अडानी पावर से मिला ₹28,000 करोड़ का मेगा ऑर्डर, BHEL के शेयर खरीदने की मची जबर्दस्त होड़
नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान उस वक्त जबर्दस्त हलचल मच गई, जब देश की दिग्गज सरकारी इंजीनियरिंग व विनिर्माण कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) को लेकर एक बहुत बड़ी कारोबारी खबर सामने आई। अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी 'अडानी पावर लिमिटेड' ने भेल को 4 बड़े थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए कई विशालकाय अनुबंध सौंपे हैं। इस ऐतिहासिक समझौते की कुल अनुमानित वैल्यू 20,000 करोड़ रुपये से लेकर 28,000 करोड़ रुपये तक आंकी गई है। जैसे ही कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को इस महा-डील की आधिकारिक सूचना दी, दलाल स्ट्रीट पर भेल के शेयरों को खरीदने की मानो होड़ मच गई। खुदरा निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों ने इस सरकारी शेयर पर आक्रामक दांव लगाया, जिससे बीएसई (BSE) और एनएसई (NSE) पर भेल का शेयर देखते ही देखते लगभग 7 फीसदी की छलांग लगाकर 425 रुपये के स्तर के पार पहुंच गया। इस एक खबर ने पूरे पावर और कैपिटल गुड्स सेक्टर के सेंटिमेंट को नई रफ्तार दे दी है।
अडानी पावर के 4 मेगा प्रोजेक्ट्स: 6,400 मेगावाट क्षमता और BHEL के काम का दायरा
एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भेल को अडानी पावर लिमिटेड से 4 अलग-अलग थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए उपकरण और सेवाएं मुहैया कराने का ठेका मिला है। इनमें से प्रत्येक प्रोजेक्ट 2×800 मेगावाट यानी कुल 1,600 मेगावाट क्षमता का होगा, जिसका सीधा अर्थ है कि चारों परियोजनाओं को मिलाकर कुल 6,400 मेगावाट बिजली उत्पादन की विशाल क्षमता तैयार की जाएगी। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक व्यक्तिगत प्रोजेक्ट का मूल्य वस्तु एवं सेवा कर (GST) को छोड़कर लगभग 5,000 करोड़ रुपये से 7,000 करोड़ रुपये के बीच बैठता है। इस प्रकार चारों प्रोजेक्ट्स का संयुक्त मूल्य 28,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इस अनुबंध के तहत भेल को सुपरक्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर आधारित बॉयलर, टर्बाइन, जनरेटर और इनसे जुड़े सभी मुख्य सहायक उपकरणों (Auxiliaries) की इंजीनियरिंग, निर्माण, आपूर्ति और कमीशनिंग का दायित्व निभाना होगा। काम का यह दायरा सिर्फ मशीनों की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साइट पर लगने वाली तकनीकी और परामर्श सेवाओं का प्रबंधन भी भेल के विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा।
₹2.58 लाख करोड़ के पार पहुंची ऐतिहासिक ऑर्डर बुक: पावर से लेकर डिफेंस तक मजबूत स्थिति
अडानी पावर से मिले इस ताजा मेगा ऑर्डर के जुड़ने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की इस नवरत्न/महारत्न कंपनी की वित्तीय विजिबिलिटी अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंच गई है। 30 सितंबर को समाप्त हुई तिमाही तक भेल की कुल ऑर्डर बुक पहले ही 2,57,571 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को छू चुकी थी। अब 28,000 करोड़ रुपये के इस नए अनुबंध के औपचारिक रूप से शामिल होने के बाद कंपनी की ऑर्डर बुक लगभग 2.80 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचती दिख रही है, जो अगले 4 से 5 वर्षों के लिए कंपनी के पास काम की कोई कमी न होने का पुख्ता प्रमाण है। सबसे खास बात यह है कि भेल ने हाल के वर्षों में केवल पारंपरिक थर्मल पावर पर अपनी निर्भरता कम की है और अपने पोर्टफोलियो में व्यापक विविधता लाई है। वर्तमान में कंपनी के पास रेलवे और हाई-स्पीड ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर से 16,400 करोड़ रुपये, पावर ट्रांसमिशन से 13,600 करोड़ रुपये, न्यूक्लियर एनर्जी से 12,800 करोड़ रुपये, कोल गैसिफिकेशन से 9,000 करोड़ रुपये और रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र से 7,300 करोड़ रुपये से अधिक के सक्रिय ऑर्डर मौजूद हैं।
दूसरी तिमाही (Q2) के धमाकेदार नतीजे: 120% बढ़ा शुद्ध मुनाफा और 76% उछला EBITDA
