Gold Silver Price Crash: सोने और चांदी में भारी गिरावट, MCX पर चांदी 2 लाख के नीचे फिसली
भारतीय कमोडिटी बाजार और सर्राफा बाजारों में कीमती धातुओं के खरीदारों और निवेशकों के लिए बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वैश्विक आर्थिक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के कड़े रुख के चलते सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बिकवाली के भारी दबाव के बीच सोना करीब दो प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी में लगभग पांच प्रतिशत की भारी भरकम गिरावट देखी गई। इस तेज बिकवाली का नतीजा यह रहा कि वायदा बाजार में चांदी का भाव एक बार फिर मनोवैज्ञानिक स्तर दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे फिसल गया है। त्योहारी और शादियों के आगामी सीजन से पहले आई इस बड़ी गिरावट ने जहां आम आभूषण खरीदारों के चेहरे पर राहत की चमक ला दी है, वहीं बुलियन मार्केट के बड़े निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
MCX वायदा बाजार में औंधे मुंह गिरी चांदी: 4 दिसंबर के कॉन्ट्रैक्ट्स में भारी बिकवाली
घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कारोबार के दौरान बिकवाली का दौर हावी रहा। 4 दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 2.03 प्रतिशत गिरकर 1,43,069 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। वहीं, चांदी के वायदा सौदों में गिरावट और भी ज्यादा आक्रामक रही। 4 दिसंबर 2026 का चांदी वायदा अनुबंध 4.92 प्रतिशत यानी 10,284 रुपये की भारी गिरावट के साथ 1,98,884 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया। वायदा कारोबारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स में मजबूती और ट्रेडर्स द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के कारण घरेलू वायदा बाजार में लगातार लांग पोजिशन्स काटी जा रही हैं, जिसका सीधा असर दोनों कीमती धातुओं के भाव पर देखने को मिल रहा है।
दिल्ली सर्राफा बाजार में 3 महीने के निचले स्तर पर सोना: चांदी भी 10 महीने के लो पर
हाजिर बाजार में भी वायदा की कमजोरी का सीधा असर दिखा और देश की सबसे बड़ी बुलियन मार्केट दिल्ली में सोने-चांदी के दाम लुढ़क गए। अखिल भारतीय सर्राफा संघ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना 1,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की फिसलन के साथ तीन महीने के निचले स्तर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर समेत) पर आ गया। इससे पहले 30 जुलाई को सोने का हाजिर भाव इस स्तर के आसपास देखा गया था। दूसरी तरफ, औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की कमजोर मांग के चलते दिल्ली हाजिर बाजार में चांदी 5,900 रुपये प्रति किलोग्राम टूटकर 2,07,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पर बंद हुई। यह चांदी का पिछले 10 महीने का सबसे निचला स्तर है, जबकि इससे पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,13,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही थी।
रिकॉर्ड हाई से आधी रह गई चांदी की चमक: 4 लाख के ऐतिहासिक स्तर से 1.97 लाख रुपये टूटी
अगर चांदी के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो सफेद धातु ने पिछले महीनों में जिस तेजी से छलांग लगाई थी, उतनी ही तेजी से अब नीचे की तरफ आ रही है। चांदी 31 दिसंबर 2025 के 2.39 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से अब तक 31,500 रुपये यानी करीब 13.18 प्रतिशत टूट चुकी है। इतना ही नहीं, 29 जनवरी को बने 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड लाइफ-टाइम हाई से तुलना करें, तो चांदी का भाव अब तक 1.97 लाख रुपये प्रति किलोग्राम यानी करीब 48.70 प्रतिशत तक घट चुका है। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष एवं शोध विश्लेषक (जिंस एवं मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और अनिश्चितताओं के बीच घरेलू बाजार में सोने और चांदी दोनों पर दबाव लगातार गहरा रहा है।
वैश्विक बाजारों में भी भारी मंदी: 4100 डॉलर से नीचे आया सोना, कच्चा तेल बना बड़ी वजह
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं में भारी गिरावट का रुख बना हुआ है। विदेशी बाजारों में हाजिर सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। हाजिर सोना 68.98 डॉलर यानी करीब 1.7 प्रतिशत गिरकर 4,072.30 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की हाजिर कीमत भी करीब 4 प्रतिशत टूटकर 55.72 डॉलर प्रति औंस रह गई। पीएल कैपिटल के जिंस प्रमुख आशीष राजोदिया के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का भाव बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई दोबारा भड़कने का खतरा पैदा हो गया है। जब भी क्रूड ऑयल में उछाल आता है, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे ब्याज न देने वाले सोने और चांदी में निवेश का आकर्षण कमजोर पड़ता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें: ब्याज दरों के संकेत तय करेंगे आगे की दिशा
कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का आक्रामक मौद्रिक रुख धातुओं के लिए चुनौती बना हुआ है। ब्रोकरेज मंच लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के मुताबिक, निवेशकों का पूरा फोकस अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अहम मौद्रिक नीति बैठक और आगामी अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर लगा है। यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को लेकर सख्त रुख बरकरार रखता है, तो सोने-चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, यदि कच्चे तेल के दाम स्थिर होते हैं और अमेरिका-ईरान तनाव में थोड़ी नरमी आती है, तो कीमती धातुओं को निचले स्तरों पर दोबारा सहारा मिल सकता है और खरीदारी लौट सकती है।