशत कहानी भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के इर्द-गिर्द बुनी गई हो, लेकिन अंतिम क्षणों में सनी देओल की एंट्री पूरे थियेटर के माहौल को उत्सव में बदलने की क्षमता रखती है। जब बैकग्राउंड में संस्कृत के शक्तिशाली श्लोक और हंस ज़िमर व ए.आर. रहमान का दिव्य संगीत गूंजेगा, और सनी देओल अपने विशाल रूप में गदा थामे 'सियावर रामचंद्र की जय' का उद्घोष करेंगे, तो वह सिनेमाई अनुभव दर्शकों को हमेशा के लिए मंत्रमुग्ध कर देगा। मेकर्स द्वारा उनके लुक पर बनाए रखा गया यह रहस्य ही इस बात का संकेत है कि जब यह पर्दा उठेगा, तो वह भारतीय सिनेमा का सबसे यादगार और ऐतिहासिक पल साबित होगा।