अगरकर की जगह रमेश पवार आए तो प्रज्ञान ओझा क्यों बने BCCI चीफ सिलेक्टर? जानिए टेस्ट कैप्स का वो अटूट नियम
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सीनियर पुरुष चयन समिति को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान कर दिया। पूर्व तेज गेंदबाज अजीत अगरकर का मुख्य चयनकर्ता के तौर पर सफल और यादगार कार्यकाल 4 अक्टूबर 2026 को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया था। अगरकर के हटने के बाद खाली हुई जगह को भरने के लिए क्रिकेट सलाहकार समिति (CAC) ने मुंबई के पूर्व स्पिनर और अनुभवी कोच रमेश पवार को पांच सदस्यीय चयन समिति में शामिल करने की सिफारिश की और बोर्ड ने उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी। इस घोषणा के बाद से ही क्रिकेट फैंस और सोशल मीडिया पर एक बड़ा सवाल कौंध रहा है कि जब अजीत अगरकर की जगह पर सीधे तौर पर रमेश पवार की एंट्री हुई है, तो फिर टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता (चेयरमैन ऑफ सेलेक्टर्स) की कुर्सी पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा के हिस्से में कैसे आ गई। इस पहेली को सुलझाने के लिए बीसीसीआई के आधिकारिक संविधान और चीफ सिलेक्टर तय करने वाली दशकों पुरानी चयन नियमावली को समझना जरूरी है।
बीसीसीआई संविधान का 'टेस्ट कैप्स' फॉर्मूला: प्रज्ञान ओझा के चेयरमैन बनने की असली वजह
क्रिकेट फैंस के मन में यह भ्रम होना स्वाभाविक है कि जिस खाली पद पर नई नियुक्ति होती है, वही व्यक्ति सीधे तौर पर चेयरमैन बन जाता है, जैसा कि जुलाई 2023 में अजीत अगरकर के मामले में हुआ था जब वे चेतन शर्मा की जगह आए थे और सीधे चीफ सिलेक्टर बने थे। हालांकि, वास्तविकता यह है कि बीसीसीआई के संविधान के अनुसार चयन समिति का अध्यक्ष कोई नामांकित या मनोनीत पद नहीं होता, बल्कि यह विशुद्ध रूप से वरिष्ठता (सीनियरिटी) के आधार पर तय होता है। बोर्ड के नियमों के मुताबिक, पांच सदस्यीय राष्ट्रीय चयन पैनल में जिस पूर्व क्रिकेटर ने भारत के लिए सर्वाधिक टेस्ट मैच खेले हों, वह स्वतः ही चयन समिति का चेयरमैन यानी चीफ सिलेक्टर नियुक्त होता है। जब तक अजीत अगरकर पैनल में थे, उन्होंने भारत के लिए 26 टेस्ट मैच खेले थे, जो उस समय के सभी सदस्यों में सबसे ज्यादा थे, इसलिए वे चेयरमैन थे। अगरकर के हटने के बाद अब मौजूदा पांच सदस्यों की सूची में प्रज्ञान ओझा के नाम सबसे ज्यादा 24 टेस्ट मैच दर्ज हैं। वहीं नए शामिल हुए सदस्य रमेश पवार ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में केवल 2 टेस्ट मैच और 31 वनडे मैच खेले हैं। यही मुख्य कारण है कि रमेश पवार बतौर सदस्य पैनल में आए, जबकि वरिष्ठता के संवैधानिक नियम के तहत प्रज्ञान ओझा को मुख्य चयनकर्ता की सबसे ताकतवर कुर्सी सौंप दी गई।
मौजूदा 5 सदस्यीय चयन समिति में किसका पलड़ा कितना भारी?