शेयर बाजार में भेल के प्रति निवेशकों के इस जबर्दस्त आकर्षण की एक बड़ी वजह हाल ही में घोषित किए गए कंपनी के दूसरी तिमाही के शानदार वित्तीय परिणाम भी हैं। चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में भेल ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपने परिचालन से होने वाले राजस्व में सालाना आधार पर 23.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिससे कुल रेवेन्यू बढ़कर 9,300 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं कामकाजी मुनाफे यानी एबिटा (EBITDA) के मोर्चे पर कंपनी ने बाजार को पूरी तरह चौंका दिया; सालाना आधार पर एबिटा 76.4 फीसदी की भारी छलांग लगाकर 1,025.8 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में महज 581.46 करोड़ रुपये था। शुद्ध लाभ (Net Profit) के मोर्चे पर तो कंपनी का मुनाफा 120 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 810 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 368 करोड़ रुपये रहा था। बेहतर मार्जिन वाले ऑर्डरों के क्रियान्वयन और कच्चे माल की लागत पर कड़े नियंत्रण के चलते कंपनी का ऑपरेटिंग परफॉरमेंस कई गुना सुधरा है।
5 साल में 490% का मल्टीबैगर रिटर्न: शेयर ने कराई निवेशकों की बंपर कमाई
अगर भेल के शेयर के ऐतिहासिक प्रदर्शन पर नजर डालें, तो इसने लंबी अवधि के निवेशकों को धनवान बना दिया है। पिछले 5 वर्षों के दौरान इस पीएसयू स्टॉक ने लगभग 490 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है, यानी निवेशकों की पूंजी को करीब छह गुना तक बढ़ा दिया है। वहीं पिछले तीन साल की अवधि में यह शेयर 229 प्रतिशत और बीते एक साल में करीब 58 फीसदी तक चढ़ चुका है। चालू वर्ष 2026 में भी यह स्टॉक 45 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दिखा चुका है। बुधवार को आई तेजी के दौरान शेयर ने 425.70 रुपये का इंट्राडे हाई छुआ। गौरतलब है कि इस शेयर का 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर 463.60 रुपये है, जो इसने 14 अक्टूबर को छुआ था, जबकि इसका 52-हफ्ते का निचला स्तर 239.25 रुपये रहा है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत वॉल्यूम के साथ आई यह ताजा रैली शेयर को दोबारा अपने रिकॉर्ड हाई की ओर ले जाने का दम रखती है।
ब्रोकरेज फर्म्स का बुलिश नजरिया: ₹605 तक के टारगेट प्राइस की भविष्यवाणी
अडानी ग्रुप से मिले इस भारी-भरकम ऑर्डर और मजबूत तिमाही आंकड़ों के बाद घरेलू और विदेशी ब्रोकरेज हाउसेस भेल के भविष्य को लेकर बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं। कई प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने इस स्टॉक पर अपनी 'BUY' (खरीदने) की रेटिंग को बरकरार रखते हुए इसके टारगेट प्राइस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। आईआईएफएल इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज और नुवामा जैसे रिसर्च संस्थानों ने कंपनी की कार्यप्रणाली में आए अनुशासन, प्रोजेक्ट्स के समय पर क्रियान्वयन और मजबूत कैश फ्लो जनरेशन की सराहना की है। कुछ ब्रोकरेज हाउसों ने इस शेयर के लिए 540 रुपये से लेकर 605 रुपये तक का लॉन्ग-टर्म टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार जिस तरह बेस-लोड थर्मल पावर प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने पर दोबारा जोर दे रही है, उसका सबसे बड़ा प्रत्यक्ष लाभार्थी भेल ही बना रहेगा क्योंकि देश में भारी टर्बाइन और बॉयलर बनाने का सबसे बड़ा घरेलू ढांचा इसी कंपनी के पास है।
देश में ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत में भेल का रणनीतिक योगदान
भारत सरकार द्वारा 2030 और 2047 तक देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जहां एक तरफ सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है, वहीं ग्रिड की स्थिरता और पीक लोड की आपूर्ति के लिए सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट्स की अनिवार्यता भी निर्विवाद रूप से स्वीकार की जा चुकी है। केंद्र सरकार की योजना अगले कुछ वर्षों में 80 गीगावाट से अधिक नई थर्मल क्षमता जोड़ने की है। इस पूरे परिदृश्य में भेल 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का केंद्रीय पहिया बनकर उभरी है। अडानी पावर जैसी निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनियों द्वारा चीनी या अन्य विदेशी उपकरणों के बजाय भेल की स्वदेशी तकनीक पर 28,000 करोड़ रुपये का दांव लगाना यह दर्शाता है कि घरेलू इंजीनियरिंग पर कॉरपोरेट जगत का विश्वास कितना गहरा हो चुका है। आने वाले समय में एनटीपीसी (NTPC), दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) और राज्य बिजली बोर्डों से भी भेल को कई अन्य बड़े टेंडर मिलने की प्रबल संभावना है, जो इसके वित्तीय स्वास्थ्य को नए पंख लगा सकते हैं।