'पाकिस्तानी झंडे के साथ...', ध्रुव राठी पर बरसे किरेन रिजिजू; लंदन प्रोटेस्ट...

'पाकिस्तानी झंडे के साथ...', ध्रुव राठी पर बरसे किरेन रिजिजू; लंदन प्रोटेस्ट...

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो क्लिप साझा करते हुए ध्रुव राठी पर तीखा प्रहार किया है। इस वीडियो में प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच भारत विरोधी नारों के साथ-साथ पाकिस्तानी झंडे भी लहराते हुए दिखाई दे रहे हैं।

किरेन रिजिजू ने इस वीडियो को आधार बनाते हुए सवाल उठाया कि आखिर विदेशी धरती पर भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों और सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों में पाकिस्तानी झंडे और भारत विरोधी ताकतें क्यों शामिल हो जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर अपने कंटेंट के जरिए जाने-अनजाने ऐसे तत्वों को मंच और हवा देने का काम करते हैं जो विदेशी जमीन पर भारत की छवि को धूमिल करने की फिराक में रहते हैं।

'पाकिस्तानी झंडों के साथ विरोध कैसा?', रिजिजू ने दागे तीखे सवाल

किरेन रिजिजू ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का पूरा अधिकार है, लेकिन जब विरोध विदेशी जमीन पर देश की संप्रभुता और गरिमा को चोट पहुंचाने लगे, तो उसकी सीमाएं तय होनी चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर ध्रुव राठी को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जो लोग खुद को निष्पक्ष पत्रकार या विश्लेषक बताते हैं, वे इस बात पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं कि उनके बयानों और कैंपेन का सहारा लेकर कौन से तत्व सक्रिय हो रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि लंदन के प्रदर्शन में पाकिस्तानी झंडों की मौजूदगी यह साबित करती है कि यह विरोध केवल किसी नीति या सरकार के खिलाफ नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारत विरोधी विदेशी लॉबी काम कर रही थी। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे ऐसे एजेंडे को समझें जो विदेशी मंचों से देश के भीतर असंतोष पैदा करने की कोशिश करते हैं।

लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर क्या था पूरा मामला?

लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर समय-समय पर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन आयोजित किए जाते रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में कुछ प्रवासी भारतीय समूहों और संगठनों ने देश के आंतरिक मुद्दों को लेकर मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, उस भीड़ में अचानक अलगाववादी और पाकिस्तान समर्थक तत्व भी अपने झंडों और बैनरों के साथ शामिल हो गए।

वहां मौजूद पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन के दौरान देश विरोधी नारेबाजी और तिरंगे के समानांतर अन्य झंडे लहराए जाने के दृश्यों ने भारत में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया। इसी घटनाक्रम की फुटेज अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसे केंद्रीय मंत्री ने साझा कर विमर्श का केंद्र बना दिया।

ध्रुव राठी के कंटेंट और विदेशी समर्थकों पर लगातार उठते रहे हैं सवाल

ध्रुव राठी लंबे समय से अपनी आलोचनात्मक वीडियोज के चलते सत्ताधारी दल के नेताओं और समर्थकों के निशाने पर रहे हैं। जर्मनी में रहकर वीडियो बनाने वाले ध्रुव राठी पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि उनका कंटेंट एकतरफा होता है और वह देश की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करता है। वहीं ध्रुव राठी और उनके समर्थक हमेशा यह तर्क देते हैं कि लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना और नीतियों की आलोचना करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

इस बार जब लंदन प्रदर्शन के तार उनके विचारों और समर्थकों से जुड़ते दिखे, तो भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रतिष्ठा के नजरिए से जोड़ दिया। रिजिजू का यह बयान दिखाता है कि सरकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उठने वाली आवाजों और उनके विदेशी असर को लेकर कितनी सतर्क और आक्रामक रुख अपना रही है।

सोशल मीडिया पर दो गुटों में बंटी राय, छिड़ी जोरदार बहस

किरेन रिजिजू के इस पोस्ट के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग केंद्रीय मंत्री के रुख का पूरा समर्थन करते हुए कह रहा है कि देश के आंतरिक मतभेदों को विदेशी धरती पर ले जाकर पाकिस्तान जैसे देशों के समर्थकों के साथ हाथ मिलाना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वहीं दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बता रहा है। बहरहाल, लंदन प्रदर्शन के इस वीडियो ने ध्रुव राठी के राजनीतिक रुख और विदेशी मंचों पर भारत विरोधी गतिविधियों के बीच की कड़ी पर एक नई राष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है।