बीसीसीआई द्वारा पुनर्गठित नई सीनियर पुरुष चयन समिति में अब पांचों जोनों का प्रतिनिधित्व पूरी तरह संतुलित हो चुका है। इस समिति के सभी पांच सदस्यों के टेस्ट क्रिकेट के आंकड़ों पर नजर डालें तो टेस्ट कैप्स की वरिष्ठता का गणित आईने की तरह साफ हो जाता है। समिति के नए चेयरमैन प्रज्ञान ओझा (साउथ/ईस्ट प्रतिनिधित्व) ने भारत के लिए 24 टेस्ट, 18 वनडे और 2 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं, जिसमें उनके नाम टेस्ट में 113 विकेट दर्ज हैं। दूसरे सबसे वरिष्ठ सदस्य पूर्व ओपनर शिव सुंदर दास (ईस्ट जोन) हैं, जिन्होंने भारत के लिए 23 टेस्ट और 4 वनडे मैच खेले हैं। तीसरे सदस्य पूर्व तेज गेंदबाज रुद्र प्रताप सिंह यानी आरपी सिंह (सेंट्रल जोन) हैं, जिनके नाम 14 टेस्ट, 58 वनडे और 10 टी20 मैच दर्ज हैं। चौथे सदस्य पूर्व विकेटकीपर अजय रात्रा (नॉर्थ जोन) हैं, जिन्होंने 6 टेस्ट और 12 वनडे खेले हैं। पांचवें और सबसे नए सदस्य रमेश पवार (वेस्ट जोन) के खाते में 2 टेस्ट और 31 वनडे मैच हैं। चूंकि 24 टेस्ट मैचों के साथ प्रज्ञान ओझा इस पैनल में सबसे ज्यादा अनुभवी रेड-बॉल क्रिकेटर हैं, इसलिए नियमानुसार चेयरमैन बनने का स्वाभाविक अधिकार केवल और केवल उन्हीं का बनता था।
सीएसी का इंटरव्यू राउंड और रमेश पवार की एंट्री की इनसाइड स्टोरी
अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने के बाद मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम स्थित बीसीसीआई मुख्यालय में हलचल तेज हो गई थी। अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे की सदस्यता वाली क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (CAC) ने वेस्ट जोन से खाली हुए पद के लिए औपचारिक आवेदन मंगाए थे। इस पद की दौड़ में कई दिग्गज खिलाड़ी शामिल थे, जिनमें घरेलू क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर, बड़ौदा के पूर्व खिलाड़ी कॉनर विलियम्स, जैकब मार्टिन और सलिल अंकोला जैसे बड़े नाम प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे। सीएसी ने 15 अक्टूबर को शॉर्टलिस्ट किए गए चार से पांच उम्मीदवारों के गहन इंटरव्यू लिए। इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान रमेश पवार का पलड़ा उनके कोचिंग और मैनेजमेंट अनुभव की वजह से सबसे भारी साबित हुआ। पवार भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच रह चुके हैं, जिनके मार्गदर्शन में टीम ने एशिया कप का खिताब जीता था और कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इसके अलावा वे मुंबई और गुजरात की रणजी टीमों के हेड कोच और बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (पूर्व में एनसीए) में बॉलिंग कोच की जिम्मेदारी भी सफलतापूर्वक निभा चुके हैं। उनकी इसी बहुआयामी समझ को देखते हुए सीएसी ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगाई।
अजीत अगरकर का स्वर्णिम दौर: बीसीसीआई ने की दिल खोलकर तारीफ
नए चयन पैनल के गठन के साथ ही बीसीसीआई ने पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के योगदान को आधिकारिक बयान में विशेष रूप से सराहा है। जुलाई 2023 में जिम्मेदारी संभालने वाले अजीत अगरकर का कार्यकाल भारतीय क्रिकेट के सबसे स्वर्णिम और सफल अध्यायों में गिना जाएगा। बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अगरकर ने भारतीय क्रिकेट के अत्यंत महत्वपूर्ण और बदलाव वाले दौर में चयन समिति का शानदार नेतृत्व किया। अगरकर के नेतृत्व वाले पैनल के कार्यकाल के दौरान ही टीम इंडिया ने तीन आईसीसी ट्रॉफियां अपने नाम कीं, जिनमें टी20 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक जीत शामिल है। इसके अलावा भारत ने दो एशिया कप खिताब जीते और लगातार दो एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल करने का अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाया। अगरकर के दौर में युवाओं को मौका देने, कार्यभार प्रबंधन (वर्कलोड मैनेजमेंट) और रोहित शर्मा व विराट कोहली के टी20 संन्यास के बाद नए दौर की टीम इंडिया तैयार करने में समिति ने अत्यंत निडर और कड़े फैसले लिए।
प्रज्ञान ओझा के सामने होंगी कौन-सी बड़ी चुनौतियां?
नवनियुक्त चीफ सिलेक्टर प्रज्ञान ओझा के कंधों पर अब भारतीय क्रिकेट के अगले चक्र को तैयार करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ चुकी है। प्रज्ञान ओझा भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा स्पिनरों में से रहे हैं जिन्होंने सचिन तेंदुलकर के विदाई टेस्ट में 'मैन ऑफ द मैच' का खिताब जीता था और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की थी। अब एक मुख्य चयनकर्ता के रूप में उनके सामने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के आगामी चक्र के लिए टीम का चयन, आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और आगामी सीमित ओवरों के टूर्नामेंट्स के लिए कोर खिलाड़ियों की पहचान करने का चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। साथ ही टेस्ट टीम में सीनियर खिलाड़ियों के रिप्लेसमेंट और घरेलू क्रिकेट से उभरती युवा प्रतिभाओं को नेशनल टीम के सेटअप में सुचारू रूप से ढालना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होगा। रमेश पवार की रणनीतिक दृष्टि और प्रज्ञान ओझा के नेतृत्व में यह नई चयन समिति भारतीय क्रिकेट को किस नई दिशा में ले जाती है, इस पर अब देश भर के क्रिकेट प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं।