Jio IPO पर टूटा निवेशकों का सैलाब: ₹8,110 करोड़ की एंकर बुक पर ₹2.5 लाख करोड़ की बिडिंग

Jio IPO पर टूटा निवेशकों का सैलाब: ₹8,110 करोड़ की एंकर बुक पर ₹2.5 लाख करोड़ की बिडिंग

भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में शुमार होने जा रहे जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के इश्यू को लेकर संस्थागत निवेशकों में असाधारण उत्साह देखने को मिला है। सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने से ठीक पहले कंपनी की एंकर बुक सोमवार को खुली और कुछ ही घंटों के भीतर वैश्विक और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹2.5 लाख करोड़ से ज्यादा की अभूतपूर्व बोलियां लगा दीं। कंपनी ने एंकर निवेशकों के लिए ₹8,110 करोड़ के शेयर आरक्षित किए थे, जिसका सीधा मतलब है कि एंकर हिस्से को 30 गुना से अधिक बोलियां मिली हैं। भारतीय प्राइमरी मार्केट के इतिहास में किसी भी एंकर बुक के लिए यह अब तक की सबसे भारी मांग दर्ज की गई है।

दलाल स्ट्रीट के जानकारों के मुताबिक, जिस पैमाने पर विदेशी सॉवरेन वेल्थ फंड्स, वैश्विक एसेट मैनेजमेंट कंपनियां और भारत की प्रमुख म्यूचुअल फंड कंपनियों ने जियो के शेयरों के लिए कतार लगाई है, उससे यह साफ हो गया है कि कंपनी के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार के भविष्य को लेकर निवेशकों में अटूट भरोसा है। यह इश्यू आम निवेशकों (रिटेल) और गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) के लिए बुधवार, 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर तक बोली लगाई जा सकेगी।

दुनिया के सबसे बड़े वेल्थ फंड्स और डोमेस्टिक फंड्स बने हिस्सेदार

एंकर आवंटन में दुनिया के सबसे बड़े फंड मैनेजर्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका के दिग्गज एसेट मैनेजर ब्लैकरॉक (BlackRock) और फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स (Fidelity) ने भारी-भरकम बोलियां लगाई हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर जाने-माने संप्रभु संपत्ति कोष (Sovereign Wealth Funds) जैसे सिंगापुर का जीआईसी (GIC), अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) और नॉर्वे का सॉवरेन वेल्थ फंड (Norges Bank) भी एंकर बुक में बड़ी हिस्सेदारी पाने के लिए रेस में शामिल हैं।

विदेशी फंड्स के साथ-साथ भारत के घरेलू वित्तीय संस्थानों (DIIs) ने भी आक्रामक रूप से भाग लिया है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), एसबीआई लाइफ (SBI Life), एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life), आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल (ICICI Prudential) के साथ-साथ एसबीआई पेंशन और एचडीएफसी पेंशन जैसे बड़े रिटायरमेंट फंड्स ने भी अपने आवेदन सौंपे हैं। इतने विविध और मजबूत संस्थागत आधार का जुड़ना कंपनी की बैलेंस शीट और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर निवेशकों के गहरे विश्वास को रेखांकित करता है।

₹30,200 करोड़ का पूरा फ्रेश इश्यू, ₹1,065 से ₹1,119 का तय हुआ प्राइस बैंड

जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस सार्वजनिक निर्गम के लिए प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल ₹30,200 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है, जिसके तहत करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इस इश्यू की सबसे अहम खासियत यह है कि यह पूरी तरह से 'फ्रेश इश्यू' (Fresh Issue) है। यानी इसमें मौजूदा प्रमोटर रिलायंस इंडस्ट्रीज या कोई अन्य शुरुआती निवेशक अपनी हिस्सेदारी (OFS) नहीं बेच रहा है, जिससे जुटाया गया सारा पैसा सीधे कंपनी के खाते में जाएगा।

कंपनी ने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में स्पष्ट किया है कि आईपीओ से जुटाए जाने वाले कुल फंड में से लगभग ₹27,500 करोड़ का बड़ा हिस्सा मौजूदा कर्ज के प्री-पेमेंट या री-पेमेंट (कर्ज चुकाने) में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कंपनी का डेट प्रोफाइल लगभग शून्य या न्यूनतम स्तर पर आ जाएगा, जिससे सालाना भारी ब्याज खर्च की बचत होगी और सीधे तौर पर कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) कई गुना बढ़ेगा। इश्यू के सफल समापन के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का अनुमानित बाजार पूंजीकरण (Market Cap) ₹10.30 लाख करोड़ के पार पहुंचने की संभावना है।

डिजिटल इकोसिस्टम और 5G विस्तार से आकर्षित हुए निवेशक

वैश्विक निवेशकों द्वारा एंकर बुक पर इस कदर टूट पड़ने के पीछे जियो की विशाल उपभोक्ता पहुंच और भविष्य की तकनीक में उसका दबदबा है। 45 करोड़ से अधिक वायरलेस ग्राहकों के साथ जियो देश की शीर्ष दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी है। इसके अलावा देश भर में 5G नेटवर्क का सबसे तेजी से रोलआउट, होम ब्रॉडबैंड सेगमेंट में जियो एयरफाइबर (JioAirFiber) का तेजी से बढ़ता नेटवर्क, और क्लाउड व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेवाओं के लिए की गई रणनीतिक साझेदारियों ने कंपनी को सिर्फ एक टेलीकॉम ऑपरेटर से ऊपर उठाकर एक संपूर्ण टेक दिग्गज बना दिया है।

प्रति यूजर औसत कमाई (ARPU) में हालिया टैरिफ बढ़ोतरी के बाद लगातार इजाफा देखा जा रहा है। संस्थागत निवेशकों का मानना है कि भारत में डेटा की लगातार बढ़ती खपत और भविष्य में 6G व एंटरप्राइज सॉल्यूशंस के विस्तार से जियो की विकास दर अगले कई वर्षों तक दोहरे अंकों में बनी रहेगी। यही वजह है कि एंकर बुक के सीमित कोटे के बावजूद निवेशकों ने आक्रामक रूप से बड़े ऑर्डर प्लेस किए।

21 अक्टूबर से आम निवेशकों की बारी, ग्रे मार्केट में क्या है हलचल?

एंकर बुक में 30 गुना से अधिक डिमांड की खबर फैलते ही अनलिस्टेड मार्केट और ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में भी हलचल तेज हो गई है। ग्रे मार्केट के जानकारों के अनुसार, इश्यू खुलने से पहले ही इसका प्रीमियम ऊपरी प्राइस बैंड के मुकाबले मजबूत लिस्टिंग गेन की ओर इशारा कर रहा है।

खुदरा निवेशकों, कर्मचारियों और गैर-संस्थागत निवेशकों के पास 21 से 23 अक्टूबर के बीच अपनी बोलियां लगाने का मौका होगा। जानकारों का कहना है कि एंकर बुक के नतीजों ने इस आईपीओ के लिए माहौल पूरी तरह बना दिया है। जिस तरह की संस्थागत होड़ पहले ही दिन देखने को मिली है, उससे पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन शुरू होने के बाद रिटेल और क्यूआईबी (QIB) कैटेगरी में भी भारी ओवरसब्सक्रिप्शन के नए कीर्तिमान स्थापित होंगे।