भारत को फिर टेंशन देने लगे मुइज्जु: 10 साल बाद मालदीव के राष्ट्रपति का PAK दौरा

भारत को फिर टेंशन देने लगे मुइज्जु: 10 साल बाद मालदीव के राष्ट्रपति का PAK दौरा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक पाकिस्तान के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। पिछले 10 से अधिक वर्षों में किसी भी मालदीवियन राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने के अवसर पर यह दौरा आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान मुइज्जु पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।

हालांकि, यह दौरा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं दिखता। राजनयिक हलकों में चर्चा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और समुद्री संपर्क के साथ-साथ एक रक्षा व सुरक्षा समझौते (Defense & Maritime Security Deal) पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं। हिंद महासागर में रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मालदीव का पाकिस्तान के करीब जाना भारत की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े करने के लिए काफी है।

क्या है डिफेंस डील की तैयारी? हिंद महासागर में पाकिस्तान की नजर

मीडिया रिपोर्ट्स और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान और मालदीव के बीच रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए समझौते की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत दोनों देशों के बीच नौसैनिक प्रशिक्षण, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और मालदीव के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी जैसे पहलुओं पर बातचीत होने की संभावना है।

भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक इसलिए है क्योंकि मालदीव पारंपरिक रूप से भारत के समुद्री सुरक्षा घेरे (Security Umbrella) का अभिन्न हिस्सा रहा है। मुइज्जु पहले ही चीन के साथ सैन्य सहायता समझौता कर चुके हैं और अब पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते की सुगबुगाहट यह संकेत देती है कि इस्लामाबाद हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए मालदीव को जरिया बनाना चाहता है। भारत हमेशा से मालदीव की समुद्री निगरानी और तटरक्षक बल को मजबूत करने में अग्रणी रहा है, ऐसे में पाकिस्तान की एंट्री इस संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

भारत ने उबारा था दिवालिया होने से, फिर क्यों बदल रहे सुर?

मोहम्मद मुइज्जु का यह कदम इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि हाल के दिनों में उनके और भारत के संबंधों में आई तल्खी काफी हद तक कम हो चुकी थी। जब मालदीव विदेशी कर्ज के भारी संकट और डिफॉल्ट होने की कगार पर खड़ा था, तब भारत ने आगे आकर उसकी मदद की। भारत सरकार और आरबीआई ने मालदीव को 400 मिलियन डॉलर की सहायता और ₹3,000 करोड़ का करेंसी स्वैप रोलओवर उपलब्ध कराया, जिसकी वजह से मालदीव की अर्थव्यवस्था स्थिर हो सकी।

इस भारी वित्तीय मदद के बाद राष्ट्रपति मुइज्जु ने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया था। लेकिन अब अपनी तथाकथित 'मालदीव फर्स्ट' नीति का हवाला देते हुए मुइज्जु का पाकिस्तान पहुंचना यह दर्शाता है कि वे क्षेत्रीय कूटनीति में एक साथ कई नावों पर सवार होने की कोशिश कर रहे हैं।

सार्क (SAARC) को पुनर्जीवित करने का दांव और कूटनीतिक पेंच

इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को फिर से सक्रिय करने की कोशिश है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि "आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते," जिसके चलते पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण सार्क प्रक्रिया लंबे समय से ठप पड़ी है।

मुइज्जु द्वारा सार्क की बहाली पर जोर देना और इस्लामाबाद जाकर मंच साझा करना भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं के विपरीत नजर आता है। भारत बिम्सटेक (BIMSTEC) जैसे संगठनों को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि मालदीव और पाकिस्तान इसे दोबारा हवा देकर भारत पर परोक्ष दबाव बनाने की जुगत में दिख रहे हैं।

भारत की पैनी नजर और आगे का रणनीतिक रुख

भारत के विदेश मंत्रालय और नौसेना की नजर मुइज्जु के इस 3 दिवसीय दौरे पर पूरी तरह टिकी हुई है। मालदीव के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और भौगोलिक रिश्ते हैं, जिन्हें कोई भी तीसरा देश आसानी से नहीं तोड़ सकता।

हालांकि, भारत की 'रेड लाइन' हमेशा से साफ रही है कि मालदीव की जमीन या जलक्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी ऐसी ताकत द्वारा नहीं होना चाहिए जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने। यदि मुइज्जु का यह दौरा केवल औपचारिक व्यापारिक और 12 समझौतों तक सीमित रहता है तो बात अलग है, लेकिन किसी भी स्तर की सैन्य साझेदारी भारत और मालदीव के बीच हाल ही में सुधरे संबंधों में एक बार फिर दरार पैदा कर सकती है।